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गुड़ी पड़वा 2018: इस बार त्यौहार में रहेगी कम मिठास, ये है वजह

सुहेल खान | Updated on: 18 March 2018, 10:29 IST

आज महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा का त्योहार मनाया जा रहा है. इस पर्व को महाराष्ट्र का नववर्ष भी मना जाता है. हर साल ये त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. लेकिन इस साल इस त्योहार का रंग फीका नजर आ रहा है. इसकी मुख्य वजह है आम की पैदावार में गिरावट. आमतौर पर ये माना जाता है कि गुड़ी पड़वा के त्योहार से ही आम का मौसम शुरु होता है.

महाराष्ट्र में हर साल मार्च के मध्य में बाजारों में आम की भरमार हो जाती है. गुड़ी पड़वा पर आम खरीदने के लिए लोगों भी भीड़ लगने लगती है. लेकिन इस साल ऐसा नहीं है. महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश की वजह से आम की फसल में गिरावट आई है. इस वजह से इस साल अप्रैल के दूसरे सप्ताह में बाजार में आम आने की उम्मीद जताई जा रही है. क्योंकि कोंकण के साथ-साथ कर्नाटक में आम की फसर में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है.

बेमौसम बारिश ने बर्बाद की आम की फसल

बता दें कि पिछले कुछ दिनों में बेमौसम हुई बारिश की वजह से महाराष्ट्र् और कर्नाटक में खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. महाराष्ट्र् के कोंकण क्षेत्र को आम की खेती का केंद्र माना जाता है. यहां हुई बेमौसम बारिश ने आम की फसल को बर्बाद कर दिया. कोंकण में आम बागानों में बेशकीमती अल्फांसों आम का भारी मात्रा में उत्पादन होता है. लेकिन आम की कम पैदावार की वजह से पुणे के थोक बाजार में आम की आवक में 70 फीसदी की गिरावट आई है.

आम की कम पैदावार से कीमतों में उछाल

स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक बाजार में आम की कम आवक की वजह से इनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. व्यापारियों का कहना है कि आम की कम आवक की वजह से वे इनकी कीमत बढ़ाने को मजबूर हैं. व्यापारी बताते हैं कि पिछले साल चार दर्जन आम का एक बॉक्स 1000 से 1500 रुपये में बिकता था, लेकिन इस साथ थोक में इस बॉक्स की कीमत 2500 रुपये है. वहीं रिटेल में इसकी कीमत 3500 रुपये से ऊपर पहुंच गई है.

इस साल 15 अप्रैल तक शुरु होगा आम का मौसम

व्यापारी बताते हैं कि इस साल पुणे में आम की मौसम 15 अप्रैल के बार ही शुरु हो पाएगा. आमतौर पर यहां फरवरी के आखिर और मार्च के शुरुआत में आम की आवक शुरु हो जाती है. लेकिन इस साल ऐसा नहीं हो सका. व्यापारिकों का कहना है कि हर साल यहां आम की मौसम 12 सप्ताह तक चलता है लेकिन इस साल इसके सिर्फ 9 सप्ताह तक ही चलने की उम्मीद है.

वहीं दूसरी और बेमौसम बारिश की वजह से कर्नाटक के किसान खुश हैं. क्योंकि बेमौसम बारिश की वजह से कर्नाटक में पैदा होने वाली फसल को गर्मी से राहत मिलेगी. जिससे अच्छी पैदावार का अनुमान लगाया जा रहा है.

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First published: 18 March 2018, 10:22 IST
 
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