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'अंग्रेजी न बोलने वाले देशों को शेक्सपीयर अधिक पसंद हैं'

रंगनाथ सिंह | Updated on: 5 May 2016, 19:16 IST

23 अप्रैल को अंग्रेजी नाटककार और कवि विलियम शेक्सपीयर की 400वीं पुण्यतिथि है. इसी दिन भारतीय फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे, महान स्पैनिश लेखक मिगुएल दि सर्वांतीज और प्रसिद्ध रोमांटिक कवि विलियम वर्ड्सवर्थ की भी पुण्यतिथि है. लेकिन शेक्सपीयर जैसी धूम किसी की भी नहीं दिखायी दे रही, कम से कम अंग्रेजी भाषा में.

ब्रिटेन में शेक्सपीयर की 400वीं पुण्यतिथि पर विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं नाना प्रकार के कार्यक्रम करा रही हैं. ट्विटर पर शेक्सपीयर ट्रेंड कर रहे हैं. सर्च इंजन गूगल ने डूडल बनाकर शेक्सपीयर को श्रद्धांजलि दी है.

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ब्रितानी न्यूज संस्था बीबीसी इस मौके पर 'शेक्सपीयर की 400वीं पुण्यतिथि' नाम से विशेष श्रंखला कर रहा है. बीबीसी के कला संपादक विल गॉम्पर्ट्ज़ की मानें तो शेक्सपीयर जितने लोकप्रिय आज हैं उतने ज्यादा फेमस वो इतिहास में कभी नहीं रहे, ख़ुद अपने जीवनकाल में भी नहीं.

'शेक्सपीयर की 400वीं पुण्यतिथि' के साल में ही उनकी लोकप्रियता की कहानी में एक 'दुःखद' मोड़ आ गया. इस मौके पर कराए गए एक सर्वे के अनुसार ब्रितानी इतिहास का सबसे बड़ा लेखक अंग्रेजी बोलने वाले देशों से ज्यादा, अंग्रेजी न बोलने वाले देशों में लोकप्रिय है. 

हालांकि इस सर्वे में ये भी कहा गया है कि ब्रिटेन की समृद्धि और प्रभाव को बढ़ाने में शेक्सपीयर की प्रमुख भूमिका रही है. सर्वे के नतीजे मंगलवार को जारी किए गए.

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ब्रिटिश काउंसिल के लिए यूगॉव (YouGov) ने 15 देशों के 18 हजार लोगों के बीच ये सर्वे किया. सर्वे के अनुसार शेक्सपीयर की पहुंच व्यापक है, लोग उन्हें पसंद करते हैं और उन्हें समझते भी हैं.

सर्वे में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये रही है कि अंग्रेजी नहीं बोलने वाले देशों (चीन, भारत, तुर्की और मैक्सिको) में शेक्सपीयर की स्वीकार्यता अंग्रेजी भाषी देशों (ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका) से ज्यादा है.

अंग्रेजी न बोलने वाले देशों में 65 प्रतिशत प्रतिभागी उन्हें आज भी महत्वपूर्ण मानते हैं. जबकि अंग्रेजी बोलने वाले देशों में 59 फ़ीसदी प्रतिभागी ही उन्हें मौजूदा दौर के लिए प्रासंगिक मानते हैं.

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ब्रिटेन में हर 10 में चार प्रतिभागी ने कहा कि वो शेक्सपीयर को आज के समय में प्रासंगिक नहीं मानता. जिन 15 देशों में ये सर्वे किया गया उनमें शेक्सपीयर को पसंद करने के मामले में ब्रिटेन 11वें स्थान पर रहा.

सर्वे में शामिल देशों में शेक्सपीयर सबसे कम जर्मनी में पसंद किए जाते हैं. यहां के केवल 44 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वो उन्हें पसंद करते हैं. जबकि 42 प्रतिशत जर्मन प्रतिभागियों ने उन्हें आज भी प्रासंगिक मानने से इनकार किया.

सर्वे में शामिल एक-तिहाई लोगों ने कहा कि शेक्सपीयर के कारण ब्रिटेन के बारे में उनकी राय सकारात्मक है. ऐसी राय रखने वालों में सबसे अधिक आगे भारत (62 प्रतिशत) और उसके बाद ब्राजील (57 प्रतिशत) रहा.

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38 नाटक और 154 सॉनेट लिखने वाले शेक्सपीयर का दुनिया की 80 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है. शेक्सपीयर की जन्मतिथि विवादित है लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार उनका अंतिम संस्कार 25 अप्रैल 1616 को हुआ था.

बाक़ी दुनिया में शेक्सपीयर की प्रासंगिता बहसतलब विषय हो सकती है. लेकिन हमारे देश में उनकी लोकप्रियता किसी भी भारतीय लेखक से बीस हो सकती है, उन्नीस नहीं. यकीन न हो तो आप शेक्सपीयर के नाटकों पर आधारित विशाल भारद्वाज की फ़िल्में मक़बूल (मैकबेथ), ओंकारा (ओथेलो) और हैदर (हैमलेट) को याद कर सकते हैं. 

या फिर आप मौका मिलने पर निदेशक और रंगकर्मी रजत कपूर के नए नाटक क्लाउन प्रिंस (शेक्सपीयर के नाटक 'एज यू लाइक इट' का रूपांतरण) देख सकते हैं. वो कहावत है ना कि 'अंग्रेज चले गए, अंग्रेजी छोड़ गए.' इस कहावत में अंग्रेजी की जगह शेक्सपीयर कह दिया जाए तो भी शायद बात वही रहेगी.

First published: 5 May 2016, 19:16 IST
 
रंगनाथ सिंह @singhrangnath

पेशा लिखना, शौक़ पढ़ना, ख़्वाब सिनेमा, सुख-संपत्ति यार-दोस्त.

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