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Chaitra Navratri 2018: एक ही दिन होगी अष्टमी और नवमी तिथि, कन्याओं की करें पूजा, पापों से मिलेगी मुक्ति

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 March 2018, 12:56 IST

चैत्र नवरात्रि का आज सातवां दिन है. आज से ही चैत्र की अष्टमी तिथि भी शुरु हो गई है. नवरात्रि साल में दो बार आते हैं पहले चैत्र नवरात्र और दूसरे शारदीय नवरात्र. गर्मियों की शुरूआत में आने वाले चैत्र नवरात्रि का भी अपना विशेष महत्व है. चैत्र नवरात्र से नववर्ष के पंचांग की गणना शुरू होती है. नवरात्रि के नौ दिन मां के अलग-अलग स्वरुप की पूजा की जाती है.

इस साल नवरात्रि की अष्ठमी और नवमी तिथि एक ही दिन मनाई जाएगी. जो रविवार 25 मार्च को मनाई जाएगी. इस दिन कन्या पूजन किया जाएगा. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस साल चैत्र की अष्ठमी और नवमी तिथि एक ही दिन है. अष्ठमी तिथि 24 मार्च को सुबह 10.15 बजे से शुरू हो होगी और 25 मार्च रविवार सुबह 8.15 बजे तक रहेगी.

वहीं नवमी तिथि अगले दिन 26 मार्च को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी. इसलिए अष्टमी और नवमी का पूजन रविवार को ही किया जाएगा. इसलिए अष्टमी और नवमी का पूजन रविवार को ही किया जाएगा. इसके साथ ही चैत्र नवरात्रि का समापन हो जाएगा.

नवमी के दिन कन्याओं की करें पूजा

माना जाता है इस दिन भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम का जन्मदिन होता है. ऐसे में एक दिन दोनों तिथियां होने पर इस शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करना चाहिए. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस दिन नौ कन्याओं की पूजा करें. इन कन्याओं की आयु 2 साल से लेकर 10 साल के बीच होनी चाहिए.

इस दिन कन्याओं की विधिवत पूजा करें. सबसे पहले कन्याओं का चरण फूल की थाली में जल में डालकर उसको धोएं. मान्‍यता है कि ऐसा करने से पापों का शमन होता है. फिर उनको तिलक लगाकर पंक्तिबद्ध बैठाएं. हाथ में रक्षासूत्र बांधें और उनके चरणों में पुष्प अर्पित करें. इसके बाद नई थाली में कन्‍याओं को पूड़ी, हलवा, चना इत्यादि भोजन श्रद्धा पूर्वक परोसें. फिर मिष्ठान और प्रसाद देकर कुछ द्रव्य और वस्त्र का दान करें.

जब कन्‍याएं भोजन कर लें तो उन्‍हें शक्तिस्वरूपा देवी मानकर पुनः उनकी आरती करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेकर उन्हें विदा करें. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 24 मार्च को सुबह 10 बजे के बाद कन्या पूजन किया जा सकता है. राम नवमी के दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की उपासना करें. वहीं सूर्य को जल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. रविवार को नवमी होने की वजह से ये उज्जवल भविष्य के लिए शुभ है.

राम नवमी के दिन रखें व्रत

रामनवमी के दिन जो लोग व्रत रखते हैं उन्हें आठ प्रहर फलहार पर रहना होता है. मतलब कि रविवार के सूर्योदय से लेकर सोमवार के सूर्योदय तक उनका व्रत रहेगा. सुबह भगवान सूर्य के बाद इस व्रत की शुरुआत होती है. इस दिन भक्तों को ऊँ श्री रामाय: नम: या ऊँ श्री राम जय श्री राम जय जय राम मंत्र का उच्चारण करना होता है. इस व्रत से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होता हैं और उसे स्वस्थ जीवन, सम्पन्नता, खुशहाली और मन को शांति मिलती है.

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First published: 24 March 2018, 12:56 IST
 
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