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बेटी को लिखा चंदा कोचर का यह पत्र हर मां-बाप का बच्चों के लिए लिखा आदर्श पत्र है

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 April 2016, 8:23 IST
QUICK PILL
आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) \r\nचंदा कोचर को फोर्ब्स मैग्जीन द्वारा इस बार भी दुनिया की 100 सर्वाधिक \r\nशक्तिशाली महिलाओं में शामिल किया गया है. इससे पहले भी तीन बार कोचर \r\nका नाम इस सूची में शामिल हो चुका है. दुनिया भर की लाखों \r\nमहिलाओं के लिए प्रेरणा बनने वाली कोचर कार्यक्षेत्र में महिलाओं की \r\nतरफदारी भी करती हैं. एक बेटी, पत्नी, मां, बहू होते हुए इतनी सफलता पाने \r\nवाली कोचर जीवन के मूल्यों में विश्वास करती हैं.बचपन में \r\nउन्हें दी गई नसीहतें, ईमानदारी-मेहनत के पाठ और आत्मनिर्भरता की सीख ने \r\nउन्हें बुलंदियों पर पहुंचाया. सुधा मेनन द्वारा लिखी किताब \"लिगेसीः \r\nलेटर्स फ्रॉम एमिनैंट पैरेंट्स टू देयर डॉटर्स\" में उनका पत्र छपा है. कोचर\r\n द्वारा अपनी बेटी को लिखे पत्र में उन्होंने जो संदेश दिया है, उसे हर \r\nव्यक्ति को पढ़ना चाहिए. यहां हम उसका हिंदी अनुवाद दे रहे हैं.

प्यारी आरती,

आत्मविश्वास से लबरेज एक युवती के रूप में तुम्हें अपने सामने खड़ा देखकर मुझे बहुत गर्व का अहसास हो रहा है. यहां से तुम्हारे जीवन की एक नई यात्रा शुरू होने जा रही है. मैं तुम्हारे आने वाले जीवन में तरक्की और समृद्धि की कामना करती हूं.

इस पल ने मुझे मेरी जीवन यात्रा और अनुभवों की याद दिला दी है, जो मैंने इस दौरान सीखे हैं. जब मैं उस वक्त के बारे में सोचती हूं तो मुझे लगता है कि अपने जीवन के अधिकांश पाठ मैंने बचपन में ही सीखे थे जिनमें माता-पिता का जबरदस्त असर था.

मैं उस वक्त केवल 13 साल की छोटी लड़की थी जब हमारे पिता अचानक दिल का दौरा पड़ने से हमें अकेला छोड़कर चले गए

मेरे जीवन के प्रारंभिक वर्षों में जिन मूल्यों को उन्होंने मुझमें पिरोया उसने मेरी नींव डाली, जिन पर आज भी मैं अपना जीवन जीने की कोशिश करती हूं.

हमारे माता-पिता ने हम तीनों यानी दो बहनों और एक भाई से बराबरी का व्यवहार किया. चाहे बात शिक्षा की हो या फिर हमारे भविष्य की योजना की, उन्होंने हमारे लिंग के आधार पर कभी भी भेदभाव नहीं किया. तुम्हारें दादा-दादी ने भी हमेशा हम तीनों को यही संदेश दिया कि यह जरूरी है कि जो तुम्हें संतुष्टि दे उस पर ध्यान केंद्रित करो और उस दिशा में पूरे समर्पण के साथ काम करो.

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उस शुरुआती पहल ने हमें आत्मविश्वासी व्यक्तियों के रूप में खड़ा किया जो अपने फैसले लेने में स्वयं सक्षम हों. इसने मेरी तब मदद की जब मैंने खुद को खोजने के सफर की शुरुआत की.

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मैं उस वक्त केवल 13 साल की छोटी लड़की थी जब हमारे पिता अचानक दिल का दौरा पड़ने से हमें अकेला छोड़कर चले गए. हम तब तक जिंदगी की चुनौतियों से सुरक्षित रहे थे. लेकिन बिना किसी चेतावनी के उस रात सबकुछ बदल गया. 

और मेरी मां जो तब तक एक गृहणी थी, उन्हें तीनों बच्चों को पालने की जिम्मेदारी उठानी पड़ी. तब हमें पता चला कि वो कितनी मजबूत और अपने कर्त्तव्यों के सबसे बेहतर ढंग से निर्वहन के लिए कितनी दृढ़ निश्चयी थीं. 

धीरे से उन्होंने वस्त्र डिजाइनिंग का तरीका खोजा और एक छोटी सी कंपनी में नौकरी की. इसके बाद जल्द ही वहां पर उन्होंने खुद को सबसे प्रासंगिक व्यक्ति बना दिया. अकेले रहते हुए परिवार को पालने की जिम्मदारी अकेले कंधों पर उठा लेना उनके लिए काफी चुनौती भरा रहा होगा, लेकिन उन्होंने कभी भी हमें इस बात की भनक नहीं लगने दी. 

जब तक हम सब कॉलेज जाने के बाद काबिल नहीं हो गए उन्होंने कड़ी मेहनत जारी रखी. मैं यह कभी नहीं जानती थी कि उनके अंदर इतना आत्मविश्वास और भरोसा भरा था.

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फुल टाइम जॉब करने वाले एक अभिभावक के रूप में आप अपने परिवार को देखने के साथ अपना कार्य प्रभावित नहीं कर सकते हैं. याद करो जब तुम अमेरिका में पढ़ रही थी और उस वक्त सभी अखबारों में मेरे आईसीआईसीआई बैंक के एमडी और सीईओ बनने की घोषणा हुई? 

इसके दो दिन बाद तुम्हारी लिखी मेल मुझे याद है. तुमने मेल में लिखा था 'आपने हमें कभी इस बात का पता नहीं चलने दिया कि आपका करियर अत्यधिक काम की अपेक्षा रखने वाला, सफल और तनाव से भरा था. घर पर तो आप केवल हमारी मां थीं.' मेरी प्रिय बेटी तुम भी अपना जीवन इसी तरह से जियो.

कैसे 2008 के आखिरी महीनों में वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण हमारे सामने ऐसे हालात आ गए थे जब आईसीआईसीआई बैंक के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा था

मैंने अपनी मां से यह भी सीखा था कि कुछ भी हो जाए जिंदगी में आगे बढ़ते रहने के लिए यह बहुत जरूरी है कि कठिन हालातों से निपटने की क्षमता हो. आज भी मैं याद कर सकती हूं जब हमारे पिता जी का देहांत हो गया तो उन्होंने इस संकट का सामना कितनी धैर्य और शांति के साथ किया था. 

बजाए इसके कि तुम विपरीत हालातों में टूट जाओ, तुम्हें चुनौतियों से निपटना होगा और मजबूत बनकर सामने आना होगा.

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मुझे याद है कि कैसे 2008 के आखिरी महीनों में वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण हमारे सामने ऐसे हालात आ गए थे जब आईसीआईसीआई बैंक के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा था. 

इन हालातों का प्रमुख मीडिया मंचों द्वारा दूरंदेशी से आकलन किया गया और इसकी सार्वजनिक मंचों पर विस्तार से चर्चा की गई. मुझे काम करना था और सभी हिस्सेदारों से सिलसिलेवार ढंग से बात भी करनी थी. इनमें सबसे छोटे जमाकर्ता से लेकर प्रगतिशील निवेशक, नियामकों से लेकर सरकार तक शामिल थी. बैंक उस वक्त सही सलामत थी और इसकी संपत्ति में इन संस्थानों का हिस्सा काफी छोटा था. 

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मुझे उनकी चिंता समझ में आई क्योंकि उनमें से अधिकांश को यह डर था कि कहीं बैंक में जमा उनकी गाढ़ी कमाई जोखिम में न पड़ जाए. मैंने बैंक की तमाम शाखाओं के कर्मचारियों को सलाह दी कि जो भी जमाकर्ता अपने पैसे निकालने आएं उनकी बात सहानुभूतिपूर्ण ढंग से सुनें और समझाएं. 

साथ ही जमाकर्ताओं को सीट पर बैठकर इंतजार करने के दौरान पानी भी पिलाएं. और तब भी जमाकर्ताओं द्वारा कहे जाने पर उनकी रकम निकालने में स्वागत करें. हमारे कर्मचारियों ने उन्हें यह भी समझाया कि पैसे निकालने से उन्हें कोई फायदा नहीं पहुंचेगा क्योंकि हकीकत में मंदी के हालात हैं ही नहीं.

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इसी दौरान एक दिन मुझे तुम्हारे भाई के स्क्वॉश टूर्नामेंट में जाने के लिए कुछ घंटों की छुट्टी भी लेनी पड़ी. मुझे यह तब पता नहीं था कि उस टूर्नामेंट में मेरी मौजूदगी बैंक में ग्राहकों के विश्वास को पुर्नस्थापित करने में मदद करेगी. उस टूर्नामेंट में कई माताएं मेरे पास आईं और मुझसे पूछा कि क्या मैं ही आईसीआईसीआई बैंक की चंदा कोचर हूं. 

तुम्हारे पिता ने एक बार भी शिकायत नहीं की वर्ना आज जैसा मेरा करियर है उस तरह मैंने तरक्की नहीं की होती

जब मैंने उन्हें सकारात्मक उत्तर दिया तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं ऐसे संकट की स्थिति में भी टूर्नामेंट में आने का समय निकाल सकती हूं, इसका मतलब कि बैंक सुरक्षित हाथों में था और उन्हें अपने पैसों की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं थी.

मैंने अपनी मां से यह भी सीखा कि बिना किसी अंजाने डर के हालातों से सामंजस्य बनाना कितना महत्वपूर्ण है. अपने करियर के लिए कड़ी मेहनत करने के दौरान ही मुझे अपने परिवार को भी देखना पड़ता था. जरूरत होने पर अपनी मां और ससुराल पक्ष के सामने भी होना पड़ता था. 

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इसके बदले उन्होंने उदारता दिखाते हुए मेरे करियर को समर्थन और बिना शर्त प्रेम दिया. ध्यान रखो कि रिश्ते बहुत जरूरी होते हैं और इन्हें पालना-पोसना पड़ता है. हमेशा यह भी ध्यान रखो कि रिश्ते या संबंध दोतरफा रास्ते होते हैं, इसलिए किसी भी रिश्ते में जैसा आप दूसरे व्यक्ति से पाना चाहते हैं वैसा ही देने के लिए तैयार रहिए.

घर से बाहर बीतने वाले मेरे समय के बारे में तुम्हारे पिता ने एक बार भी शिकायत नहीं की वर्ना आज जैसा मेरा करियर है उस तरह मैंने तरक्की नहीं की होती. हम दोनों अपने करियर को लेकर बहुत व्यस्त थे लेकिन तुम्हारे पिता और मैंने हमारे रिश्तों की परवरिश ही ऐसे की थी. 

और मुझे पूरा विश्वास है कि जब वक्त आएगा तुम भी अपने जीवनसाथी के साथ ऐसा ही करोगी. अगर तुमने भी मेरे घर से बाहर रहने के दौरान शिकायत की होती और रोई-चिल्लाई होती तो अपने लिए ऐसा करियर बनाने के बारे में मेरा दिल पक्का नहीं हो पाता. 

मुझे एक बेहतर और सहायता करने वाला परिवार मिला और मैं पूरी उम्मीद करती हूं कि जब तुम अपना परिवार बनाओगी तो तुम भी इतनी ही भाग्यशाली रहोगी.

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मुझे वो दिन याद है जब तुम्हारी बोर्ड परीक्षाएं शुरू होनी थीं. तुमको मैं परीक्षा हॉल तक ले जा सकूं इसके लिए मैंने छुट्टी ली थी. जब तुम्हें इस बात का अहसास हुआ कि मैं आ रहीं हूं तब तुमने कहा था कि आप तो इतने सालों तक अकेले ही परीक्षा देने गई थीं. 

मुझे यह सुनकर बहुत बुरा लगा था लेकिन मैं भी कुछ अलग तरह से सोचती हूं कि एक कामकाजी मां होने के नाते मैंने तुम्हें काफी कम उम्र में ही आत्मनिर्भर छोड़ दिया था. तुम न सिर्फ आत्मनिर्भर हुईं बल्कि तुमने अपनी मां की भूमिका निभाते हुए अपने छोटे भाई का ख्याल भी रखा और उसे कभी भी मेरी कमी महसूस नहीं होने दी. 

मैं भाग्य में भरोसा रखती हूं लेकिन इसके साथ ही इस बात को भी मानती हूं कि कड़ी मेहनत और कर्मठता की हमारी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है

इससे तुम पर मेरा भरोसा बढ़ता गया और अब तुम एक खूबसूरत और आजाद युवती के रूप में बड़ी हो गई हो. अब मैं अपने कार्यक्षेत्र में भी इसी नियम का पालन करती हूं ताकि कम उम्र की प्रतिभा की बढ़ती तादाद भारी जिम्मेदारियां उठा सके.

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मैं भाग्य में भरोसा रखती हूं लेकिन इसके साथ ही इस बात को भी मानती हूं कि कड़ी मेहनत और कर्मठता की हमारी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है. बड़े मायनों में देखें तो हम सब अपनी किस्मत खुद लिखते हैं. अपनी किस्मत को अपने हाथों में लो, जो पाना चाहते हो उसका ख्वाब देखो और इसे अपने मुताबिक लिखो. 

मैं चाहती हूं कि तुम सफलता की सीढ़ियां एक एक करके चढ़ों. आसमान का लक्ष्य बनाओ लेकिन रास्ते के हर कदम का आनंद उठाते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ो. यह वो छोटे-छोटे कदम हैं जो तुम्हारी यात्रा को पूरा करेंगे.

जब तुम आगे बढ़ोगी तो तुम्हें कभी कठिन फैसले भी लेने पड़ेंगे, इन फैसलों पर दूसरे लोग मजाक-तिरस्कार भी कर सकते हैं. लेकिन जिस बात पर तुम्हें भरोसा है उसके साथ खड़ा होने के लिए तुम्हारे अंदर साहस होना चाहिए. 

सुनिश्चित करना कि तुम्हें जो सही लगता है उसे पूरा करने का तुममें दृढ़ विश्वास है और एक बार जब ठान लो तो फिर अपनी राह से भटकने के लिए किसी शंका को बलवान मत होने दो.

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आरती, एक दृढ़निश्चयी व्यक्ति क्या हासिल कर सकता है इसकी कोई सीमा नहीं है लेकिन अपने लक्ष्य को पाने में निष्पक्षता और ईमानदारी के उचित मूल्यों से समझौता मत करना. अपने सपनों को पूरा करने में कोई समझौता नहीं करना. 

यह याद रखना कि हमेशा अपने आसपास के लोगों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील रहो. और यह भी ध्यान रहे कि अगर तुम तनाव को खुद पर हावी होने का मौका नहीं देती, यह कभी भी तुम्हारी जिंदगी में मुद्दा नहीं बन पाएगा.

ध्यान रहे कि तुम्हारे जीवन में अच्छे और बुरे वक्त बराबर आएंगे और तुम्हें समभाव से ही दोनों स्थितियों से निपटना सीखना होगा. जीवन में मिलने वाले अवसरों से सर्वााधिक हासिल करना, साथ ही जिदंगी में आने वाले हर मौके और चुनौती से सीख भी लेना.

तुम्हारी प्यारी,

मम्मा

First published: 15 April 2016, 8:23 IST
 
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