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मंदिरों की क्यों लगाते हैं परिक्रमा? जानें पौराणिक और वैज्ञानिक कारण

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 June 2019, 12:11 IST

हिन्दू धर्म को मानने वाले जब भी किसी मंदिर में जाते हैं, तो वे उस मंदिर या वहां विराजमान मूर्ति की परिक्रमा जरूर करते हैं. हिन्दू धर्म में मंदिर और मूर्ति की परिक्रमा करना बहुत ही शुभ माना जाता है. हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि मंदिर की परिक्रमा करने से व्यक्ति का मन शुद्ध और सकारात्मक प्रवृति का होता है.

सनातन धर्म की पौराणिक कथाओं के मुताबिक, "एक बार सभी देवताओं और भगवान में खुद को सबसे महान बताने की होड़ लगी थी. ऐसे में तय हुआ कि सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा कर वापस आएगा वही विजयी हुआ. ऐसे में गणेश भगवान ने अपने माता-पिता की परिक्रमा की." इस घटना के बाद गणेश जी की बुद्धिमत्ता को देखते हुए उन्हें ही विजयी मान लिया गया था. तब से माना जाता है कि भगवान की परिक्रमा करने से अच्छे फल की प्राप्ति होती है, लोगों को सुख और समृद्धि प्राप्त होती है.

परिक्रमा करते समय रखें ख्याल

परिक्रमा करते समय इस बात का ख्याल रखें कि आप जहां परिक्रमा कर रहे हैं. वहां मूर्ति के दाएं ओर से परिक्रमा शुरू करें. परिक्रमा करते समय जयकारे लगाएं. इस दौरान कम से कम 8 बार परिक्रमा लगाएं ऐसा करने से मन शांत होता है.

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वैज्ञानिक कारण

मंदिरों की परिक्रमा लगाने का वैज्ञानिक कारण भी है. वैज्ञानिकों का मानना है कि मंदिर में रोजाना पूजा-अर्चना होती है. ऐसी स्थिति में यहां का माहौल काफी शांत और सकारात्मक बना रहता है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति यहां परिक्रमा करता है, तो उसे वे पॉजीटिव उर्जा के संपर्क में आता है. जिससे व्यक्ति सूकून प्राप्त करता है.

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First published: 13 June 2019, 12:11 IST
 
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