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जन्मदिन विशेष : डॉ. कलाम के बारे में जानें ये अनसुनी बातें, 48 संस्थानों से मिली थी डॉक्टरेट की उपाधि

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 October 2018, 12:35 IST
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मिसाइलमैन के नाम से दुनियाभर में मशहूर देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम का 15 अक्टूबर को 87वां जन्मदिन मनाया जाएगा. उन्हें जनता का राष्ट्रपति कहा जाता था, क्योंकि जनता के लिए उनके दरवाजे हर वक्त खुले रहते थे. उन्हें बच्चों से बेहद लगाव था, वो उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते और देश के लिए सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित करते.

27 जुलाई 2015 को आईआईटी गुवाहाटी में संबोधन के दौरान देश ने मिसाइलमैन कलाम को खो दिया. दुनिया से चले जाने के बाद भी उनके किए गए काम, उनकी सोच और उनका संपूर्ण जीवन देश के लिए प्रेरणास्रोत है. उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनके बारे में ऐसी ही कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं जिन्हें आजतक आपने नहीं सुना होगा.

डॉक्टर अब्दुल कलाम अपने कॉलेज के दिनों में पायलट बनना चाहते थे. लेकिन किन्ही कारणों से वह पायलट नहीं बन पाए. इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी जीवन ने उनके सामने जो रखा उन्होंने उसे ही स्वीकार कर साकार कर दिखाया. उनका मानना था कि जीवन में कुछ भी यदि आप पाना चाहते हैं तो आपका बुलंद हौसला ही आपके काम आएगा.

अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडू के रामेश्वरम् के एक गांव में हुआ था. अब्दुल कलाम का पूरा नाम 'अबुल पकिर जैनुलआबेदीन अब्दुल कलाम' था. उनके परिवार में पांच भाई और पांच बहन थीं. उनके पिता मछुआरों को बोट किराए पर देकर घर चलाते थे.

डॉक्टर कलाम के पिता ज्यादा पढ़े-लिखे तो नहीं थे लेकिन उंची सोच वाले व्यक्ति थे. कलाम का बचपन आर्थिक तंगी में बीता. वो पढ़ने के बाद सुबह रामेश्वरम के रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर जाकर समाचार पत्र एकत्र करते थे. उसके बाद रामेश्वरम शहर की सड़कों पर दौड़-दौड़कर सबसे पहले उसका वितरण करते थे. बचपन में ही आत्मनिर्भर बनने की तरफ उनका यह पहला कदम था.

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कलाम ने अपनी आरम्भिक शिक्षा रामेश्वरम् में पूरी की, सेंट जोसेफ कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली और मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की. 2002 में राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनके दरवाजे सदा आमजन के लिए खुले रहते थे. यही नहीं कई पत्रों का जवाब वो स्वयं अपने हाथों से लिखकर देते थे.

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देश के सर्वोच्च पद यानि 11वें राष्ट्रपति की शपथ लेने के बाद उन्होंने देश के हर वैज्ञानिक का सर फक्र से ऊंचा कर दिया. कलाम को विधार्थियों के प्रति विशेष प्रेम था. जिसे देखकर संयुक्त राष्ट्र ने उनके जन्मदिन को 'विद्यार्थी दिवस' के रुप में मनाने का निर्णय लिया. मिसाइल मैन के नाम से जाने जाने वाले ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भारतीय मिसाइल प्रोग्राम के जनक कहे जाते हैं.

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अब्दुल कलाम भारत के राष्ट्र निर्माता में से एक है, उन्हें पीपुल्स प्रेसीडेंट भी कहा जाता है. उनकी लिखी हुई पुस्तकें विंग्स ऑफ फायर, इंडिया 2020, इग्नाइटेड मांइड, माय जर्नी आदि है. अब्दुल कलाम को 48 यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूशन से डाक्टरेट की उपाधि मिली है.

भारत में अब्दुल कलाम उन चुनिंदा लोगों में से एक हैं जिन्हें सभी सर्वोच्च पुरस्कार मिले. उन्हें 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण, 1997 में भारत रत्न से सम्मानित हुए. 27 जुलाई 2015 को आईआईटी गुवाहटी में संबोधित करते समय उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और देश के महान राष्ट्र निर्माता सदा-सदा के लिए इस दुनिया से चले गए. लेकिन देश आज भी उनकी दी गई शिक्षा और आविष्कारों पर गर्व करता है.

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First published: 11 October 2018, 14:10 IST
 
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