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बीसीसीआई की वित्तीय ताकत पर सुप्रीम कोर्ट की कैंची, ऑडिटर नियुक्त करने का आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 October 2016, 11:26 IST
(कैच)

लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर अमल कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. सर्वोच्च अदालत ने आज निर्देश दिया कि जब तक राज्य क्रिकेट संघ लोढ़ा समिति की सिफारिशों को नहीं मानते हैं, तब तक वे बीसीसीआई से कोई पैसा नहीं ले सकते.

लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की थी. अदालत ने साथ ही लोढ़ा पैनल से कहा है कि बीसीसीआई के खातों की जांच के लिए वह एक स्वतंत्र ऑडिटर (लेखाकार) की नियुक्ति करे.

दो हफ्ते में जवाब दें बीसीसीआई अध्यक्ष

इसके साथ ही अदालत ने लोढ़ा कमेटी को यह भी निर्देश दिए हैं कि बीसीसीआई के वित्तीय लेन-देन की एक सीमा तय की जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने केस की सुनवाई के दौरान बीसीसीआई के अध्यक्ष और सचिव को आदेश दिया है कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुपालन में दो हफ्ते के अंदर अदालत में शपथपत्र पेश किया जाए. 

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य क्रिकेट संघों को तब तक कोई पैसा जारी नहीं किया जाए, जब तक वो शपथपत्र न सौंप दें. अब इस मामले में पांच दिसंबर को कोर्ट में अगली सुनवाई होगी.

लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हमें किसी भी तरह से उनके निर्देश का पालन करना है, लेकिन हम खेल के हर पहलू को भी देख रहे हैं."

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा पैनल की सिफारिशों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने बीसीसीआई को फटकार लगाते हुए पूछा था कि बीसीसीआई लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को कब तक लागू करेगा? 

फाइल फोटो

क्या है लोढ़ा समिति की सिफारिशें?

सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पुनर्गठन पर लोढ़ा समिति की ज्यादातर सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था. पिछले साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को नए सिरे से खड़ा करने के लिए जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था.

समिति ने सिफारिश की थी कि बीसीसीआई के पदाधिकारियों की उम्र 70 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा बोर्ड के पदाधिकारी, मंत्री या सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए. इस महत्वपूर्ण सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि बीसीसीआई की गवर्निंग काउंसिल में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) का एक सदस्य शामिल होगा. सट्टेबाजी पर संसद को कानून बनाने के लिए कहा गया. साथ ही यह भी तय करने के लिए कहा गया कि बीसीसीआई कैसे आरटीआई के दायरे में आए.

लोढ़ा समिति ने चार जनवरी, 2016 को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी. समिति ने सिफारिश की थी कि एक राज्य को एक ही वोट का अधिकार हो. महाराष्ट्र जैसे राज्य जहां तीन रणजी टीमें हैं. वहां एक ही वोट का हक होगा, जो बीसीसीआई तय करेगा. वैसे ही गुजरात की भी तीन टीमें हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्यों में एक ज्यादा क्रिकेट एसोसिएशन होने पर सभी को एक-एक बार वोट करने का मौका दिया जाएगा, यानी रोटेशन प्रक्रिया लागू होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की सिफारिश में शामिल प्लेयर्स एसोसिएशन को स्वीकार किया है. बीसीसीआई को ये सारे बदलाव छह महीने के अंदर करने होंगे और लोढ़ा समिति इस पर नजर रखेगी. समिति पुराने और नए प्रावधानों पर गौर करने के बाद छह महीने में रिपोर्ट फाइल करेगी.

इससे पहले लोढ़ा समिति की रिपोर्ट में बीसीसीआई के प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन का सुझाव भी दिया गया और सीईओ के पद का प्रस्ताव रखा, जो नौ सदस्यीय शीर्ष परिषद के प्रति जवाबदेह रहेगा. समिति ने कहा कि अंदरूनी टकरावों से निपटने के लिए बोर्ड का लोकपाल भी होना चाहिए.

बोर्ड ने पिछले साल नवंबर में एपी शाह की नियुक्ति करके यह सुझाव पहले ही मान लिया है. इस साल अप्रैल महीने में कोर्ट के दबाव के बाद राहुल जौहरी को बीसीसीआई का सीईओ नियुक्त किया गया था.

First published: 21 October 2016, 11:26 IST
 
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