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स्वच्छ क्रिकेट अभियान: सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से हटाया

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 January 2017, 11:39 IST
(फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंड्रोल बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को उनके पद से हटा दिया है. लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लेकर सर्वोच्च अदालत ने यह बड़ा आदेश दिया है. 

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही बीसीसीआई के सचिव अजय शिर्के को भी बर्खास्त कर दिया है. सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में अनुराग ठाकुर से जवाब मांगते हुए पूछा क्या है कि क्यों न उनके खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही शुरू की जाए?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "70 साल से ऊपर कोई शख्स, दिवालिया (मानसिक रूप से विक्षिप्त), मंत्री, सरकारी कर्मचारी, अदालत से किसी मामले में दोषी और बीसीसीआई में लगातार 9 साल तक किसी पद पर बना रहने वाला व्यक्ति बीसीसीआई का पदाधिकारी नहीं हो सकता है." 

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी. 

18 जुलाई 2016 के आदेश की अवमानना

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के दोनों अधिकारियों को हटाते हुए कहा कि अदालत के 18 जुलाई 2016 के आदेश का अनुपालन नहीं करने की वजह से बर्खास्तगी का फैसला लिया है. 

लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर बीसीसीआई के रुख की वजह से अदालत ने यह कड़ा आदेश सुनाया है. लोढ़ा कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में 28 सितंबर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बीसीसीआई लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं करना चाहता है.

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय बोर्ड बदलावों को लागू करने के लिए भी तैयार नहीं है. लोढ़ा कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करने के लिए बीसीसीआई प्रमुख अनुराग ठाकुर को भी पद से हटाने की मांग की थी.

जस्टिस लोढ़ा ने कहा क्रिकेट की जीत

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि क्रिकेट में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए बनाई गई लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने में बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी नाकाम रहे हैं. 

जस्टिस राजेंद्रमल लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खुशी जताते हुए इसे क्रिकेट की जीत करार दिया है. जस्टिस लोढ़ा ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह होना ही था और अब यह हो गया. इस आदेश से पहले मैंने सुप्रीम कोर्ट में तीन रिपोर्ट सौंपी थी. इसके बावजूद सिफारिशों पर अमल नहीं हुआ."

झूठा हलफनामा दायर करने का आरोप

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को झूठा हलफनामा दायर करने पर फटकार लगाई थी. कोर्ट ने कहा था कि अगर बिना शर्त अनुराग ठाकुर ने माफी नहीं मांगी, तो उन्हें सलाखों के पीछे भी जाना पड़ सकता है. 

इसके साथ ही अनुराग ठाकुर पर सुधार प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप भी था. अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के वित्तीय अधिकार सीमित करते हुए लोढ़ा समिति से एक स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करने को कहा था.

बीसीसीआई की वित्तीय ताकत पर कैंची चलाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बोलियों और ठेकों के लिए सीमा निर्धारित की थी. स्वतंत्र ऑडिटर से बीसीसीआई के सभी वित्तीय लेन-देन की समीक्षा करने का आदेश दिया गया था.

कैच
First published: 2 January 2017, 11:39 IST
 
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