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Dushera 2020 : विजयादशमी को करें शश्त्रों की इस प्रकार पूजा, जीवन में कभी भी नहीं मिलेगी हार

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 October 2020, 13:58 IST

Dushera 2020 : इस साल विजयादशमी 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा. दशहरा का ये त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. लेकिन क्या आपको मालूम है कि इस दिन को कुछ लोग आयुधपूजा या शस्र्त पूजा के नाम से भी जानते हैं.

दरअसल तमिलनाडू, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में विजयादशमी को आयुध पुजाई के नाम से अस्त्र शस्त्र का पूजन किया जाता है. इसके अलावा केरल, उड़ीसा, कर्नाटक राज्यों में मनाया जाता है. वहीं महाराष्ट्र में आयुध पूजा को खंडे नवमी के रूप में भी मनाया जाता है. वहीं यूपी बिहार, मध्यप्रदेश अन्य जगहों पर शस्त्र पूजन के रूप में भी जाना जाता है.


हर साल ये त्यौहार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल आता होगा कि ये तो दशहरे का दिन है तो इस दिन शस्त्रों की पूजा क्यों की जाती है. तो इसका कारण ये है कि शस्त्र पूजा नवरात्रि का एक अभिन्न अंग माना जाता है. इस दिन सभी अस्त्र शस्त्र की पूजा करने की परंपरा है. भारत में नवरात्रि के अंतिम दिन अस्त्र पूजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है.

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ज्योतिष के मुताबिक विजय के प्रतीक दशहरा वाले दिन अस्त्र शस्त्र की पूजा करने कूी परंपरा है. माना जाता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है उसका शुभ फल जरूर मिलता है. इसके अलावा शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए शस्त्र पूजा जरूर करनी चाहिए. इसके अलावा इस दिन ब्राह्मण सरस्वती पूजा और क्षत्रिय शस्त्र पूजन करते हैं. वहीं जो लोग व्यापारी हैं वो अपने प्रतिष्ठान आदि का पूजन करते हैं.

मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है, उसमें जीवनभर निराशा नहीं मिलती यानि वह काम हमेशा ही शुभ फल देता है. प्राचीन वक्त में क्षत्रिय युद्ध पर जाने के लिे इस दिन का ही चुनाव करते थे. उनका मानना था कि दशहरा पर शुरू किए गए युद्ध में विजय निश्चित होगी.

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First published: 6 October 2020, 13:58 IST
 
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