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Chaitra Navratri 2018: आज करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, होगी विजय की प्राप्ति

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 March 2018, 9:55 IST

चैत्र नवरात्रि का आज दूसरा दिन है. नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे रूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की गई थी. मां के भक्त इस दिन अपने मन को भगवती मां के श्री चरणों मे एकाग्रचित करके स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित करते हैं और मां की कृपा प्राप्त करते हैं. ब्रह्मचारिणी देवी भगवती दुर्गा की नौ शक्तियों का दूसरा स्वरूप हैं.

ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है, इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बायें हाथ में कमंडल रहता है.चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन को भगवान राम के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है. इसे राम नवमी भी कहते हैं. चैत्र नवरात्रि को राम नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है. इसी के साथ यह नवरात्रि वसंत के बाद गर्मियों की शुरुआत मानी जाती है.

मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरुप की क्या है कहानी

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है. ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली होता है. इसलिए ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली. इन मां के दाहिने हाथ में जप करने वाली माला होती है और बाएं हाथ में कमंडल. पौराणिक कथाओं के मुताबिक माता ब्रह्मचारिणी ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए बहुत तपस्या की थी. इसी वजह से उन्हें तपश्चारिणी भी कहते हैं.

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से क्या फल मिलता है

नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का दिन माना जाता है. मां के भक्त इस दिन मां की अनुकम्पा प्राप्त करने के लिए व्रत-अनुष्ठान व साधना करते हैं. कुंडलिनी जागरण के साधक इस दिन स्वाधिष्ठान चक्र को जाग्रत करने की साधना करते हैं. मां दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है.

मां ब्रह्मचारिणी की साधना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है. जीवन के कठिन संघषों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता. माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है. इस दिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र में शिथिल होता है. इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है.

इस दिन करें कन्याओं का पूजन

नवरात्रि के दूसरे दिन ऐसी कन्याओं की पूजा भी करनी चाहिए जिनका विवाह तय हो गया हो, लेकिन अभी शादी नहीं हुई है. ऐसी कन्याओं को अपने घर बुलाएं और उनका पूजन करनेके बाद भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट करें. मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करने का मंत्र बहुत ही आसान है. मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए.

देवी ब्रह्मचारिणी का मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मंत्र का अर्थ

हे मां! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है. या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं.

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First published: 19 March 2018, 9:55 IST
 
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