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Father’s Day 2019 : पिता-पुत्र की वो जोड़ियां जिन्होंने टीम इंडिया को बनाया चैंपियन

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 June 2019, 16:44 IST

इफ्तिखार अली खान पटौदी और मंसूर अली खान पटौदी:

इफ्तिखार अली खान पटौदी इतिहास में एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने भारत और इंग्लैंड दोनों के लिए टेस्ट खेला है. पटौदी सीनियर ने एशेज के दौरान अपने पहले मैच में इंग्लैंड के लिए शतक बनाया था. इंग्लैंड के लिए तीन मैच खेलने के बाद उन्होंने भारत के लिए खेला. मंसूर पटौदी या टाइगर पटौदी ने 21 साल की उम्र में कप्तान बनने के बाद 40 टेस्ट मैचों में टीम इंडिया का नेतृत्व किया. भारत ने 1967 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट विदेशी धरती पर जीता, जो उनकी कप्तानी में था.

विजय मांजरेकर और संजय मांजरेकर:

विजय मांजरेकर तेज गेंदबाजों के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माने जाते थे. जिस दौर में भारत अच्छे बल्लेबाजों की कमी से जूझ रहा था उस वक्त 1952 में उन्होंने अपना पदार्पण किया. उन्होंने भारत के लिए 55 टेस्ट मैच खेले और 3208 रन बनाए जिसमें 2 शतक और 15 अर्द्धशतक शामिल हैं. जबकि संजय ने भारत के लिए 37 टेस्ट और 74 एकदिवसीय मैच खेले जिसमें उन्होंने 2043 और 1994 रन बनाए.

सुनील गावस्कर और रोहन गावस्कर

सुनील गावस्कर भी लिटिल मास्टर के रूप में जाने जाते हैं, जो 10,000 रन बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने, जिसमें 30 शतक शामिल हैं. गावस्कर को दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक माना जाता है, लिटिल मास्टर ने भारतीय टीम के लिए कई कीर्तिमान बनाये. हालांकि उनके बेटे रोहन गावस्कर के लिए उनके रास्ते पर चलना आसान नहीं रहा और वह कभी पिता के समान सफलता हासिल नहीं कर पाए. लेकिन बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 11 एकदिवसीय मैच खेले और एक अर्धशतक बनाने में सफल रहे.

योगराज सिंह और युवराज सिंह

यह पिता पुत्र की जोड़ी सामान्य से थोड़ी अलग मानी जाती है. बेटे युवराज ने अपने पिता की तुलना में एक बहुत ही सफल कैरियर हासिल किया. हालांकि योगराज ने भारत के लिए एक टेस्ट और छह एकदिवसीय मैच खेले. दूसरी ओर युवराज का शानदार करियर रहा क्योंकि वह दुनिया के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज माने जाते हैं. युवराज जिन्होंने स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में छह छक्के मारे, ने 2011 में भारत के लिए टी -20 विश्व कप और आईसीसी विश्व जिताने में सबसे अहम रोल अदा किया.

 

रोजर बिन्नी और स्टुअर्ट बिन्नी

रोजर के क्रिकेटिंग करियर का मुख्य आकर्षण 1983 के विश्व कप में खिताबी जीत थी. रोजर को सबसे बहुमुखी ऑल राउंडर के रूप में जाना गया जिन्होंने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी का तमगा हासिल किया. उन्होंने इस टूर्नामेंट में 18 विकेट अपने नाम किए थे. अपने पिता की तरह स्टुअर्ट भी एक ऑल राउंडर हैं. भले ही उन्होंने सिर्फ छह टेस्ट और चौदह वनडे मैच खेले हों, लेकिन उन्हें 2014 में बांग्लादेश के खिलाफ 6/4 के शानदार प्रदर्शन के लिए याद किया जाता है.

Father's Day 2019: बेटियां क्यों होती हैं पिता के लिए इतनी खास?

First published: 15 June 2019, 15:52 IST
 
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