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Gudi Padwa 2018: क्या है गुड़ी पड़वा पर्व का महत्व, कैसे की जाती है पूजा

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 March 2018, 15:38 IST

रविवार यानि 18 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरु होंगे. इसी दिन गुड़ी पड़वा का पर्व भी मनाया जाएगा. ये पर्व मुख्य रूप से महाराष्ट्र में मनाया जाता है. इस पर्व को हिन्दू नववर्ष या नव-सवंत्सर की शुरुआत के अवसर पर मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नए साल की शुरुआत होती है. साल के पहले दिन ही इस त्योहार को मनाने की परंपरा है.

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इस साल गुड़ी पड़वा का त्योहार 18 मार्च को चैत्र मास की शुक्‍ल प्रतिपदा की तिथि को मनाया जाएगा. 18 मार्च से ही चैत्र नवरात्रि और हिंदू नव वर्ष की भी शुरुआत हो रही है. धर्मशास्त्रों के मुताबिक सभी युगों में प्रथम सतयुग की शुरुआत भी इसी तिथि से हुई. पौराणिक कथाओं के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन आदिशक्ति प्रकट हुई थी.

क्यों मनाया जाता है गुड़ी पड़वा का त्योहार

गुड़ी पड़वा पर्व से जुड़ी कर्इ कथाएं हिन्दू धर्म में लोकप्रिय हैं. इनसे से एक कथा यह भी है कि इस दिन भगवान श्रीराम ने श्री लंका के शासक बाली पर विजय प्राप्त कर लोगों को उसके अत्याचारों और कुशासन से मुक्ति दिलार्इ थी. इसी खुशी में हर घर में गुड़ी यानि विजय पताका फहरार्इ जाती है. कुछ कहानियों को मुताबिक भगवान श्रीराम और महाराजा युधिष्‍ठिर का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ था. एक और कथा के मुताबिक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही पूर्व उज्जयनी नरेश महाराज विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रमणकारी शकों से भारत भूमि की रक्षा की आैर इसी दिन से कालगणना की शुरुआत हुई.

सृष्टि का प्रथम दिन भी माना जाता है गुड़ी पड़वा

कुछ कहानियों के मुताबिक गुड़ी पड़वा के दिन ही यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना का कार्य शुरू किया था. यही वजह है कि इसे सृष्टि का प्रथम दिन भी कहते हैं. इस दिन नवरात्र घटस्थापन, ध्वजारोहण, संवत्सर का पूजन इत्यादि किया जाता है. इसे हिंदू कैलेंडर का पहला दिन भी कहते है. सृष्टि के निर्माण का ये दिन हर भारतीय के लिए अहम दिन है. जिसमें हिंदू कलैंडर में बारह महीने क्रमशः चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन होते हैं.

गुड़ी पड़वा का क्या है पूजन मंत्र

प्रातः व्रत संकल्प
ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्रह्मणो वयसः परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे अमुकनामसंवत्सरे चैत्रशुक्ल प्रतिपदि अमुकवासरे अमुकगोत्रः अमुकनामाऽहं प्रारभमाणस्य नववर्षस्यास्य प्रथमदिवसे विश्वसृजः श्रीब्रह्मणः प्रसादाय व्रतं करिष्ये.

शोडषोपचार पूजा संकल्प
ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्रह्मणो वयसः परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे अमुकनामसंवत्सरे चैत्रशुक्ल प्रतिपदि अमुकवासरे अमुकगोत्रः अमुकनामाऽहं प्रारभमाणस्य नववर्षस्यास्य प्रथमदिवसे विश्वसृजो भगवतः श्रीब्रह्मणः षोडशोपचारैः पूजनं करिष्ये.

पूजा के बाद व्रत रखने वाले व्यक्ति करें इस मंत्र का जाप
ॐ चतुर्भिर्वदनैः वेदान् चतुरो भावयन् शुभान्.
ब्रह्मा मे जगतां स्रष्टा हृदये शाश्वतं वसेत्..

कैंसे करें गुड़ी पड़वा पर्व की शुरुआत

नव वर्ष फल श्रवण यानि नए साल का भविष्यफल जानना, तैल अभ्यंग यानि तैल से स्नान करें. निम्ब-पत्र प्राशन यानि कि नीम के पत्ते खाना, ध्वजारोपण करें, चैत्र नवरात्रि का आरंभ, घटस्थापना करें.

First published: 17 March 2018, 15:38 IST
 
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