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Chandra Grahan 2018: जानिए क्या इस बार चंद्र ग्रहण का असर आपके दिमाग पर भी पड़ेगा

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 July 2018, 16:16 IST

आज रात भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में चंद्रमा का अलौकिक रूप देखने को मिलेगा. जिसे सदी का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण माना जा रहा है. इस दौरान पूर्वी गोलार्ध में रहने वाले लोगों को चंद्रमा एकदम लाल दिखाई देगा. जिसे 'ब्लड मून' कहा जाता है. माना जाता है कि चंद्र और सूर्य ग्रहण हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालते हैं. जो सिर्फ मिथ है या हकीकत, इसी बारे में कुछ शोधार्थियों ने अपनी राय दी है. परंपराओं के मुताबिक, ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा की गतिविध पृथ्वी पर इंसानों के दिमाग पर असर डालती है.

खगोल वैज्ञानिकों के मुताबिक, ‘Lunar Effect’ यानी ‘चंद्र प्रभाव’ एक शब्द है जो इस बात को मानता है कि चंद्रमा की चाल का असर मनुष्यों के व्यवहार और मनोदशा पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है.साल 2008 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इसी पर एक शोध किया, जो वर्तमान जीवविज्ञान में प्रकाशित किया गया था.

बाद में इस शोध का मूल्यांकन लुडविग मैक्सिमिलियन यूनिवर्सिटी ने किया. जिसमें निष्कर्ष निकाला है कि चंद्रमा की स्थिक का मानव दिमाग के साथ आंतरिक संबंध जरूर है, लेकिन इस बात के बहुत कम प्रमाण हैं कि चंद्रमा की स्थित मानव के दिमाग पर बहुत असर डालती है.

शोध में पता चला कि मानव संस्कृति के मुताबित चंद्रमा की स्थित मानव शरीर पर प्रभाव डालती है.जिसका असर मानव के मानसिक स्वास्थ्य पर भी होता, बावजूद इसके इस बात के आजतक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं. यानी खगोल वैज्ञानिक इस बात से बिल्कुल इंकार करते हैं कि चंद्रमा की स्थित मानव शरीर या मानव दिमाग पर किसी तरह का कोई असर डालती है.

ब्रिटेन की न्यूज वेबसाइट इनडिपेंडेंट में छपी खबर के मुताबिक, बर्मिंघम यूनिर्सिटी के स्कूल ऑफ फिजिक्स एंड एस्ट्रोनॉमी में सैद्धांतिक खगोल भौतिकी की प्रोफेसर इलिया मंडेल बताती हैं कि, अभी भी ब्लड मून और मानव स्वभाव के संबंधों के बारे में संदेह बना हुआ है.उन्होंने बताया कि ब्लड मून वाकई खगोलीय परिपेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण घटना है लेकिन इसका इंसानों के व्यवहार से कोई संबंध है या नहीं पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता.

प्रोफेसर इलिया मंडेल बताती है कि ब्लड मून वाकई एक चंद्र ग्रहण है. यह ग्रहण तब लगता है कि जब तीन खगोलीय पिंड एक सीध में आ जाते हैं. यानी पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य का एक सीध में आना ब्लड मून की वजह बनता है.

वो बताती है कि जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के बीच होती है, तब पृथ्वी पर चंद्र ग्रहण होता है. क्योंकि चंद्रमा वास्तव में सूर्य के प्रकाश को प्रतिबिंबित करता है, ऐसे में पृथ्वी सूर्य की रोशनी को चंद्रमा तक पहुंचने से अवरुद्ध कर देती है.तो चंद्रमा लाल दिखाई देने लगता है.

बता दें कि इस सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण आज यानी 27 जुलाई को लगने वाला है. ये साल का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा. जो रात 11.54 से शुरू होकर अगले दिन यानी 28 जुलाई सुबह 3.49 तक रहेगा. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण 1:48 घंटे तक रहेगा.

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First published: 27 July 2018, 15:55 IST
 
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