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ऋषिराज सिंह: 14 मिनट या 14 सेकेंड, यौन उत्पीड़न आखिर यौन उत्पीड़न है

दुर्गा एम सेनगुप्ता | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST

‘किसी भी महिला की तरफ 14 सेकेंड से अधिक घूरने पर किसी भी पुरुष के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है.’

‘हममें से अधिकतर लोगों को अभी तक पता ही नहीं है कि किसी भी महिला को 14 सेकेंड से अधिक लगातार घूरने वाले व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करवाई जा सकती है. लेकिन अभी तक इस कानून के तहत पूरे राज्य में किसी के भी खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है.’

केरल के आबकरी आयुक्त ऋषिराज सिंह ने मंगलवार को लगातार दो मौकों पर यह बयान देकर एक नई बहस को जन्म दे दिया. और जैसा कि होना ही था, उनके ऐसा बोलते ही पक्ष-विपक्ष की आवाजें भड़क उठीं, इसे सोशल मीडिया पर आई टिप्पणियों ने और अधिक हवा दी. जैसा कि आपको पता है यह सप्ताह का पहला कामकाजी दिन था, और ऐसे में हर किसी का ध्यान इसी पर आ टिका.

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इंटरनेट के हर कोने से चुटकुलों की बौछार सी हो गई. अधिकतर लोगों ने अलग-अलग तरीकों और शब्दों में एक ही सवाल पूछाः तब क्या हो जब आप 13 सेकेंड तक किसी महिला को घूरकर देखें और फिर अपनी नजरें उससे हटा लें? क्या तब आप साफ छूट जाएंगे?

जब कैच ने इस सवाल का जवाब जानने के लिये ऋषिराज सिंह से बातचीत की तो उनका जवाब बेहद सरल था- ‘ना’.

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अपने बयान को पूरी तरह से संदर्भ के बाहर ले जाने के बात कहते हुए पहले पहल तो सिंह ने इस मसले पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया. लेकिन जब उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि मीडिया को कुछ संदर्भ समझने की आवश्यकता है तब उन्होंनों मुझसे ‘कागज और कलम’ देने को कहा.

पहले तथ्य

उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले हम थोड़ा पीछे, दिसंबर 2012 के निर्भया मामले की तरफ चलते हैं. जस्टिर जेएस वर्मा समिति ने बलात्कार कानूनों से संबंधित 630 पन्नों की एक रपट पेश की थी जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2013 में आपराधिक कानूनों में संशोधन संभव हो पाया.’

इस बात पर जोर देते हुए कि इस संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आईपीसी की धारा 354 (ए, बी, सी और डी) था, सिंह ने कहा, ‘(354) ए और डी तो ठीक हैं. लेकिन इस कानून के तहत घूरने और छेड़छाड़ करने को भी संज्ञेय अपराध बना दिया गया. 354 सी चोरी-छिपे ताकझांक करने से संबंधित है.’

उन्होंने आगे कहा कि इसमें किसी भी प्रकार से पीछा करना और सामने वाले व्यक्ति को असहज करना शामिल है जैसे ‘बिना सहमति के तस्वीर खींचना या छिपकर किसी को देखना या फिर किसी के कपड़ों के भीतर देखने का प्रयास करना.’

उन्होंने कहा, ‘अब चूंकि आप एक महिला हैं और आप ऐसी किसी परिस्थिति में मुकदमा दर्ज करवाती हैं तो, उसे मेरिट पर लिया जाएगा.’

यह तो ठीक है लेकिन 14 सेकेंड का क्या मतलब?

सिंह कहते हैं, ‘यह सिर्फ सामान्य बातचीत के लहजे में कही गई बात है.' वे पूछते हैं, ‘कई बार आप यह नहीं कहते हैं कि ‘मैं एक मिनट में आया’ जबकि आपका मतलब 2 या पांच या दस मिनट होता है?’

सिंह को लगता है कि उनके बयान का खामख्वाह में बतंगड़ बनाया जा रहा है जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि उनका इरादा सिर्फ महिलाओं को उनकी रक्षा के लिये बने एक कानून के बारे में जानकारी और शिक्षा देने का था.

मैं तो सिर्फ लड़कियों को घूरने और ऐसे ही मामलों की शिकायत करने के लिये प्रोत्साहित कर रहा था

‘मैं तो सिर्फ लड़कियों को घूरने और ऐसे ही मामलों की शिकायत करने के लिये प्रोत्साहित कर रहा था. अब समय आ गया है जब महिलाओं को ऐसे मामलों की शिकायत करने के लिये आगे आना चाहिये.’

वे कहते हैं, ‘वास्तव में इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि 14 सेकेंड हैं या 14 मिनट और मैं यही कहना चाह रहा था. 14 सेकेंड पर जोर देने से मेरा पर्याय समय की चिंता पर जोर न देने को लेकर था. अगर किसी महिला को दो सेकेंड में ही बुरा लगता है तो वह भी मायने रखता है.’

जब सिंह से पूछा गया कि उनकी टिप्पणी की गलत व्याख्या भला करने से अधिक नुकसान कर रही है तो वे बिल्कुल बेफिक्र दिखे. वे जितना संवेदनशील संदेश को देने का प्रयास कर रहे थे उसके मुकाबले चल रहे चुटकुलों से सिंह खासे नाराज और खिन्न दिखे.

केरल के खेल मंत्री जयराज द्वारा उनके बयान को ‘घृणास्पद’ कहने के बारे में पूछने पर उनकी प्रतिक्रिया कुछ ऐसी थी, ‘वे अपनी राय रखने के पूरे हकदार हैं. अगर आप चाहें तो उनसे पूछ सकते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा.’

सिंह के अनुसार जो चीज सबसे अधिक महत्वपूर्ण है वह है कानून. उन्होंने कहा, ‘यह एक बेहद महत्वपूर्ण कानून है. हम इसे 14 सेकेंड या 15 सेकेंड पर बांध नहीं सकते. इसका इस्तेमाल होने के साथ इसके बारे में बात होने और विस्तार से पढ़े जाने की आवश्यकता है.’

और उनका दावा है कि वे यही करने का प्रयास कर रहे थे.

First published: 17 August 2016, 7:57 IST
 
दुर्गा एम सेनगुप्ता @the_bongrel

संवाददाता, कैच न्यूज

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