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अपनी पंरपरा और देश के कानून में फंसी अंडमान की जारवा जनजाति

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 March 2016, 18:02 IST

साउथ अंडमान में पुलिस और स्थानीय प्रशासन एक गंभीर कानूनी संकट से दो-चार हो रहा है. पुलिस साउथ अंडमान में रहने वाली जारवा जनजाति की मान्यताओं और परंपराओं में शामिल एक क्रूर प्रथा को लेकर दुविधाग्रस्त है.

परंपरा के मुताबिक यह जनजातीय समुदाय ऐसे बच्चों को मार देता है, जिनकी मां विधवा होती है या बच्चे के पिता समुदाय से बाहर के हों.

हालिया घटना तब चर्चा में आई जब जारवा जनजाति के लोगों ने एक बच्चे को मार डाला, इस मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी ने पुलिस में शिकायत भी की थी. घटना के बारे में बताया जा रहा है कि बच्चा जन्म के करीब पांच महीने बाद अचानक गायब हो गया था और बाद में उसका शव रेत में दफनाया हुआ मिला.

जारवा जनजाति विश्व की आदिम जनजातियों में से है जो आज भी अपने पुराने तौर-तरीकों से जी रही है. यह जाति अपनी बेहद कम संख्या के चलते कई तरह के सरकारी संरक्षणों में जी रही है. सरकार की ओर से स्थानीय पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश है कि वह इस समुदाय से जुड़े किसी भी मामले में कम से कम हस्तक्षेप करे.

एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में इस जनजाति के लोगों की कुल संख्या लगभग 403 है, जो साउथ अंडमान में लगभग 50 हजार साल पहले अफ्रीका से यहां आकर बसे थे. साल 1990 तक यह जनजाति बिल्कुल अलग जीवन जीती रही और बाहरी लोगों को देखते ही हमला कर देती थी, हालांकि बाद में इनकी कुछ आदतें बदलीं.

जारवा जनजाति इलाकों में विदेशी या बाहरी लोगों के आने पर बैन है. जारवा जनजाति के ऊपर लंबे समय से अध्ययन कर रहे डॉ. रतन चंद्राकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह जारवा जनजाति की परंपराओं का अध्ययन कर रहे हैं लेकिन उनकी परंपरा में कभी दखल नहीं दिया.

साल 2014 में द गार्जियन ने जारवा जनजाति की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. जिसमें बताया गया था कि कुछ टूरिस्ट लोगों ने जारवा महिलाओं का सेक्सुअल हैरासमेंट किया था.

दुनिया को इस मामले में तब जानकारी तब हुई जब पहली बार जारवा जनजाति के व्यक्ति ने इंटरव्यू दिया था. इस मामले में सात लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी. अंडमान में जारवा के अलावा तीन और ट्राइब्स ग्रुप सेंटीनीलीज, ओन्ज और ग्रेट अंडमानीज भी रहती हैं.

First published: 15 March 2016, 18:02 IST
 
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