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Engineer’s Day : भारत में इसलिए मनाया जाता है 'इंजीनियर्स डे', जानिए क्या है इसका इतिहास

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 September 2018, 13:08 IST

Engineers Day 2018: भारत में हर साल 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाया जाता है. हर दिवस को मनाने के पीछे कोई ना कोई वजह होती है. क्या आप जानते हैं कि इंजीनियर्स डे क्यों मनाया जाता है. अगर नहीं जानते तो चलिए आज हम आपको इंजीनियर्स डे के बारे में ही बताएंगे. दरअसल, आज ही के दिन भारत की महान हस्तियों में शामिल एम विश्वेश्वरैया का जन्म हुआ था. उन्हीं के सम्मान में 15 सितंबर को भारत में इंजीनियर्स डे के रूप में मनाया जाता है.

एम विश्वेश्वरैया का जन्म मैसूर के कोलार जिले के चिक्काबल्लापुर तालुक में एक तेलुगू परिवार में हुआ था. उनका पूरा नाम मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया है. उन्हें सर एमवी के नाम से भी जाना जाता है. एम विश्वेश्वरैया को भारत के सर्वोच्च सम्माम भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया थाउनके पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेद चिकित्सक थे. विश्वेश्वरैया की मां का नाम वेंकाचम्मा था. उनके पूर्वज आंध्र प्रदेश से आकर कोलार में बस गए थे.

एम विश्वेश्वरैया की शुरूआती पढ़ाई उनकी जन्मस्थली पर ही हुई. 12 साल की उम्र में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई. उसके बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए विश्वेश्वरैया ने बेंगलुरू के सेंट्रल कॉलेज में प्रवेश लिया. विश्वेश्वरैया ने सन् 1881 में बीए की परीक्षा में टॉप किया.

एम विश्वेश्वरैया शुरु से ही मेधावी थे, इसीलिए बीए की पास करने के बाद सरकार ने उन्हें आगे पड़ने का मौका दिया और वो मैसूर सरकार की मदद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पूना के साइंस कॉलेज में पहुंच गए. 1883 की एलसीई और एफसीई (वर्तमान में BE) की परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया. इसी उपलब्धि के चलते महाराष्ट्र सरकार ने इन्हें नासिक में सहायक इंजीनियर के पद पर नियुक्त किया.

उसके बाद एम विश्वेश्वरैया ने हैदराबाद शहर के बाढ़ सुरक्षा प्रणाली के मुख्य डिजाइनर और मैसूर के कृष्णसागर बांध के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाने वाले शख्स बने. मात्र 32 साल की उम्र में सिंध महापालिका के लिए कार्य करते हुए उन्होंने सिंधु नदी को सुक्कुर कस्बे की जलापूर्ति के लिए जो योजना बनाई.

उन्होंने नई ब्लॉक प्रणाली का आविष्कार किया, जिसके अंतर्गत स्टील के दरवाजे बनाए जो बांध के पानी के बहाव को रोकने में मदद करते थे. उनकी इस प्रणाली की काफी तारीफ हुई और आज भी यह प्रणाली पूरी दुनिया में प्रयोग में लाई जा रही है. जिसके बाद उन्हें 1909 में मैसूर राज्य का चीफ इंजीनियर नियुक्त किया गया.

उनके कार्य को देखते हुए एम विश्वेश्वरैया को वहां के राजा ने उन्हें राज्य का दीवान यानी मुख्यमंत्री घोषित कर दिया गया. सन् 1912 से लेकर 1918 तक उन्होंने अपने राज्य के लिए बहुत सामाजिक और आर्थिक कार्यों में योगदान दिया. राष्ट्र में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए सन् 1955 में एम विश्वेश्वरैया को भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. 101 साल की उम्र में 14 अप्रैल 1862 को उनका निधन हो गया.

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First published: 15 September 2018, 13:08 IST
 
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