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Dhanteras 2020 : इस वजह से मनाया जाता है धनतेरस का त्यौहार, जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 November 2020, 19:56 IST

पांच दिवसीय दिवाली के त्यौहार की शुरूआत धनतेरस से की जाती है. कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है. इसके बाद रूप चौदस या नरक चतुर्दशी और फिर दिवाली का त्यौहार आता है. दिवाली के अगले दिन अन्नकूट और गोवर्द्धन पूजा और भी भाईदूज की पूजा की जाती है. चलिए आज हम आपको बताते हैं कि धनतेरस का त्यौहार क्यों मनाया जाता है.

धनतेरस के दिन धातु से बनी चीजें खरीदना बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन नए बर्तन खरीदने से 13 गुणा वृद्धि होती है. इसलिए इस दिन खरीदारी का बड़ा क्रेज है. इस दिन चांदी खरीदना भी शुभ माना जाता है. इसलिए इस दिन चांदी की लक्ष्मी और गणेष की मूर्ति लोग खरीदते हैं.


धनतेरस के दिन घर के आंगन और मेन गेट पर दीया जलाने का रिवाज है. इससे घर में सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है. धनतेरस के दिन भगवान धन्वन्तरि की पूजा भी की जाती है और भगवान धन्वंतरि से लोग अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं. इस दिन भगवान धनवंतरि के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं.

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पौराणिक कथाओं के मुताबिक पूर्वकाल में देवराज इंद्र के अभद्र आचरण के परिणामस्वरूप महर्षि दुर्वासा ने तीनों लोकों को श्रीहीन होने का श्राप दिया था. जिसके कारण अष्टलक्ष्मी पृथ्वी से अपने लोक चलीं गई. पुन तीनों लोकों में श्री की स्थापना के लिए व्याकुल देवता त्रिदेवों के पास गए और इस संकट से उबरने का उपाय पूछा. महादेव ने देवों को समुद्रमंथन का सुझाव दिया जिसे देवताओं और दैत्यों ने सहर्ष स्वीकार कर लिया.

समुद्र मंथन की भूमिका में मंदराचल पर्वत को मथानी और नागों के राजा वासुकी को मथानी के लिए रस्सी बनाया गया. वासुकी के मुख की ओर दैत्य और पूंछ की और देवताओं को किया गया और समुद्र मंथन आरम्भ हुआ. समुद्रमंथन से चौदह प्रमुख रत्नों की उत्पत्ति हुई जिनमें चौदहवें रत्न के रूप में स्वयं भगवान धन्वन्तरि प्रकट हुए जो अपने हाथों में अमृतकलश लिए हुए थे. भगवान विष्णु ने इन्हें देवताओं का वैद्य और वनस्पतियों और औषधियों का स्वामी नियुक्त किया. इन्हीं के वरदान स्वरूप सभी वृक्षों-वनस्पतियों में रोगनाशक शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ.

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First published: 10 November 2020, 19:56 IST
 
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