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समलैंगिकों को अधिकार देने से चूका भारत

दुर्गा एम सेनगुप्ता | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • दुनिया में समलैंगिकों के लिए विवाह और बच्चा गोद लेने का कानून बन रहा है \r\nवहीं भारत में समलैंगिकों की बुनियादी जरूरतों की लड़ाई जारी है.
  • आयरलैंड सहित कई देशों में समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता मिल चुकी है. भारत में अब तक ऐसे किसी कानून की चर्चा भी नहीं है.

साल 2015 समलैंगिक कानूनों और एलजीबीटी (लेस्बियन, समलैंगिक, उभयलिंगी और ट्रांसजेंडर) समुदाय के लिए खासा महत्वपूर्ण रहा. भारत सहित पूरी दुनिया में समलैंगिक अधिकारों के लिए जोरदार प्रदर्शन हुआ.

भारत में कांग्रेसी सांसद शशि थरूर ने एलजीबीटी समुदाय का खुला समर्थन किया है और कहा है कि वो धारा 377 को खत्म किए जाने के पक्ष में हैं.

पिछले महीने शशि थरूर ने अपने ट्विटर अकांउट पर प्रकृति के खिलाफ सेक्स करने को अपराध मानने वाले कानून की धारा 377 को हटाए जाने की मांग की थी.

थरूर धारा 377 को हटाने के लिए संसद में प्राइवेट मेंबर बिल पेश कर चुके हैं जो बीजेपी सांसदों के विरोध के कारण पास नहीं हो सका. हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि इस बिल पर भी चर्चा की जाएगी.

संसद में केंद्रीय मंत्रियों द्वारा बिल का बहिष्कार करना एलजीबीटी समुदाय के प्रति उनकी सोच को दर्शाता है. हालांकि, भारत में अब कुछ लोग समलैंगिक अधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं.

भारत में मिली कानूनी मान्यता

दिसंबर 2015 में ओडिशा के 32 साल के एक सरकारी अफसर रतिकांता प्रधान ने खुद को ट्रांसजेंडर बताया. रतिकांता अब ऐश्वर्या रितुपर्णा प्रधान के नाम से जाने जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसजेंडरों को मान्यता मिलने के बाद रतिकांता ने यह फैसला लिया है. पिछले साल 15 अप्रैल 2014 को भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रांसजेंडरों को तीसरे लिंग के तौर पर मान्यता दी है.

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12 नवंबर को केरल सरकार ने अपनी ट्रांसजेंडर नीति जारी की है. 'स्टेट पॉलिसी फॉर ट्रांसजेंडर इन केरल 2015' नामक नीति में लैंगिक अल्पंसख्यक समूह को सामाजिक कलंक मानने की प्रवृति और उनसे होने वाले भेदभाव को खत्म करने पर केंद्रित है. वहीं तमिलनाडु राज्य में प्रीतिका याशनी का पहली ट्रांसजेंडर पुलिस इंस्पेक्टर बनने का रास्ता साफ हो गया है.

इस साल पश्चिम बंगाल का कृष्णनगर वुमेन्स कॉलेज सुर्खियों में रहा. इस कॉलेज को मानबी बंधोपाध्याय के रूप में पहला ट्रांसजेंडर प्रिंसिपल मिला. भारत में ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी ट्रांसजेंडर को कॉलेज का प्रिंसिपल बनाया गया. उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार ने ट्रांसजेंडर विकास बोर्ड का उपाध्यक्ष भी बनाया है.

प्रिंसिपल बनने के बाद 50 साल की मानबी ने पीटीआई से कहा, ''मैं इस पद पर अपनी योग्यता की बदौलत हूं. कॉलेज सर्विस कमीशन के द्वारा लिए गए इंटरव्यू को मैंने पास किया है. ''

भारत में अभी भी एलजीबीटी समुदाय के समर्थन के लिए छोटे-छोटे कदम उठाए जा रहे हैं जबकि दुनिया इनके अधिकारों के लिए बहुत आगे बढ़ गई है.

अमेरिका: समलैंगिक विवाह को मान्यता

26 जून 2015 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देते हुए कहा कि समलैंगिक लोग देश के सभी 50 राज्यों में विवाह कर सकते हैं.

कुछ दिनों पहले ही अमेरिकी फूड एंड ड्रग प्रशासन ने समलैंगिक पुरुषों के रक्‍तदान करने पर लगा 30 साल पुराना आजीवन प्रतिबंध हटा लिया है. नए नियमों के तहत आखिरी बार गे व्‍यक्‍ित के संबंध बनाने के 12 महीने के बाद वे रक्‍तदान कर सकेंगे.

आपको सुनने में बेतुका लग सकता है लेकिन यह नई शुरुआत है. जून माह में अमेरिकी ट्रांसजेंडर और ओलंपिक चैपिंयन ब्रूस जेनर का पहली बार औरत के रूप में सामने आई. ब्रूस जेनर से केटलिन जेनर बनी यह शख्सियत कार्दाशियां परिवार से है. जानी मानी रियलिटी टीवी स्टार किम कार्दाशियां ब्रूस जेनर की बेटी हैं. कार्दाशियां अपने पिता के नए रूप से बेहद खुश है.

आयरलैंड: समलैंगिकों के लिए बदला संविधान

आयरलैंड समलैंगिक शादी को मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश है. मई 2015 में आयरलैंड के लोगों ने समलैंगिक विवाहों को मान्यता देने के पक्ष में भारी मतदान किया. जनमत संग्रह में हिस्सा लेने वाले 62 प्रतिशत से अधिक लोगों ने देश के संविधान में बदलाव करके समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने के पक्ष में वोट दिया.

आयरलैंड की तरह ही स्लोवेनिया में भी इस मुद्दे पर जनमत संग्रह हुआ है. स्लोवेनिया ने इसी साल समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता दी है.

इटली: शादी को मिलेगी वैधता

यूरोपियन मानवाधिकार कोर्ट ने 21 जून 2015को दिए अपने आदेश में इटली में हो रहे लैंगिक भेदभाव को रोकने के लिए कहा था. इटली में समान सेक्स में विवाह करने की इजाजत नहीं है.

हालांकि, चार दिनों पहले ही इटली में समलैंगिक रिश्ते में रह रही एक महिला को कोर्ट ने कृत्रिम बच्चा गोद लेने की अनुमति दी है. उसकी महिला पार्टनर कृत्रिम तरीके से पैदा करेंगी. अब इटली सरकार एक कानून बनाने की तैयारी कर रही है जिसके बाद समलैंगिक शादियों की इजाजत मिल जाएगी.

छोटे नेपाल का दिल बड़ा

भारत में समलैंगिक विवाह को बेशक कोई कानून नहीं बन पाया है लेकिन पड़ोसी देश नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दे चुकी है. अगस्त महीनेे नेपाल में पहली बार किसी ट्रांसजेंडर महिला को पासपोर्ट दिया गया है.

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जहां दुनिया में समलैंगिकों के लिए विवाह और बच्चा गोद लेने का कानून बन रहा है वहीं भारत में समलैंगिकों की बुनियादी जरूरतों की लड़ाई जारी है.

First published: 26 December 2015, 11:27 IST
 
दुर्गा एम सेनगुप्ता @the_bongrel

संवाददाता, कैच न्यूज

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