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Vijay Diwas 2019: साल 1971 के युद्ध का एक किस्सा ये भी, जब भारत और पाकिस्तानी क्रिकेटर्स ने एक ही टीम के लिए खेले मैच

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 December 2019, 20:42 IST

भारत और पाकिस्तान के बीच पहली क्रिकेट सीरीज साल 1954 में हुई थी जब पाकिस्तानी टीम(Pakistan Cricket Team) ने भारत का दौरा किया था. इसके कुछ दिनों बाद भारतीय टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था. साल 1954 से 1965 तक यह सिलसिला चलता रहा इस दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच कुल तीन सीरीज हुई थी. हालांकि इसके बाद दोनों देशों के बीच 17 सालों तक कोई सीरीज नहीं हुई. इसके बाद दोनों देश 1978 को एक दूसरे के आमने-सामने आए थे. लेकिन साल 1971 में इस दौरान भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों ने विश्व एकादश के लिए ऑस्ट्रेलिया(Australia) के खिलाफ मुकाबले खेले थे.

साल 1971 में विश्व एकादश(Rest of the World) और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांच टेस्ट मैचों की सीरीज थी. विश्व एकादश ने साल 1971 के अंत से साल 1972 की शुरूआत में कुल 12 मुकाबले खेले थे. विश्व एकादश में तीन भारतीय खिलाड़ी के अलावा तीन खिलाड़ी पाकिस्तान(Pakistan) के थे, बाकी खिलाड़ी वेस्टइंडीज(West Indies), दक्षिण अफ्रीका(South Africa), इंग्लैंड(England) और न्यूजीलैंड(New Zealand) से थे. एक तरफ जहां भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ी एक साथ एक टीम में खेल रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ क्रिकेट के मैदान से हजारों किलोमीटर दूर भारतीय और पाकिस्तानी सेना जंग के मैदान में एक दूसरे के आमने सामने थी. ऐसे में खिलाड़ियों के लिए यह काफी मुश्किल समय था.

आम तौर पर क्रिकेट को जेंटलमैनों का गेम कहा जाता है. भले ही मैदान पर क्रिकेटर एक दूसरे के खिलाफ खेलते थे लेकिन मैदान के बाहर उनक दोस्ती काफी हुआ करती थी. यह सिलसिला आज तक कायम हैं. ऐसे में जब दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ युद्द के मैदान में आमने सामने थे, तमाम लोगों की निगाहें कहीं ना कहीं इन मैच और भारत और पाकिस्तानी खिलाड़ी पर भी थी. साल 1971 से पहले ही, भारतीय खिलाड़ी के रिश्ते पाकिस्तानी खिलाड़ी के साथ अच्छे थे. दोनों देशों के क्रिकेटरों में दोस्ती थी. अगर मैदान के दौरान या बाद में किसी भी तरह का कोई विवाद होता तो इसे जंग स जोड़कर देखा जाता और शायद इन क्रिकेटरों की दोस्ती में कहीं ना कहीं दरार आ जाती.

सुनील गावस्कर(Sunil Gavaskar) की किताब आइडल में इस दौरे का जिक्र मिलता है. सुनिल ने अपने अनुभवों के आधार पर लिखी इस किताब में साफ तौर पर लिखा है कि भले ही दोनों देश के खिलाडी़ अपने अपने देश के कोसों दूर थे लेकिन तनाव उनके ऊपर भी था.

'सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह थी कि जब 1971 का दौरा था, तब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया था. एक नए राष्ट्र, बांग्लादेश का जन्म हुआ था और यही वह समय था जब हमारी मित्रता को परखने के लिए रखा गया था क्योंकि हमें लोगों से लगातार ऐसी रिपोर्ट मिल रही थी कि किस तरह तरह से युद्ध चल रहा है. यही वह समय था जब हम तनाव में थे, मीडिया की नजरें हम पर थीं, हमारी दोस्ती अपने असली रंग में नजर आ रही थी. हम सभी, आसिफ (इक़बाल), (आसिफ़) मसूद, इंतिखाब आलम, बिशन बेदी, ज़हीर और मैं एक साथ स्नैक्स और डिनर के लिए एक पाकिस्तानी रेस्तरां में जाते थे और एक बार हम युद्ध के बारे में बात नहीं करते थे. हालांकि बिशन को सबसे ज्यादा चिंता थी क्योंकि क्योंकि अमृतसर, जहां वह रहता था, सीमा के बहुत करीब है. हमारे बीच कभी भी युद्ध की चर्चा नहीं हुई.'

साल 1971 के युद्ध के बाद, भारत और पाकिस्तान साल 1978 में एक दूसरे के आमने सामने आए थे. इस दौरान तक माहौल काफी शांत हो चुका था. भारत में नई सरकार का गठन हुआ था, इंदिरा गांधी को चुनावों मेंहार का सामना करना पड़ा था और मोरारजी देसाई के हाथ में उस वक्त केंद्र सरकार की कमान थीं. जबकि पाकिस्तान का नेतृत्व जनरल जिया-उल-हक कर रहे थे. साल 1978 में हुई क्रिकेट श्रृंखला ने दोनों देशों को एक साथ लाने का काम किया था.

 

हालांकि साल 1978 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सीरीज खराब अंपायरिंग के कारण विवादों में हुई थी. उस दौरान पाकिस्तानी फैंस ने जो भावनाएं दिखाई उससे ऐसा लगा कि पाकिस्तान किसी भी कीमत पर भारत को हराना चाहता था. इस दौरान पाकिस्तान कप्तान मुश्ताक मोहम्मद ने भारत के खिलाफ जीत को 'हिंदुओं के लिए दुनिया भर में मुसलमानों की जीत' करार दिया था. ऐसे में साल 1978 मं पाकिस्तानी कप्तान के बयान से साफ था कि पाकिस्तान उस दौरान भी साल 1971 के युद्ध की हार को पचा नहीं पाया था और बांग्लादेश के रूप में पूर्व पाकिस्तान को खोने की उसकी टीस कही ना कहीं खिलाड़ियों के जहन में थी.

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First published: 13 December 2019, 16:43 IST
 
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