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सचिन में क्या था ऐसा खास कि उनके आउट होते ही लोग टीवी बंद कर देते थे

विकाश गौड़ | Updated on: 24 April 2018, 11:50 IST

2 अप्रैल 2011...जगह मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम...मैच वर्ल्डकप 2011 का फाइनल...ड्रेसिंग रुम से सचिन-सहवाग की जोड़ी निकली...सचिन ने हमेशा की तरह मैदान में कदम रखते ही आसमान की तरफ देखा और स्टेडियम सचिन...सचिन...सचिन...से गुंजायमान हो उठा...सहवाग आगे-आगे और सचिन पीछे-पीछे...

हैंड ग्लब्स पहनकर दोनों बराबर में आए और दोनों ने अपने हैंड ग्लब्स टकराए...इस दौरान भी स्टेडियम इंडिया...इंडिया...इंडिया के साथ-साथ सचिन...सचिन...सचिन...भी सुनाई दे रहा था. इसके बाद शुरु हुआ 'सचिन का सपना'...

दरअसल, सचिन का सपना ये कोई रात में सोते समय देखा गया सपना नहीं था ये सपना वो सपना था जो कोरी आंखों से सचिन ने देखा था. इस सपने को देखते-देखते दिन, महीने, साल और दशक भी निकल गया लेकिन सचिन का सपना पूरा नहीं हुआ. हालांकि एक बार सचिन का ये सपना पूरा होने के करीब था लेकिन एक आम सपने की तरह टूट गया.

सचिन मायूस हुए, समर्थकों की दीवाली नहीं मनी...इसके बाद भी 8 साल गुजर गए लेकिन सपना पूरा नहीं हुआ. लेकिन साल 2011 में 2 अप्रैल को सचिन का सपना पूरा होना था... बता दें कि सचिन का ये सपना था टीम इंडिया के लिए वर्ल्डकप जीतना.

सचिन-सहवाग की जोड़ी 2 अप्रैल 2011 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम थी जो कि सचिन का घरेलू मैदान था. टीम इंडिया को श्रीलंका से मिले 275 रनों के लक्ष्य का पीछा करना था और टीम को विश्व विजेता बनाना था. लेकिन सचिन का सपना तब टूटता दिखा जब सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग लसिथ मलिंगा की अंदर आती पहले ओवर की दूसरी ही गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए.

वीरेंद्र सहवाग ने देर न करते रिव्यू (डीआरएस) ले लिया. यहां तक कि उन्होंने दूसरे छोर पर खड़े सचिन तेंदुलकर से भी नहीं पूछा कि गेंद स्टंप्स की लाइन में थी या नहीं क्योंकि उन्हें पता था कि ये मुकाबला उनके अलावा सचिन और पूरे भारत के लिए कितने मायने रखता था. बाद में सहवाग को आउट दे दिया गया और स्टेडियम में शांति पसर गई.

इसके बाद सचिन तेंदुलकर ने गौतम गंभीर के साथ अपने सपने को पूरा करने के लिए पारी को आगे बढ़ाया. इस दौरान सचिन ने पहली बाउंड्री स्ट्रेट ड्राइव के जरिए लगाई, दूसरी को पॉइंट बॉउंड्री के बाहर भेजा और सचिन का कुल स्कोर 18 रन हो गया लेकिन इस बीच टीम इंडिया स्कोर 31 रन ही हुआ था और फिर से स्टेडियम में भारतीय संमर्थकों में मायूसी छा गई. स्टेडियम में अगर कोई खुश था तो वो श्रीलंकाई टीम और टीम समर्थक.

दरअसल, श्रीलंका की पारी का सातंवा ओवर लेकर आए लसिथ मलिंगा ने पहली गेंद को एंगल बनाकर बाहर की तरफ डाला जिसे सचिन आसानी से छोड़ सकते थे लेकिन कवर ड्राइव मारने के चक्कर में गेंद सचिन के बल्ले को छूते हुए विकेट के पीछे खड़े श्रीलंकाई कप्तान के दस्तानों में चली गई. इस तरह से स्टेडियम में खामोशी छा गई...टीवी सेट बंद हो गए और सचिन का सपना, महज एक सपना बनकर रह गया...ऐसा लगा मानो किसी ने सपने के खत्म होने से पहले ही नींद से जगा दिया हो...

सचिन के आउट होने के बाद आए आज के सचिन यानी विराट कोहली ने गंभीर के मिलकर टीम को आगे बढ़ाया और मैच में एक आस जगाई लेकिन इसी बीच विराट आउट हो गए. इसके बाद टीम के कप्तान एमएस धोनी ने अहम कदम उठाया और पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते आ रहे युवराज सिंह से पहले बल्लेबाजी करने आ गए. देखते ही देखते सचिन का ये सपना धोनी के छक्के के साथ पूरा गया और टीम इंडिया ने 28 साल के बाद इतिहास रचा.

आज हम सचिन की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज सचिन 45 साल के हो गए हैं. सचिन ने देश के लिए लगभग 24 साल तक क्रिकेट खेला है. वनडे क्रिकेट इतिहास के पहले दोहरे शतक के अलावा सचिन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट में सौ शतक ठोके हैं जो कि एक कीर्तिमान है. सचिन के इस रिकॉर्ड के आसपास भी कोई नहीं है.

सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड

200 टेस्ट मैच खेलने वाले एकलौते खिलाड़ी.
टेस्ट क्रिकेट में 15 हजार से ज्यादा(15921) रन बनाने वाले खिलाड़ी.
टेस्ट में 6 दोहरे शतक, 51 शतक और 68 अर्धशतक

वनडे में सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड

463 मैच खेलने वाले इकलौते बल्लेबाज
वनडे में 18 हजार से ज्यादा(18426) रन बनाने वाले एकमात्र बल्लेबाज.
वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज.
वनडे में 49 शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी
वनडे में 96 अर्धशतक लगाकर इतिहास रचने वाले पहले खिलाड़ी बने सचिन.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का शतक (टेस्ट वनडे मिलाकर)

200 विकेट भी सचिन तेंदुलकर के नाम हैं.

First published: 24 April 2018, 11:50 IST
 
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