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Christmas Day: क्रिसमस डे में बच्चों को गिफ्ट देने वाले सेंटा की क्या है कहानी?

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 December 2018, 15:43 IST

ईसामसीह के जन्मदिन के मौके पर भारत समेत पूरी दुनिया में क्रिसमस पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. इस मौके पर देश के सभी शहरों में लोगों के घर ‘क्रिसमस ट्री’ सजाया जाता है. इसके अलावा तमाम तरह के रीति-रिवाज क्रिसमस डे पर मनाए जाते हैं.

आप भी जानें उन रीति-रिवाजों को

साल के आखिर में आने वाला खुशियों का त्यौहार क्रिसमस जिसे हम बड़ा दिन भी कहते हैं. इस दिन को ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. इसमें कुछ चीजें बहुत खास होती हैं. 

सांता निकोलस: सांता निकोलस को बच्चे-बच्चे जानते हैं. इस दिन खासकर बच्चों को इनका इंतजार रहता है. संत निकोलस का जन्म तीसरी सदी में जीसस की मौत के 280 साल बाद मायरा में हुआ था. बचपन में माता पिता के देहांत के बाद निकोल को सिर्फ भगवान जीसस पर यकीं था. बड़े होने के बाद निकोलस ने अपना जीवन भगवान को अर्पण कर लिया.

संत निकोलस एक पादरी बने फिर बिशप, उन्हें लोगों की मदद करना बेहद पसंद था. वह गरीब बच्चों और लोगों को गिफ्ट दिया करते थे. निकोलस को इसलिए संता कहा जाता है क्योंकि वह अर्धरात्रि को गिफ्ट दिया करते थे कि उन्हें कोई देख न पाए. आपको बता दें कि संत निकोलस के वजह से हम आज भी इस दिन संता का इंतजार करते हैं.

क्रिसमस ट्री: जब भगवान ईसा का जन्म हुआ था तब सभी देवता उन्हें देखने और उनके माता पिता को बधाई देने आए थे. उस दिन से आज तक हर क्रिसमस के मौके पर सदाबहार फर के पेड़ को सजाया जाता है और इसे क्रिसमस ट्री कहा जाता है. क्रिसमस ट्री को सजाने की शुरुआत करने वाला पहला व्यक्ति बोनिफेंस टुयो नामक एक अंग्रेज धर्मप्रचारक था. यह पहली बार जर्मनी में दसवीं शताब्दी के बीच शुरू हुआ था.

कार्ड देने की परंपरा: दुनिया का सबसे पहला क्रिसमस कार्ड विलियम एंगले द्वारा 1842 में भेजा गया था. अपने परिजनों को खुश करने के लिए. इस कार्ड पर किसी शाही परिवार के सदस्य की तस्वीर थी. इसके बाद जैसे की सिलसिला सा लग गया एक दूसरे को क्रिसमस के मौके पर कार्ड देने का और इस से लोगो के बीच मेलमिलाप बढ़ने लगा.

First published: 12 December 2018, 15:43 IST
 
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