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Ambedkar Jayanti 2020: असाधारण प्रतिभा के धनी थे डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 April 2020, 12:29 IST

Ambedkar Jayanti 2020: संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर (Dr. Bhimrao Ambedkar) की आज 129वीं जयंती है. आज हम आपको उनकी जयंती के मौके पर उनकी कुछ विलक्षण प्रतिभाओं के बारे में बताने जा रहे हैं. बाबासाहेब अंबेडर ने भारत का संविधान लिखने में ही अहम भूमिका नहीं निभाई बल्कि, देश की सबसे बड़ी बैंक, 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया' को बनाने में भी अहम भूमिका निभाई. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था.

उन्होंने ब्रिटिश काल में समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण काम किया. जिन्होंने भारत में दलित बौद्ध आंदोलन भी चलाया. बीआर अंबेडकर बचपन से ही दलितों की स्थिति को लेकर चिंतित थे. क्योंकि बचपन में ही उन्हें दलित होने की वजह से तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा था.


साल 1956 में उन्होंने समाजिक और राजनीतिक आंदोलन दलित बौद्ध आंदोलन चलाया. इसमें भारत के लाखों दलितों ने भाग लिया. डॉ. अंबेडकर को 31 मार्च 1990 को मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया. बाबासाहेब का जीवन सचमुच संघर्ष और सफलता की ऐसी अद्भुत मिसाल है जो कहीं और देखने को नहीं मिलती. ऐसी विलक्षण प्रतिभा के धनी डॉ. अंबेडकर की जयंती हर साल धूमधाम से मनाई जाती है.

इस साल कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन के चलते लोग घर में हैं. इसलिए इस साल लोग बाबासाहेब की जयंती को धूमधाम से नहीं मना पा रहे हैं. बता दें कि साल 1906 में अंबेडकर की शादी 9 साल की रमाबाई के साथ हुई थी. उस समय अंबेडकर की उम्र महज 15 साल थी. उस समय देश में बाल विवाव का प्रथा कायम थी. साल 1907 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली. उसके बाद साल 1908 में उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज में प्रवेश लिया. इस कॉलेज में प्रवेश लेने वाले वे पहले दलित छात्र थे. साल 1912 में उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में डिग्री हासिल की.

डॉ. अंबेडकर एक अर्थशास्त्री, राजनेता और समाज सुधारक थे, जिन्होंने दलित समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी. भारत के संविधान के एक प्रमुख वास्तुकार, अम्बेडकर ने महिलाओं के अधिकारों और मजदूरों के अधिकारों की भी वकालत की. स्वतंत्र भारत के पहले कानून और न्याय मंत्री के रूप में मान्यता प्राप्त, भारतीय गणराज्य की संपूर्ण अवधारणा के निर्माण में अम्बेडकर जी का योगदान बहुत बड़ा है. देश में उनके योगदान और सेवा का सम्मान करने के लिए, उनका जन्मदिन हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाता है.

डॉ. अंबेडकर एक समझदार छात्र, कानून और अर्थशास्त्र के ज्ञाता थे. उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की. उन्होंने भारत के राज्य को पुरातन मान्यताओं और विचारों से मुक्त करने के लिए अर्थशास्त्र में अपनी मजबूत पकड़ का इस्तेमाल किया. उन्होंने अछूतों के लिए अलग निर्वाचक मंडल बनाने की अवधारणा का विरोध किया और सभी के लिए समान अधिकारों की वकालत की.

साल 1913 में एमए करने के लिए वे अमेरिका चले गए. तब उनकी उम्र महज 22 साल थी. अमेरिका में पढ़ाई करने के ये मौका उन्हें बड़ौदा के गायकवाड़ शासक शयाजी राव तृतीय से मासिक स्कॉलरशिप मिलने के कारण संभव हो सका था. इसके बाद 1921 में उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स से एमए की डिग्री ली. साल 1947 में भारत के स्वतंत्र होने के बाद उन्हें कांग्रेस की ओर से भारत के कानून मंत्री बनने का प्रस्ताव मिला जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. 29 अगस्त 1947 को वे संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी के चैयरमेन नियुक्त किए गए. 16 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपनाया. ऐसी तमाम प्रतिभाओं के धनी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का 6 दिसंबर 1956 को निधन हो गया.

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First published: 14 April 2020, 12:29 IST
 
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