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फेमिनाजी! नहीं सशक्त नारी, मीरा राजपूत के नाम खुला खत

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 March 2017, 7:38 IST
(पिनट्रेस्ट)

एक ऐसी सेलिब्रिटी जो केवल इसलिए सेलिब्रिटी बन गई हैं कि उनकी शादी अभिनेता शाहिद कपूर से हुई है यानी मीरा राजपूत. मीरा इन दिनों अचानक से सुर्खियों में छाई हुई हैं. मीरा ने हाल ही कॉफी विद करण शो पर कुछ गैर जिम्मेदाराना बयान दिए थे. उसके बाद अब उन्होंने एक ऐसा बयान दे दिया है जो कि नारीवाद के खिलाफ है. महिला दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में मीरा ने कहा, 'नारीवाद की नई लहर काफी आक्रामक और विस्फोटक हो चली है. आजकल ऐसी ‘प्रगतिवादी’ महिलाओं के लिए ‘फेमिनाजी’ शब्द का इस्तेमाल हो रहा है, जो खुद को किसी भी पुरुष की तरह ही सर्वोपरि मानती हैं.'

जैसा कि मीरा राजपूत ने सुझाया, मैं भी ऐसी ही एक ‘फेमिनाजी’ हूं और मुझे मीरा के कुछ वक्तव्यों से तकलीफ है. यह मेरा उनको एक तरह से खुला खत है जो कि मैं मोटे ए 4 शीट पेपर पर काले मार्कर से लिख रही हूं. इसमें मेरा आक्रोश साफ झलक रहा है.

अब मीरा राजपूत के नजरिये से क्या-क्या गलत है? इस पर विचार करने से पहले हम ‘फेमिनाजी’ शब्द पर जरा बात कर लें. ‘फेमिनाजी’ दरअसल एक भयावह शब्द माना जा सकता है. यह दो बड़े शब्दों ‘फेमिनिज्म’ और ‘नाजिस्म’ से मिल कर बना है. यह दोनों ही शब्द विपरीत प्रकृति के होकर भी एक शब्द बनाते हैं. यह ऐसी महिलाओं के लिए प्रयोग किया जा रहा है जो दरअसल अन्य महिलाओं और पुरुषों पर भारी पड़ने की मंशा रखती हैं. इस प्रकार ‘फेमिनाजी’ दो बड़े ऐतिहासिक मुद्दों का महत्व कम कर देता है. इनमें एक है-महिलाओं का संघर्ष व दूसरा, नाजियों की परम्परा.

‘फेमिनाजी’ एक भयावह शब्द माना जा सकता है. यह दो बड़े शब्दों ‘फेमिनिज्म’ और ‘नाजिस्म’ से मिलकर बना है.

असल में महिलाओं के लिए यह शब्द इस्तेमाल करना उनका अपमान करने के बराबर है. यह उनके बरसों के संघर्ष को नकारने जैसा है. न केवल उस संघर्ष को,जिसके बल पर उन्हें यह मामूली सी आजादी मिली, बल्कि उन पर हुए भयावह अत्याचारों को भी, जिनकी भेंट ये महिलाएं चढीं. इसलिए हम नई महिला शक्ति को इस शब्द पर आपत्ति है जो कि जायज है.

लेकिन मीरा राजपूत की ये बातें केवल इस शब्द के इस्तेमाल करने तक ही खत्म नहीं हो जातीं. ‘कॉफी विद करण’ शो पर मीरा कई कदम आगे बढ़ कर मातृत्व और अरेंज मैरिज जैसे मुद्दों पर बात करती हैं. वे जल्दी शादी करने और घर पर रह कर कुशल गृहिणी होने जैसे विषयों पर भी बात करती हैं. वे कहती हैं, 'यह मेरा अपना चुनाव है कि मैं घर पर रहना चाहती हूं. अगर कुछ महिलाएं कामकाजी होना चुनती हैं तो यह उनकी प्राथमिकता है.'

वे कहती हैं, "मैं एक कुशल गृहिणी हूं और इस पर मुझे गर्व है. मेरी गर्भावस्था काफी तकलीफदेह रही. मैंने अपनी बेटी को इस दुनिया में लाने के लिए पांच माह का कठिन समय झेला है. अब मैं अपनी बेटी के साथ हर पल बिताना चाहती हूं. मैं ऐसा नहीं कर सकती कि मिशा के साथ एक घंटे रहूं और जल्दबाजी में काम पर चली जाऊं. मैंने उसे इसलिए तो जन्म नहीं दिया. वह कोई पालतू पपी नहीं है," मीरा! बेशक मिशा एक पपी नहीं है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि और कौन से बच्चे पपी नहीं हैं. उन मांओं के बच्चे जिनके पास कोई विकल्प है ही नहीं और वे काम पर जाती हैं. उन माताओं के बच्चे भी कोई पालतू जानवर नहीं हैं जो हरेक घंटे काम पर जाती हैं ताकि अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें. इसके बिना वे रोज ही भूखे मरने पर मजबूर हैं. मांएं तो अपने इन जिगर के टुकड़ों को हर पल बढ़ते देखना चाहती हैं.

वे तो दक्षिणी दिल्ली की एक आम लड़की हैं, जिसकी शादी बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर से हुई है.

यहां एक बात सराहनीय है कि मीरा के मन में जो था उन्होंने साफ-साफ कह दिया. परन्तु महिला दिवस का अवसर, करण का कॉफी विद करण शो हो और हाथ में माइक तो कोई भी ऐसे विचार व्यक्त कर सकता है. यह एक तरह का विशेषाधिकार कहलाता है. इसे विशेषाधिकार कहते हैं लेकिन इसे मातृत्व जैसे मुद्दों के साथ जोड़ना गलत है.

मैं जब शाहिद मीरा वाले कॉफी विद करण के एपिसोड के बारे में लिख रही थी, तो मेरे एक सहकर्मी ने मुझे कहा, वह काफी छोटी हैं. उनके प्रति मैं थोड़ा कम कड़ा रुख अख्तियार करूं. हां, उन्होंने इसके लिए कुछ नहीं कहा. वे तो दक्षिणी दिल्ली की एक आम लड़की हैं, जिसकी शादी बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर से हुई है. अफसोस की बात यह है कि अब सार्वजनिक तौर पर या टीवी पर, उनके द्वारा कही गई हर बात के लिए उन्हें जनता के बीच या नेशनल टीवी पर घसीटा जाता है.

लेकिन मीरा! विशेषाधिकार के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी तो बनती है. जब आपको किसी कार्यक्रम में बुलाया जाता है तो वहां आप केवल एक प्यारी सी लड़की की भूमिका में ही नहीं हैं. हजारों लोग आपको सुन रहे होते हैं और हजारों लोगों को समझाया गया होता है कि आप जो कह रही हैं, वही सही है. आपने एक मां और पत्नी या गृहिणी के विषय पर अपनी बात कही. आपकी शाहिद के साथ शादी ने ही तुम्हें एक ऐसा ‘सेलिब्रिटी’ बना दिया, जो कि अब सार्वजनिक हस्ती है. इसलिए आपके मुंह से निकले हर शब्द की कीमत है. बस आपको शब्दों का चयन काफी सावधानीपूर्वक करना है.

जब आप अरेंज मैरिज की बात करती हैं, तो आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप अपने से उम्र में छोटी उन सभी महिलाओं के बारे में भी विचार करें, जो अरेंज मैरिज के बाद बेहद दुखी वैवाहिक जिंदगी जीने को मजबूर हैं लेकिन आपको अपना आदर्श मानती हैं. जब आप अपने मां होने या गृहिणी होने पर बात करती हैं तो आप यह क्ययों भूल जाती हैं कि ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं, जिनके लिए काम करना मजबूरी ही है. आपको आदर्श मानने के बावजूद ये महिलाएं अपनी नौकरी नहीं छोड़ सकतीं. मीरा! इतना तो आपको पता ही है कि आपके चाहने वालों के लिए आपकी कही हर बात के मायने हैं. अगर कोई सुनता ही नहीं तो आप अपने मां या गृहिणी होने पर कैसे गर्व करतीं.

आप ठीक कह रही हैं नारीवाद का मतलब पुरुष बनाम महिला नहीं है बल्कि समानता है. ...और ना ही इसका आशय महिला बनाम महिला से है. अपने बारे में महिमामंडन करते हुए आप भूल गईं कि आपने बहुत सी महिलाओं को दिग्भ्रमित कर दिया है. और जब महिलाओं को लेकर किसी तरह की गलतफहमी पनपती है तो सशक्त बनने के लिए महिलाओं को अक्रामक और विस्फोटक बनना ही पड़ता है.

First published: 14 March 2017, 7:38 IST
 
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