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सांवली सूरत का फेसबुक, ट्विटर पर हमला

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST

सांवली, और काली मुस्लिम महिलाओं ने इंटरनेट पर अपनी सेल्फी और कहानियां शेयर करके काले और मुसलमान होने के कारण उनके सामने आने वाली दुश्वारियां बयान किया.

#BombBlackHijabis और #BombBlackMuslimahs नाम से सोशल मीडिया पर दो हैशटैग के जरिये ये सांवली महिलाएं अपना सम्मान और स्थान फिर से पाने में जुट गई हैं.

खुद को खूबसूरत दिखाना हर महिला चाहती है. लेकिन इस अभियान का मकसद काली और सांवली महिलाओं के अंदर अपने रंगरूप के कारण किसी हीनता को न आने देना और काले रंग को खूबसूरत साबित करना है. इसके लिए जरूरी है कि सांवली महिलाएं पूरे विश्वास के साथ अपनी कहानी दुनिया से साझा करें.

ऐसा ही नहीं है कि इस अभियान में केवल काली महिलाएं ही भागीदारी कर रही हैं. महिलाओं से अपनी कहानी फिर से जिंदा करने का आह्वान करते हुए एक काली मुस्लिम महिला फौजिया ट्वीट करती हैं, "द डार्कर द बेरी, द स्वीटर द जूस". जितना काली बेरी होती है उतनी ही मीठी होती है.

माइकल अकिलाह के साथ इस हैशटैग अभियान को शुरू करने वाली सफूरा सलम ट्वीट करती हैं, "मैंने तिरछी निगाहों से देखा लेकिन आप जैसे चाहें वैसे देख सकते हैं."

मुस्लिम गर्ल डॉट नेट पर सलम लिखती हैं, “जब मैने इस अभियान में हिस्सा लेने का मन बनाया तब मेरे दिमाग में मेरी बेटी का चेहरा था जिसका रंग गहरा सांवला है और उसकी हंसी बहुत उन्मुक्त और निर्दोष है. मेर बेटी ने स्कूल जाना शुरू कर दिया है. उसके पहले मैं साल भर तक उसके बारे में सोचती रही थी ताकि मैं उसके लिए कोई सही फैसला ले सकूं.

मैं नहीं चाहती थी कि उसे इतने सारे धार्मिक छात्रों के बीच अपनी पहचान को लेकर संघर्ष करना पड़े

उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला किसी इस्लामिक स्कूल में नहीं करवाया बल्कि वो एक अश्वेत बहुल शिक्षकों और छात्रों का स्कूल है.. ऐसा नहीं था कि वहां इस्लामिक स्कूल नहीं थे लेकिन वह उनमें अपनी बेटी का दाखिला इसलिए नहीं दिलाना चाहती थी, क्योंकि अपने रंग के कारण उसे इतनी कम उम्र में नस्लीय भेदभाव न झेलना पड़े.

उन्होंने अपनी सांवली बेटी को एक सामान्य स्कूल में भेजने का फैसला किया. जहां छोटे बच्चे उसे रंग के कारण ताने नहीं मारते. वह चाहती थी कि उसकी बेटी का इतनी कम उम्र में नस्लीय भेदभाव से सामना न हो. 

वो कहती हैं "मैं नहीं चाहती थी कि उसे इतने सारे धार्मिक छात्रों के बीच अपनी पहचान को लेकर संघर्ष करना पड़े. इसमें दक्षिण एशियाई, अरबी और पर्सिया के इस्लामिक लोग शामिल थे और वो बहुत कट्टर भी हैं लेकिन उसकी अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़े गायब हैं."

ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि जब नस्लीय भेदभाव के खिलाफ हैशटैग का इस्तेमाल किया जा रहा है. #UnfairAndLovely,  #BlackinMSA जैसे हैशटैग इससे पहले काफी चर्चा में रह चुके हैं. इनका मकसद भी नस्लीय और रंगरूप के आधार पर होने वाले भेदभाव का विरोध करना था. यह समस्या तकरीबन सभी समुदायों के बीच मौजूद हैं. 

गोरी महिलाओं को काली महिलाओं से ज्यादा वरीयता दी जाती है. अक्सर सांवली महिलाओं को अपमान का सामना करना पड़ता है. उनकी अक्सर शादियां टूट जाती है. इसके बावजूद वो महिलाएं इस्लाम का हिस्सा बनीं रहीं.

“मैं चाहती हूं कि इस अभियान में लाखों महिलाएं जुड़ें और स्किन के रंग को लेकर जो छोटी मानसिकता है उसको अपनी शानदार सेल्फी के जरिये खारिज करें. मैं उन महिलाओं के लिए उत्सव मनाना चाहती हूं जिन्होंने इस अभियान #BombBlackHijabis और #BombBlackMuslimahs की शुरुआत की.”

इस तरह खूबसूरत काली और सांवली महिलाओं ने शानदार ड्रेस में अपनी सेल्फी लेकर सोशल मीडिया में सनसनी मचा दी. क्या आप तैयार हैं?

First published: 12 March 2016, 3:30 IST
 
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