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हिंदी दिवस 2018: 14 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस?

सुहेल खान | Updated on: 13 September 2018, 13:19 IST

14 सितंबर के दिन को पूरा देश 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाता है. वो हिंदी जिसे हम और आप बचपन से सुनते, बोलते, पढ़ते और लिखते चले आए हैं. इसीलिए हिंदी भाषा को आज पूरा विश्व भारत की राजभाषा के रूप में जानता है. वो बात अलग है कि आज भी ज्यादातर हिंदुस्तानी हिंदी की बजाए अंग्रेजी में बात करने वाले, अंग्रेजी पढ़ने-लिखने वालों को पसंद करते हैं.

बावजूद इसके हिंदी आज भी हमारी राजभाषा हैहिंदी दिवस के मौके पर आज हम आपको 'हिंदी दिवस' मनाने के इतिहास के बारे में बताएंगे, कि आखिर हिंदी दिवस को हम 14 सितंबर को ही क्यों मनाते हैं और किसी दिन क्यों नहीं.

दरअसल, 15अगस्त 1947 को जब देश अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हुआ तो देश के सामने भाषा को लेकर सबसे बड़ा सवाल था. क्योंकि भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती थीं और आज भी बोली जाती हैं. आजादी से पहले 6 दिसंबर 1946 में आजाद भारत का संविधान तैयार करने के लिए संविधान का गठन हुआ.

उसके बाद आजाद भारत में संविधान सभा ने संविधान के अंतिम प्रारूप को मंजूरी दे दी गई. 26 नवंबर 1949 को संविधान के अंतिम प्रारूप को मंजूरी मिलने के बाद आजाद भारत में अपना संविधान 26 जनवरी 1950 से पूरे देश में लागू हो गयाहालांकि भाषा को लेकर अब भी चिंता बनी हुई थी, क्योंकि हजारों बोली और भाषाओं में से किसी एक भाषा को राजभाषा का दर्जा देना था. जो देश में संविधान लागू होने तक नहीं हुआ था.

भारत की कौन सी राष्ट्रभाषा चुनी जाएगी ये मुद्दा काफी अहम था. काफी सोच विचार के बाद हिंदी और अंग्रेजी को नए राष्ट्र की भाषा चुना गया. संविधान सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हिंदी को अंग्रेजों के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था. उसके बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि, हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी.

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि इस दिन के महत्व को देखते हुए हर साल 14 सितंबर को 'हिंदी दिवस' मनाया जाए. हालांकि आजाद भारत में पहला 'हिंदी दिवस' 14 सितंबर 1953 में मनाया गया. तब से लेकर आज तक हर साल 14 सितंबर को हम हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं.

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First published: 13 September 2018, 13:14 IST
 
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