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बीसीसीआई ने लिया बड़ा फैसला, 87 साल में पहली बार भारतीय क्रिकेट में होगा ऐसा

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 January 2021, 21:35 IST

कोरोना वायरस के असर को देखते हुए बीसीसीआई ने फैसला लिया है कि इस साल रणजी ट्राफी का आयोजन नहीं होगा. बता दें, भारतीय क्रिकेट के इतिहास में बीते 87 सालों में ऐसा पहली बार होगा, जब बोर्ड भारत के प्रमुख प्रथम श्रेणी घरेलू टूर्नामेंट का आयोजन नहीं कर रहा है. कई राज्य क्रिकेट संघ ने रणजी की जगह विजय हजारे ट्राफी के आयोजन की बात कही थी और बोर्ड ने भी इस टूर्नामेंट के आयोजन को हरी झंडी दे दी है.

बीसीसीआई इस साल वीनू मांकड़ ट्रॉफी के लिए अंडर-19 नेशनल वनडे टूर्नामेंट का आयोजन करवाएगा. इसके साथ ही महिला राष्ट्रीय वनडे टूर्नामेंट का आयोजन भी होगा. इस बाबत बोर्ड के सचिव जय शाह ने सभी राज्य ईकाइयों को पत्र भेजा है.

बता दें, BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव शाह रणजी टूर्नामेंट के लिए उत्सुक थे. लेकिन कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए दो महीने के अधिक समय के लिए दो चरण में बॉयो बबल बनाना व्यवहारिक नहीं होगा. रणजी मैच में खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में सबसे अधिक मैच फीस मिलती है.


जय शाह ने इस संबंध में पत्र लिखा,"मुझे ये बताते हुए खुशी हो रही है कि हम सीनियर महिला वनडे टूर्नामेंट, विजय हजारे ट्रॉफी और अंडर 19 वीनू मांकड़ ट्रॅाफी का आयोजन कर रहे हैं. घरेलू सत्र 2020-21 को लेकर आपका फीडबैक मिलने के बाद ये फैसला लिया गया."

जय शाह ने इस पत्र में यह भी लिखा है कि कोरोना काल के दौरान घरेलू क्रिकेट का आयोजन करना कितना कठिन था. अपने पत्र में उन्होंने लिखा,"हम पहले ही काफी समय गंवा चुके हैं और सुरक्षात्मक उपायों को ध्यान में रखकर क्रिकेट कैलेंडर तैयार करना काफी कठिन था."

बता दें, बीसीसीआई की एजीएम में यह भी फैसला लिया गया था कि सभी पुरुष और महिला प्रथम श्रेणी खिलाड़ियों को कोविड-19 महामारी के कारण संशोधित घरेलू सत्र को देखते हुए उचित मुआवजा दिया जाएगा. ऐसे में संभव है कि रणजी ट्राफी के नहीं होने पर खिलाड़ियों को मुआवजा मिलेगा.

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First published: 30 January 2021, 21:30 IST
 
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