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भारतेंदु हरिश्चंद्रः गले मुझको लगा लो ऐ दिलदार होली में

भारतेंदु हरिश्चंद्र | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
हिंदी साहित्य की परंपरा में होली पर खूब लिखा-पढ़ा गया है. यहां हम हिंदी के प्रतिष्ठित कवि भारतेंदु हरिश्चंद की होली पर लिखी एक कविता पेश कर रहे हैं:

गले मुझको लगा लो ऐ दिलदार होली में,

बुझे दिल की लगी भी तो ऐ यार होली में

नहीं ये है गुलाले-सुर्ख उड़ता हर जगह प्यारे,

ये आशिक की है उमड़ी आहें आतिशबार होली में

गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझको भी जमाने दो,

मनाने दो मुझे भी जानेमन त्योहार होली में

है रंगत जाफ़रानी रुख अबीरी कुमकुम कुछ है,

बने हो ख़ुद ही होली तुम ऐ दिलदार होली में

रस गर जामे-मय गैरों को देते हो तो मुझको भी,

नशीली आँख दिखाकर करो सरशार होली में

First published: 23 March 2016, 2:45 IST
 
भारतेंदु हरिश्चंद्र @catchhindi

भारतेंदु हरिश्चंद्र(1850-1885) को आधुनिक हिन्दी का उन्नायक माना जाता है.

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