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पृित पक्ष 2019: किस दिन करें किस पूर्वज का श्राद्ध , ऐसे चुने तिथि

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 September 2019, 16:10 IST

पृित पक्ष श्राद्ध 14 सितंबर से शुरू हो जाएगा जोकि 28 सितंबर तक चलेगा. पितृ पक्ष पितरों को याद करने का समय माना जाता है. पितृ पक्ष दो प्रकार के होते हैं एक दिव्य पितर और दूसरा पूर्वज पितर.कहा जाता है कि जो दिव्य पितर होते हैं वो पितर ब्रह्मा के पुत्र मनु से उतप्न होते हैं. वहीं दूसरे प्रकार के पितर पूवर्ज होते हैं. इन्हीं पितरों के नाम से लोग पिंड दान, श्राद्ध और ब्रहाम्ण भोजन कराते हैं.

कठोपनिषद्, गरुड़ पुराण, मार्कण्डेय पुराण के अनुसार पितर अपने परिजनों के पास पितृपक्ष श्राद्ध के वक्त आते हैं और अन्य जल और सादर की अपेक्षा करते हैं. यदि ऐसा जो लोग नहीं करते हैं उन्हे पृित दोष भी लगता है. कहा जाता है जिनके पितर धरती से भूखे प्यासे चले जाते हैं उन्हें श्राप लगता है. चलिए आपको बताते हैं कि पितृपक्ष में श्राद्ध कैसे करें...

श्राद्ध पक्ष के दिनों में पूजा अर्चना करें. आपने जो भोजन अपने पितरों के लिए बनाया गया है. उसके चार हिस्से निकाले. इसमें से पहला हिस्सा गाय, दूसरा कुत्ते और फिर कौए को देने के बाद चौथा हिस्सा ब्रहाम्ण को कराए.

वहीं जिस पितर का श्राद्ध करना हो सबसे पहले उनकी मृत्यु की तारीख का पता होना बहुत आवश्यक है.. उसी तारीख पर श्राद्ध कर्म किया जाता है. जिस व्यक्ति की मृत्यु प्रतिपदा जिस तारीख को हुई है उनका शराद्ध कर्म भी प्रतिपदा तिथि को ही किया जाना चाहिए.

यदि ऐसे में पितरों की मृत्यु तिथि का पता न हो तो श्राद्ध कर्म आमावस्या के दिन करना चाहिए. क्यों इस दिन को सर्व पित्र श्राद्ध योग माना जाता है. वहीं यदि जिनकी मृत्यु समय से पहले हुई है यानी किसी हादसे या आत्महत्या की वजह से तो उनका श्राद्ध कर्म चतुर्दशी तिथि को करने का विधान है. वहीं माता-पिता की भी श्राद्ध तिथिया इस प्रकार है. जैसे माता का श्राद्ध अष्टमी तिथि को करना चाहिए. वहीं पिता की नवमी तिथि को उपयुक्त बताया गया है.

इस प्रकार करें तिथियों का चयन
*जिन पितरों की मत्यु पंजमी को हुई हो या अविवाहित स्थिति में हुई है तो उनका श्राद्ध पंचमी तिथि को करना चाहिए
*नवमी तिथि को मातृनवमी से भी जाना जाता है. इस दिन श्राद्ध करने से कुल की सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध हो जाता है.
*जिन पितरों की अकाल मृत्यु हुई है उनका श्राद्ध पंचमी में करना चाहिए
*जिन लोगों के मृत्यु के दिन की सही जानकारी न हो उनका श्राद्ध अमावस्य में करना चाहिए

बताते चलें कि पूर्णिमा से अमावस्या तक पितरों के निमित श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण मानी गईं हैं.इस मौके पर सभी लोग अपने अपने पितरों को याद करते हैं.

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First published: 12 September 2019, 16:10 IST
 
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