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पीरियड टैबू नहीं, सेलीब्रेशन की चीज़ है

श्रिया मोहन | Updated on: 29 May 2016, 9:14 IST
(कैच हिंदी)
QUICK PILL
  • बाइबल में आदम, अदामा से निकला शब्द है जिसे खून से बनी मूर्ति कहा जाता है. पीरियड्स के ब्लड हमेशा से जीवन देने वाले माने जाते रहे हैं. भारत के असम में कामाख्या एकमात्र वैसी देवी हैं जिन्हें पीरियड होता है.
  • दुनिया के कई हिस्सों में अभी भी महिलाओं के पहले पीरियड का जश्न मनाया जाता है. रेड टेंट पार्टीज अमेरिका और अफ्रीका के कई हिस्सों में पीरियड को सेलिब्रेट करने के लिए मनाई जाती है. 
  • भारत के कई इलाकों में पीरियड को लेकर जश्न मनाया जाता है. हालांकि अब परिवारों के गांव से निकल शहरों में जाने के बाद सेलिब्रेशन नहीं होता है.

अन्य महिलाओं की तरह ही मुझे अपना पहला पीरियड याद है. साथ ही वह खुशी जो मेरी मां के चेहर पर आई थी. हालांकि किसी ने मुझे इसका मतलब नहीं बताया और न ही किसी ने यह बताने की कोशिश की, मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ. मेरे मां-पापा ने बिना कोई देरी किए दोस्तों और परिवारवालों को छोटी पार्टी देने में देर नहीं लगाई. 

मेहमानों की सूची बनाई गई और फिर लोगों को आमंत्रित किया गया. मैं अपने अभिभावक को किसी से खुशी के साथ फोन पर यह कहते सुना, 'मेरी बेटी अब बड़ी हो गई है. आप आकर उसे आशीर्वाद दीजिए.' 

उस दिन मेरे पास तोहफे थे, हाथों में पैसों से भरे लिफाफे थे और सभी का आशीर्वाद भी. उस दिन मैंने अपने लिए तैयार विशेष कपड़े पहन रखे थे. लेकिन अब मुझे वह सब ठीक नहीं लग रहा था. मैं बीच में खड़ी परेशान हो रही थी.

कुछ सालों बाद मुझे पता चला कि आखिर पीरियड्स क्यों होते हैं. तब मुझे पता चला कि इसकी मदद से औरतें जीवन देती हैं.

पीरियड्स के ब्लड हमेशा से जीवन देने वाले माने जाते रहे हैं

दक्षिण अमेरिका के पुराने लोगों को लगता था कि दुनिया चांद के खून से बनी है. वहीं मेसोपोटामिया की देवी निन्हुरसाग के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने चिकनी मिट्टी और अपने खून से इंसानों को बनाया. उन्होंने अन्य महिलाओं को ऐसा करने को कहा और उस मूर्ति की पेटिंग अपने पीरियड्स के खून से की.

बाइबिल में आदम, अदामा से निकला शब्द है जिसे खून से बनी मूर्ति कहा जाता है. पीरियड्स के ब्लड हमेशा से जीवन देने वाले माने जाते रहे हैं. भारत के असम में कामाख्या एकमात्र वैसी देवी हैं जिन्हें पीरियड होता है.

हर साल जून के महीने में उन्हें पीरियड्स होता है और महिला भक्त बच्चे की आस में उनकी मंदिर में उमड़ पड़ती हैं. महिला श्रद्धालु ब्रह्मपुत्र नदी में कामाख्या देवी की अराधना करती है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि उन दिनों नदी का पानी देवी के पीरियड के खून से लाल हो जाता है.

दुनिया के कई हिस्सों में अभी भी महिलाओं के पहले पीरियड का जश्न मनाया जाता है. रेड टेंट पार्टीज अमेरिका और अफ्रीका के कई हिस्सों में पीरियड को सेलिब्रेट करने के लिए मनाई जाती है. 

प्राचीन मिस्र में पीरियड्स वालेे ब्लड को घाव भरने का जादुई उपचार माना जाता था. इसका इस्तेमाल मरहम और दवा बनाने तक में किया जाता था.

हमारे राज्य तमिलनाडु के गांव में महिलाओं के पहले पीरियड पर बड़े जश्न का माहौल होता है. बड़े और धनी लोग इस जश्न को बड़े तरीके से मनाते हैं. वह पोस्टर तक छपवाते हैं और उस पर लड़की की तस्वीर होती है. पूरे गांव को खाने पर बुलाया जाता है. इसे पूरे गर्व के साथ मनाया जाता है.

पोषक तत्वों से भरपूर खाना लड़कियों को दिया जाता है ताकि उनका पेल्विक बोन मजबूत बना रहे. गरीब परिवारों में लोग ड्रम बजाते हैं और नाचते हैं. साथ ही कई बार वह शराब का भी सेवन करते हैं. 

परिवारों के गांव से निकल शहरों में जाने के बाद अब सेलिब्रेशन नहीं होता है. वह लोग इस बारे में चुप रह जाते हैं. कई परिवार वाले जो ऐसे समारोह में शामिल होे चुके हैं, उन्होंने अब ऐसा करना बंद कर दिया है. उन्हें यह पिछड़ेपन का प्रतीक लगता है.

हालांकि हकीकत में यह पीरियड्स से जुड़े टैबू को खत्म करने का सर्वाधिक प्रगतिशील तरीका है. महिलाओं के पीरिड्स को सेलिब्रेेट करने का सबसे बड़ा फायदा उनके प्रति हमारा आभार प्रकटीकरण होगा. यह पीरियड्स के शर्म को खत्म करने का सबसे प्रभावशाली तरीका होगा. 

First published: 29 May 2016, 9:14 IST
 
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