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हम तो सुकून के लोग हैं, हमको सियासत से क्या मतलब: गुलाम अली

सौम्या शंकर | Updated on: 18 January 2016, 14:03 IST
QUICK PILL
मशहूर पाकिस्तानी ग़ज़ल गायक गुलाम अली देश में धर्मनिरपेक्षता और \r\nसांप्रदायिकता की लड़ाई में नए प्रतीक बन गए हैं. ज्यादातर गैर भाजपा शासित\r\n राज्यों में उन्हें बुलाकर सम्मानित करने की होड़ है. पिछले साल शिवसेना \r\nके हुड़दंग के कारण मुंबई में उनका शो रद्द कर दिया गया था. तब गुलाम अली \r\nने कहा था जब तस हालात नहीं सुधरते वो भारत नहीं आएंगे.कुछ दिन पहले \r\nस्वामी विवेकानंद के 153वें जन्मदिन के मौके पर अली ने कोलकाता में 25,000 \r\nलोगों की मौजूदगी में शो किया. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनका \r\nसम्मान करते हुए कहा कि यह रवींद्रनाथ टैगोर, परमहंस रामकृष्ण, विवेकानंद \r\nऔर नेतीजी सुभाष चंद्र बोस की धरती है. यहां आपका हमेशा स्वागत है.यह \r\nआयोजन पठानकोट में हुए आतंकवादी हमले और माल्दा में हुई सांप्रदायिक हिंसा \r\nके दौरान ही हुआ, लिहाजा इस बात की आशंका जतायी जा रही थी कि आयोजन में खलल\r\n पड़ सकता है.इसके कुछ दिनों बाद ही केरल की राजधानी तिरुअनंनतपुरम\r\n में भी गुलाम अली का कार्यक्रम हुआ. यहां राज्य के मुख्यमंत्री ओमान चांडी\r\n ने आयोजन की अध्यक्षता की और गुलाम अली का सम्मान किया. अब खबर है कि अगल \r\nमहीने गुलाम अली एक और गैर भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ\r\n में शो करेंगे. इसी माहौल में कैच संवाददाता सौम्या शंकर ने गुलाम अली से विस्तार से बातचीत की:

शिवसेना लगातार पाकिस्तानी कलाकारों के भारत आने का विरोध करती रही है. केरल और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य हैं जहां दक्षिणपंथ का विरोध बहुत मज़बूत रहा है. ऐसे में इन दोनों राज्यों से न्योता मिलना सिर्फ संयोग है या फिर यहां आने की योजना पहले से थी?

मेरी यहां आने की कोई योजना नहीं थी. केरल के मुख्यमंत्री साहब ने मुझे बेहद मोहब्बत से बुलाया. उन्होंने कहा कि आपका आना बहुत ज़रूरी है. हम चाहते हैं कि आप यहां आएं और हम आपकी खिदमत कर पाएं. इसलिए मैं चला आया. पूरी दुनिया में मोहब्बत करने वाले बहुत लोग हैं. लोग जब इतनी मोहब्बत से बुलाते हैं तो आप उसे कब तक टाल सकते हैं. लिहाज़ा मुझे यहां आना पड़ा.

शिवसेना ने पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तानी कलाकारों के खिलफ एक बार फिर से बयान जारी किया है. इस पर आपकी क्या राय है?

देखिए, वो भी मोहब्बत करने वाले लोग हैं. लेकिन अक्सर कुछ चीज़ें ऐसी हो जाया करती हैं जिनसे लोगों की नाराज़गी बढ़ जाती है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो मुझे प्यार नहीं करते या मैं उनका ऐहतराम नहीं करता. मुझे कोई बुलाता है तो मैं सिर्फ मोहब्बत के नाते चला जाता हूं.

केरल में मलयालम बोली जाती है. यह भाषा हिंदी और उर्दू से एकदम अलहदा है. आपको लगता है कि वहां गज़ल को लोग स्वीकार करेंगे?

अभी यहां पर सीएम साहब ने मुझे अवॉर्ड दिया. वो हमारे संगीत को पसंद करते हैं. उन्होंने खुद कहा कि मौसिकी की कोई ज़ुबान नहीं होती है और मैं खुद आपका चाहने वाला हूं.

घर वापसी नाम की एक फिल्म है. कहा जा रहा है कि आपने उसमें एक गाना गाया है, क्या ये बात सच है?

सोहेब इलियासी भाई हमारे अजीज़ हैं. उन्होंने कहा था. खां साहब आप गाएंगे तो अच्छा लगेगा. उनके कहने पर मैंने अपनी आवाज़ दी है.

क्या आप जाएंगे मुंबई?

अभी तो कुछ तय नहीं किया है. इंशा अल्लाह, अगर वहां का माहौल अच्छा रहा और सारी चीज़ें सुकून में रहीं तो यकीनन मैं ज़रूर शिरकत करूंगा.

'चुपके... चुपके' के बाद लंबे वक्त तक आपने बॉलीवुड के लिए गीत नहीं गाया. क्या 'घर वापसी' से बॉलीवुड में आप वापसी कर रहे हैं?

नहीं इससे पहले भी अनिल कपूर साहब की फिल्म बेवफा में मैंने ‘याद तेरी आती है’ ग़ज़ल गाई थी जो बहुत मकबूल हुई थी. मैंने काफी अरसे से फिल्मों में गाना बंद कर दिया है. मुझे ज़्यादा मज़ा आता है जब सामने मेरे सुनने वाले बैठे हों. सुनने वालों की आंखों मे चमक देखकर मुझे गाने में ज़्यादा मज़ा आता है बनिस्बत इसके कि मैं स्टूडियो में गाऊं.

क्या आपको फिल्म में गाने से पहले मालूम था कि घर वापसी पर हिंदुस्तान में पिछले एक साल से सियासत चल रही है?

हां, मुझे बताया गया था. लेकिन हम कलाकार लोग हैं. पिछले साल ही हमें बनारस के संकटमोचन मंदिर के महंत विश्वंभरनाथ जी ने बुलाया था. मैं वहां गया था. मुझे बहुत खुशी हुई इतने बड़े मंदिर में हज़ारों लोगों ने मुझे सुना. ये इतिहास में पहली बार था जब वहां ग़ज़ल का कार्यक्रम हुआ. वहां कई दिग्गज कलाकार शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम पेश कर चुके हैं. मुझे वहां बहुत सराहा गया. कलाकार तो सभी का होता है.

मुझे चाहने वाले हिंदुस्तान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अमेरिका. ना जाने कहां कहां है. मेरा मानना है कि पूरी कायनात अल्लाह की बनाई हुई है. हमारी इबादत के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन इंसान अल्लाह ने एक ही बनाया है. धर्म, मुल्क या जाति के आधार पर इंसान को बांटना छोटी सोच है. अल्लाह ने कोई तरफदारी नहीं की है. जब बनाने वाला भेदभाव नहीं कर रहा तो हम क्यों कर रहे हैं?

कोक स्टूडियो जैसा प्रयोग बेहद सफल रहा है. हम आपको कोक स्टूडियो में कब देखेंगे?

वो भी एक टीवी कार्यक्रम है. उसमें ऐसे मज़ा नहीं आ पाता जितना आवाम सामने बैठी हो. अभी तो फिलहाल मेरा कोई इरादा नहीं है. लेकिन अगर होगा तो देखेंगे.

हिंदुस्तान में कला को सियासत से जोड़ा जा रहा है. अभी भी आपके स्वागत में केरल के सीपीएम पोलित ब्यूरो सदस्य ने कहा ये असहिष्णुता के प्रति हमारा संदेश है. पहले जब हिंदुस्तान आते थे..और अभी में कोई बदलाव है?

पहले भी वही मोहब्बत मिलती थी. अब भी वही मोहब्बत मिलती है. जहां तक शिवसेना का सवाल है. उसमें भी बहुत मोहब्बत करने वाले हैं. लेकिन कभी घर-परिवार में नाराज़गी आ जाती है. बस इस बिना पर आप ये नहीं कह सकते कि वो बुरे लोग हैं. अल्लाह सबको मोहब्बत से रहने की तौफ़ीक दे. खुश रहने की वजहें कम होती जा रही हैं आज के वक्त  में. आप नफरत कब तक रखेंगे.

आपने 2008 में मुंबई हमले के बाद कहा था कि अब भारत में आपके संगीत का लुत्फ कौन उठाएगा. पठानकोट हमले के बाद आपकी ऐसी प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई? क्या आपको ये मुद्दा बड़ा नहीं लगा?

जब कोई पराया मरता है तो तकलीफ़ होती है. जिसका अपना मरता है उसकी तकलीफ़ ज़्यादा होती है. लेकिन ऐसा नहीं है कि हमें तकलीफ़ नहीं होती. हम भी चाहते हैं कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान समेत पूरी कायनात में अमन रहे. अभी आपने सियासत और संगीत की बात की. हम संगीत की बात बार-बार करते हैं क्योंकि इससे सुकून मिलता है. वो सुकून मेरे जगजीत भाई या रफी साहब या किसी के रिकॉर्ड सुनकर आ सकता है.

हम तो सुकून को लोग हैं. हमारा सियासत से कोई मतलब नहीं. सियासत में कोई खराबी नहीं है. पाकिस्तान में भी बम फट जाते हैं. कहीं पर भी कोई भी शख्स मरे, अगर आपके अंदर दिल धड़क रहा है तो आपको तकलीफ ज़रुर होगी. और अगर आपको तकलीफ नहीं हो रही है तो इसका मतलब आप संगदिल हो. हमारा तो काम ही है कि लोगों के जज्बात हरे रखें. आज परिवारों में भी मोहब्बत कम हो रही है और हम मुल्क की बात करते हैं.

आपने कोलकाता में कहा कि आपको लग रहा है कि आप वहां पचास साल बाद गए हैं. आपको ऐसा क्यों लगा? क्या वो शहर इतना बदल गया है?

कोलकाता में मेरे बहुत अजीज़ लोग हैं. चाहने वाले हैं. अच्छे अच्छे कलाकार हैं..जिनसे मेरे अच्छे ताल्लुकात हैं. वहां की अवाम मुझसे बहुत मोहब्बत करती है. लेकिन 20-25 हज़ार लोग वहां इकट्ठा हुए थे. जबकि लोग कहते हैं कि जमाने में नाराज़गी बढ़ रही है. पहले मेरा प्रोग्राम सुनने के लिए पांच-सात हज़ार लोग आते थे. अब चालीस हज़ार आ रहे हैं तो मैं तो ये मान रहा हूं कि लोगों में मोहब्बत और बढ़ गई है. अभी मैं तिरुअनंतपुरम आया हूं. 17 तारीख़ को कालीकट में मेरा कार्यक्रम है.

सात फरवरी को लखनऊ महोत्सव में कार्यक्रम के लिए अखिलेश यादव ने मुझे न्योता दिया है. खुद फोन किया उन्होंने. अखिलेश जी ने बहुत प्यार से कहा कि हमारे वालिद साहब आपके फैन हैं. आपके आने से महोत्सव की शान और बढ़ जाएगी. उन्होंने इतनी मोहब्बत से बुलाया कि मुझे हां कहना पड़ा.

तो आप सात फरवरी को लखनऊ जाएंगे?

जी, मैं ज़रुर अपनी गज़लों का तोहफा लेकर लखनऊ पहुंचुंगा.

सिर्फ मुलायम सिंह ही नहीं, पूरा देश आपका फैन है. पिछले साल शिवसेना के हुड़दंग के कारण आपका कन्सर्ट कैंसल करना पड़ा था. तब आपने कहा था कि माहौल ठीक होने तक हिंदुस्तान नहीं आऊंगा. आपको क्या लग रहा है कि अब माहौल ठीक हो रहा है?

मैं क्या कहूं. मुझे तो आज तक समझ नहीं आया कि लोग क्यों नाराज़ हो जाते हैं. अल्लाह लोगों को प्यार से रहने की तौफीक दे. अभी पिछले साल मैं मोदी साहब से मिला. वो इतनी मोहब्बत से मुझसे मिले. उन्होंने बहुत अच्छे से मेरी मेहमाननवाज़ी की, इज्ज़तअफज़ाही की.

मैं तो खुद उनका मशगूल हूं कि उन्होंने मुझे इस लायक समझा. जब भी यहां आता हूं इतनी मोहब्बत मिलती है. अगर एक दो महीने नहीं आता तो इतने फोन आने शुरू हो जाते हैं. कई बार मैं ज़ेहनी तौर पर परेशान हो जाता हूं कि लोग बुला भी रहे हैं और खफा भी हैं. .क्या करूं. बस यही दुआ करता हूं जो नाराज़ हैं अल्लाह उनके दिलों में प्यार और मोहब्बत जगा दे. दोनों मुल्क प्यार मोहब्बत से रहे.

दोनों देशों में संगीत की साझी विरासत है. गज़ल दक्षिण एशिया की देन है. दोनों देशों की अवाम को आपका क्या पैगाम है?

मैं इतना बड़ा कलाकार नहीं हूं कि किसी को कोई पैगाम दे पाऊं. मेरी कोशिश रही है कि लोग सुर में रहें और खुश रहें.

First published: 18 January 2016, 14:03 IST
 
सौम्या शंकर @shankarmya

A correspondent with Catch, Soumya covers politics, social issues, education, art, culture and cinema. A lamenter and celebrator of the human condition, she hopes to live long enough to witness the next big leap in human evolution or the ultimate alien takeover of the world.

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