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जब भगत सिंह ने असेंबली पर बम फेंक उड़ा दी थी अंग्रेंजों की नींद, इस खास दोस्त ने भी दिया था पूरा साथ

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 September 2018, 17:10 IST
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भगतसिंह को भारत की आजादी की लड़ाई में बहुत ऊंचा दर्जा दिया गया है. भगत सिंह ने अपना पूरा जीवन भारत की आजादी के लिए न्योछावर कर दिया था. उनकी रंगों में देश पर मर मिटने का जज्बा दौड़ता था. उन्होंने ब्रिटिश सरकार को हिला के रख दिया था. ब्रिटिश सरकार तक पहुंचने के लिए भगत सिंह हर रोज नए नए तरीके अपनाते थे. भगत सिंह ने देश की आजादी में बहुत बड़ा योगदान दिया है.

भगत सिंह के भारत की आजादी से जुड़े कई क्रांतिकारी किस्से हैं. हम उनसे जुड़ा एक रोचक किस्सा यहां बताने जा रहे हैं. भगत सिंह ने आजादी की लड़ाई लड़ने के दौरान असेंबली में बम फेंकर अपने इरादे बता दिए थे. उन्होंने ब्रिटिश सरकार को हिला दिया था. इस काम में भगत सिंह का साथ उनके क्रांतिकारी दोस्त बटुकेश्वर दत्त ने दिया था.

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दरअसल, ये किस्सा है साल 1929 का. इसी साल की 8 अप्रैल को सेंट्रल असेंबली नई दिल्ली में पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिसप्यूट बिल पेश किया जा रहा था. इसी दौरान भगत सिंह ने अपने दोस्त दत्त के साथ मिलकर असेंबली पर बम फेंक दिया. इस दौरान भगत सिंह के दोस्त ने नारा लगाया, इंकलाब जिंदाबाद साम्राज्यवाद का नाश हो, दुनिया के मजदूरों एक हो.

असेंबली बम कांड को लेकर भगत सिंह के दोस्त दत्त को कोर्ट ने आजीवन निर्वासन की सजा सुना दी. अंग्रेजी सरकार ने विरोध की इस आवाज को दबाने के लिए दत्त को दत्त को अंडमान दीप समूह (बंगाल की खाड़ी) स्थित काला पानी की सजा दी. 

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भगत सिंह से जुड़ा ये किस्सा देश की आजादी से जुड़ा होने के साथ ही एक सच्चे दोस्त की कहानी को भी बयां करता है. बटुकेश्वर दत्त भगत सिंह को अपना सच्चा दोस्त मानता था. वह भगत सिंह की मां को अपनी मां के समान दर्जा देता था. भगत सिंह की मां भी बटुकेश्वर दत्त को भगत सिंह जितना ही प्यार करती थी.

दत्त का दिल्ली के अस्पताल में 20 जुलाई 1965 को निधन हो गया. दत्त की अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की समाधि के पास किया जाए. दत्त की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए उनका पार्थिव शरीर फिरोजपुर लाया गया. जहां उनका अंतिम संस्कार शहीदी स्मारक में किया गया.

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First published: 26 September 2018, 17:10 IST
 
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