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टीम इंडिया चुनने वाले इन 5 दिग्गजों ने खुद कभी वर्ल्ड कप नहीं खेला

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 April 2019, 10:57 IST

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की पांच सदस्यीय राष्ट्रीय चयन समिति ने सोमवार को आगामी विश्वकप के लिए भारतीय टीम का चयन कर लिया. विश्वकप टीम के लिए विराट कोहली को कप्तान और रोहित शर्मा को उप-कप्तान बनाया गया है. एमएसके प्रसाद के नेतृत्व वाले इस चयन पैनल में एमएसके प्रसाद के अलावा देवांग गांधी, शरणदीप सिंह, जतिन परांजपे और गगन खोड़ा शामिल हैं. इन पांचों ने भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला है लेकिन कभी भी ये खिलाड़ी भारत की विश्व कप टीम का हिस्सा नहीं रहे हैं.

आइये इन पांचों चयनकर्ताओं के करियर पर एक नजर डालते हैं.

एमएसके प्रसाद

एमएसके प्रसाद (43) आँध्रप्रदेश के गुंटूर से हैं. उन्होंने विकेटकीपर के रूप में 1994-95 सीज़न में आंध्र प्रदेश रणजी ट्रॉफी टीम में प्रवेश किया था. 1998 में बांग्लादेश के खिलाफ प्रसाद ने एकदिवसीय मैच में भारत की शुरुआत की. एमएसके प्रसाद ने छह टेस्ट खेले, इनमे से तीन न्यूजीलैंड के खिलाफ घर पर और तीन ऑस्ट्रेलिया में खेले. साल 2000 में जब नयन मोंगिया जब चोट से जूझ रहे थे तब टीम में शामिल किया गया. 1999-2000 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद उन्हें खराब फॉर्म के कारण टीम से बाहर कर दिया गया. 2015 में अपने अंतिम प्रथम श्रेणी के खेल के छह साल बाद प्रसाद को भारत की चयन समिति में नियुक्त किया गया और अगले वर्ष इसके प्रमुख बने.

देवांग गांधी

बंगाल से सौरव गांगुली के आने के तीन साल बाद 1999 में गांधी ने भारतीय टीम में जगह बनाई. लेकिन वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए और केवल चार टेस्ट और तीन वनडे मैच ही खेल सके. 1999-2000 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे ने गांधी की शार्ट डिलीवरी पर तकनीकी खामी को उजागर किया. हालांकि उन्होंने घरेलू स्तर पर बंगाल के लिए खेलना जारी रखा. न्यूज़ीलैंड के खिलाफ अपनी पहली सीरीज़ में गांधी कुछ प्रभावित जरूर किया लेकिन ऑस्ट्रेलिया दौरा उनके लिए बुरे अपने की तरह रहा. उन्होंने अप्रैल 2006 सन्यास ले लिया छोड़ दिया और इसके तीन साल राष्ट्रीय चयनकर्ता बने.

शरणदीप सिंह

एक स्पेशिलिस्ट ऑफ-स्पिनर रहे सरनदीप ने 2000 में अपनी शुरुआत की जब भारत नागपुर में जिम्बाब्वे के साथ टेस्ट मैच खेल रहा था. उस मैच में सरनदीप ने चार मेडन के साथ अच्छी शुरुआत की और छह विकेट हासिल किए. हालांकि उनका अंतर्राष्ट्रीय करियर तीन टेस्ट और पांच वनडे मैचों तक सीमित रहा. पंजाब, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के लिए उन्होंने 92 प्रथम श्रेणी और 77 सूची ए और 10 ओडीआई खेले.

जतिन परांजपे

मध्यक्रम के एक आकर्षक बल्लेबाज, परांजपे ने 1998 में अपने करियर की शुरुआत की. पूर्व बॉम्बे क्रिकेटर वासु परांजपे के बेटे जतिन ने 1991-92 में पहली बार रणजी ट्रॉफी खेला. बॉम्बे के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए सात साल तक इंतजार करना पड़ा. भारत के लिए अपने छोटे से करियर में उन्होंने चार एकदिवसीय मैच खेले लेकिन वह छाप छोड़ने में असफल रहे.

हालांकि उन्होंने 62 प्रथम श्रेणी मैचों और 44 सूची ए मैचों में मुंबई का प्रतिनिधित्व किया. परांजपे को राष्ट्रीय चयनकर्ताओं में से एक के रूप में नामित किया गया था, लेकिन जनवरी 2017 में लोढ़ा समिति की वजह से समिति से बाहर कर दिया गया. यह तथ्य था कि उन्होंने कभी टेस्ट मैच नहीं खेला, लेकिन पिछले साल अगस्त में उन्हें बहाल कर दिया गया.

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गगन खोड़ा

राजस्थान के एक दाहिने हाथ के सलामी बल्लेबाज़ खोड़ा ने 1991-92 सीज़न में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया. कुछ साल बाद उन्होंने रणजी ट्रॉफी क्वार्टर फ़ाइनल में 237 बनाए और आखिरकार भारतीय टीम में चुने गए. 1998 में एकदिवसीय मैचों में खोडा ने केन्या के खिलाफ 89 रनों की पारी खेली, उसके बाद एक 26 रन बनाए. रिटायरमेंट के बाद 2016 में खोड़ा राष्ट्रीय चयनकर्ता बन गए लेकिन परांजपे की तरह उन्हें भी लोढ़ा समिति की सिफारिश के कारण जनवरी 2017 में समिति से बाहर कर दिया गया. उन्हें पिछले साल अगस्त में बहाल किया गया था.

वर्ल्ड कप  के लिए ये है भारतीय टीम 

विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा (उपकप्तान), शिखर धवन, केएल राहुल, विजय शंकर, महेंद्र सिंह धोनी(विकेटकीपर), केदार जाधव, दिनेश कार्तिक, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा, मोहम्मद शमी 

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First published: 15 April 2019, 17:05 IST
 
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