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सचिन तेंदुलकर ने बताया- आख़िर क्यों 2003 के वर्ल्ड कप फ़ाइनल में हार गया भारत?

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 May 2017, 17:00 IST

सचिन तेंदुलकर ने 2003 के वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के फाइनल न जीतने की वजह बताई है. सचिन ने कहा कि अगर उस समय इंटरनेशनल क्रिकेट में ट्वेंटी-20 मैच का फॉर्मैट होता, तो भारत फाइनल मुकाबला जीत सकता था.

2003 में भारत विश्व कप जीतने की दावेदार थी, लेकिन फाइनल में भारत और सचिन का वर्ल्ड कप जीतने का सपना उस समय अधूरा गया था. साल 1983 के बाद टीम इंडिया ने साल 2011 में वनडे क्रिकेट इतिहास में दूसरी बार वर्ल्ड कप जीता था. सचिन तेंदलुकर का टीम के खिलाड़ी के तौर पर ये पहला विश्व कप खिताब था.

अपनी फिल्म सचिन : अ बिलियन ड्रीम्स के प्रचार-प्रसार में  तेंदुलकर अपने करियर के बारे में कई बातों का खुलासा कर रहे हैं. मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का मानना है कि छोटे फॉर्मैट के क्रिकेट ने लगभग सब कुछ बदल दिया है. उनके अनुसार टी-20 क्रिकेट के आने से वनडे में बड़े स्कोर का पीछा करने के मामले में बल्लेबाजों के रवैये में बदलाव आया है और अगर 2003 विश्व कप के दौरान ऐसा होता तो भारत को मदद मिलती.

सचिन तेंदुलकर ने पुराने दिन याद करते हुए कहा, "मुझे लगता है कि यदि हम वह मैच आज खेलते तो खिलाड़ी अलग तरीके से खेलते." उन्होंने कहा, "हम उस मैच में उत्साह से भरे थे और पहले ही ओवर से काफी उत्साहित थे." 

उस समय स्कोर 300 से पार हो जाने पर टीमें लक्ष्य को असंभव मान लेती थीं और एक्सपर्ट भी हार लगभग तय बताने लगते थे. उन्होंने कहा, "टी-20 क्रिकेट उस समय होता तो खिलाड़ियों का रवैया अलग होता, क्योंकि उन दिनों 359 रन बनाना मुश्किल लगता था. आज के दौर में यह आसान लगता है."

2003 के फाइनल में मिला था 360 रन का लक्ष्य

2003 के वर्ल्ड कप में भारतीय टीम शानदार तरीके से खेलते हुए फाइनल में पहुंची थी. दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में खेले गए फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर धुनाई की थी.

ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए दो विकेट पर 359 रन बनाए थे, जिसके जवाब में भारतीय टीम 234 रन पर आउट हो गई थी. टीम इंडिया फाइनल मुकाबला 125 रन से हार गई थी.

First published: 24 May 2017, 17:00 IST
 
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