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Chaitra Navratri 2018: नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कुष्मांडा की आराधना, मिलेगा यश और बल

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 March 2018, 14:59 IST

चैत्र नवरात्रि का आज चौथा दिन है. नवरात्रों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना और व्रत किया जाता है. नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के कुष्मांडा देवी रूप की पूजा-अर्चना की जाती है. कुष्मांडा देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए उन्‍हें अष्‍टभुजा भी कहते हैं. कहा जाता है कि जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी. इसीलिए इन्‍हें सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है. इनके सात हाथों में कमण्‍डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्‍प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र और गदा और आठवें हाथ में जप माला है. मां कुष्मांडा का वाहन सिंह है.

मां कुष्मांडा की आराधना से मिलता है यश और बल

मां दुर्गा के चौथे रूप मां कुष्मांडा की पूजा करने से मन का डर और भय दूर हो जाता है. साथ ही जीवन में सफलता प्राप्‍त होती है. इनकी पूजा करने से भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा भक्त को आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है. यह देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं.

कैसे करें मां कुष्मांडा देवी की पूजा

नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा देवी की पूजा की जाती है. इसलिए इस दिन सुबह स्‍नान कर पूजा स्‍थान पर बैठें. सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी देवताओं की पूजा करनी चाहिए. उसके बाद माता के साथ अन्य देवी देवताओं की पूजा करनी चाहिए. इनकी पूजा के पश्चात देवी कूष्मांडा की पूजा करनी चाहिए. पूजा की विधि शुरू करने से पूर्व हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम करना चाहिए.

इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां कूष्मांडा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें. इसमें आवाह्न, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें. अंत में प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें. मां कूष्मांडा की पूजा के बाद किसी ब्राहृमण को दान दें. इससे बुद्ध‍ि का विकास होता है और निर्णय लेने की क्षमता तेज होती है.

क्या है मां कुष्मांडा का प्रसाद

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक मां कुष्मांडा को उनका प्रिय भोग अर्पित करने से मां बहुत प्रसन्न होती हैं. मां कुष्मांडा का प्रिय भोग मालपुआ है. इसलिए इस दिन मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं. इसके बाद इसे प्रसाद स्वरूप किसी ब्राह्मण को दान करें साथ ही खुद भी खाएं.

मां कुष्मांडा के इस मंत्र का करें जाप

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कुष्मांडा रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ..
इसका अर्थ है- हे मां! सर्वत्र विराजमान और कुष्मांडा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है. या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं. हे मां, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें.

First published: 21 March 2018, 10:06 IST
 
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