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Chaitra Navratri 2018: नवरात्रि का पांचवां दिन, जानें स्कंदमाता की पूजा विधि और मंत्र

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 March 2018, 10:12 IST

चैत्र नवरात्रि का आज पांचवां दिन है. नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की उपासना की जाती है. स्कंदमाता को मोक्ष के द्वार खोलने वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है. स्कंदमाता अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करती हैं. कहा जाता है कि इस चक्र में अवस्थित मन वाले भक्‍तों की समस्त बाह्य क्रियाओं एवं चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है और वह विशुद्ध चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर हो रहा होता है. स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम किया गया है. भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं.

 

ऐसा है स्कंदमाता का स्वरूप

स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं. जिनमें मां ने अपने दो हाथों में कमल का फूल पकड़ा हुआ है. उनकी एक भुजा ऊपर की ओर उठी हुई है. जिससे वह भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और एक हाथ से उन्होंने गोद में बैठे अपने पुत्र स्कंद को पकड़ा हुआ है. स्कंदमाता कमल के पुष्प पर विराजमान हैं. इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है. इनका वाहन सिंह है.

हर परेशानी से निजात दिलाती हैं स्कंदमाता

शास्त्रों में स्कंदमाता की आराधना का काफी महत्व बताया गया है. इनकी उपासना से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है. अतः मन को एकाग्र रखकर और पवित्र रखकर इस देवी की आराधना करने वाले साधक या भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है.

स्‍नेह की देवी हैं स्कंदमाता

भगवान स्कंद को कुमार कार्तिकेय नाम से भी जाना जाता है. ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे. इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां भगवती के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ता है तो माता अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का नाश करती हैं. स्कंदमाता को अपना नाम अपने पुत्र के साथ जोड़ना बहुत अच्छा लगता है.

स्कंदमाता को इन चीजों का लगाएं भोग

चैत्र माह की पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए. इस प्रसाद को ब्राह्मणों को देना चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है.

स्कंदमाता का श्लोक

या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

इसका अर्थ है, हे मां सर्वत्र विराजमान और स्कंदमाता के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है. हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें.

इस मंत्रा का भी करें जाप

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया.

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी..

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First published: 22 March 2018, 10:12 IST
 
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