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हनुमान जयंती: हनुमान चालीसा में छिपे रहस्य की नासा भी कर चुका है पुष्टि

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 April 2017, 9:57 IST
Hanuman

हर तरफ हनुमान के जन्मोत्सव की तैयारियां चल रही हैं. मंदिर सजावट से जगमग हो चुके हैं. भक्त, मारुति नंदन के स्वागत और वंदन के लिए तैयार हैं. इस बार का पूजन भी सामान्य नहीं है.

पंचांग के जानकार बताते हैं कि 11 अप्रैल को पूर्णिमा के साथ मंगलवार और चित्रा नक्षत्र का संयोग गजकेशरी योग बना रहा है. ऐसा ही संयोग त्रेता युग में बना था. इस संयोग को शुभदायक माना जा रहा है. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि अनूठे संयोग पर रामभक्त हनुमान का पूजन मंगलकारी और सर्वसुखकारी रहेगा. 

गजकेसरी व अमृत योग:
ज्योतिषाचार्य पंडित अजय दुबे व पंडित जर्नादन शुक्ल के अनुसार हनुमान जन्मोत्सव पर इस बार त्रेता युग जैसा संयोग बन रहा है. इस दिन मंगलवार, पूर्णिमा तिथि, चित्रा नक्षत्र रहेगा. खास बात यह है शास्त्रों में हनुमानजी के जन्म के समय यही संयोग बताए गए हैं. इस दिन गजकेसरी योग और अमृत योग भी बन रहा है

ऐसे करें पूजन:
पंचांग विद् पं. दिनेश गर्ग का कहना है कि हनुमानजी को राम का नाम लेने वाले लोग परम प्रिय हैं. पूर्णिमा पर प्रात: स्नान के बाद राम नाम का जाप करना चाहिए. जाप के साथ यदि सुंदरकांड का पाठ किया जाए तो और भी उत्तम है. इस दिन जाप व मानस की चौपाइयों के पाठ के बाद हनुमानजी के किसी भी प्रतिष्ठित मंदिर में जाकर पूजन, वंदन करें. यदि आपकी क्षमता हो तो हनुमानजी को चमेली का तेल, सिंदूर और चोला अर्पित करें.

शनि व अन्य अमंगल ग्रहों की दशा से पीडि़त जन श्वेतार्क की माला हनुमानजी को पहनाएं. या फिर आक यानी श्वतार्क के 108 पत्तों पर राम का नाम लिखकर उसकी माला बनाएं. यही माला बजरंग बली को अर्पित कर दें. राम रक्षा स्त्रोत, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या हनुमानाष्टक और हनुमानबाहुक के स्त्रोतों का पाठ करें. यह करने से कोई भी बाधा टिक नहीं पाएगी. ऐसा शास्त्रों में प्रमाण है.

हनुमान चालीसा में छिपे रहस्य की नासा ने की पुष्टि

जैसे-जैसे विज्ञान तरक्की करता जा रहा है, हिंदू धर्म ग्रंथों में लिखी गई कई बातें सही साबित होती जा रही हैं. ये प्रमाणित करता है कि भारतीय संस्कृति दुनिया को हजारों साल पहले ही ब्रह्मांड के बारे में ज्ञान दे चुकी थी.

आज से हजारों साल पहले हनुमान चालीसा ने एक श्लोक में धरती और सूर्य की दूरी के बारे में बताया गया था. उस वक्त न तो दूरबीन हुआ करती थी और न ही दूरी नापने के लिए आज की तरह के उन्नत यंत्र हुआ करते थे. बावजूद इसके जो लिखा गया वह अक्षरशः सही निकला.

हनुमान चालीसा में एक प्रसंग है, जब हनुमान जी ने सूर्य की लालिमा को देखकर सोचा कि वह कोई मीठा फल है. उसे खाने के लिए आतुर होकर वह धरती से अंतरिक्ष की ओर चले. वहां पहुंचकर उन्होंने सूर्य देव को अपने मुंह में रख लिया था

इसी संबंध में हनुमान चालीसा में लिखा गया है- 'जुग सहस्त्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू.' जानते हैं इसके अर्थ के बारे मेंएक युग यानी 12000, सहस्त्र यानी 1000, एक योजन यानी आठ मील. और एक मील में 1.6 किमी होते हैं. यदि इन सभी आंकड़ों का गुणा करें, तो कुल नौ करोड़ 60 लाख मील आते हैं. इसे किमी बनाने के लिए 1.6 का गुणा करने पर एक अरब 53 करोड़ 60 लाख किमी होते हैंयह उतनी ही दूरी है, जितनी नासा ने अपनी गणना (152 मिलियन किमी) के बाद सूर्य और धरती के बीच की बताई है. यह कहीं न कहीं साबित करता है कि सनातन धर्म में कही गई बातें विज्ञान पर आधारित हैं.

First published: 11 April 2017, 9:42 IST
 
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