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मैं कामयाब हूं, क्या यही वजह है कि तुम्हें हमसे नफरत है: चेतन भगत

लमट र हसन | Updated on: 3 November 2016, 7:52 IST
(Chetan)
QUICK PILL
  • चेतन भगत देश के ऐसे बेस्ट सेलिंग अंग्रेजी लेखक हैं जो किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं हैं. मगर साहित्य जगत उन्हें सबसे ज्यादा नापसन्द भी किया जाता है. 
  • पिछले 12 सालों में वह सात किताबें बाज़ार में उतार चुके हैं. उनकी किताबें लाखों की संख्या में बिकती हैं. उनके प्रकाशक \'रूपा\' ने उन्हें उस वक्त ब्रेक दिया था जब अन्य प्रकाशकों ने 25 बार उनकी पाण्डुलिपि खारिज कर दी थी. 
  • चेतन के अमेरिकी बॉस गोल्डमैन सैशेज ने उन्हें बार-बार कहा था, \'तुम किसी चीज के लिए ठीक नहीं हो\'. 

बेस्ट सेलर लेखक चेतन भगत की नई किताब बाज़ार में है. रिकॉर्डधारी चेतन की लोकप्रियता उनके आलोचकों के लिए जवाब है. उन्हें फेसबुक पर फॉलो करने वालों की संख्या 70 लाख है जबकि ट्विटर पर फॉलोवर्स की संख्या 80 लाख है. उनकी ज़्यादातर किताबों पर बॉलीवुड फिल्में बना चुका है. बॉलिवुड ने करोड़ों रुपयों का कारोबार उनकी कहानियों से किया है. 

टाइम मैगजीन ने उन्हें साल 2010 में 100 सर्वाधिक प्रभावशाली हस्तियों की लिस्ट में जगह दी थी. उनके खाते में सबसे बड़ी बात यह है कि उनके चाहने वाले छोटे कस्बों में बसते हैं. उनमें भी ज़्यादातर ऐसे जो यह अंतर नहीं कर सकते कि अच्छा और बुरा लेखन क्या है. उनकी किताबें ब्रेल लिपि, ऑडियो और क्षेत्रीय भाषाओं में भी मौजूद हैं.

चेतन भगत की लेटेस्ट किताब 'वन इंडियन गर्ल' है जिसे लेकर उनका मजाक बनाया जा रहा है और लोग इस किताब को लेकर कई तरह की पिक्चर्स पोस्ट कर रहे हैं. अपने इस उपन्यास में चेतन ने महिलाओं के नजरिए से दुनिया को देखने की कोशिश की है. यह नॉवेल एक महिला के इर्द-गिर्द घूमती कहानी पर आधारित है. क्योंकि वह नारी-आन्दोलन पर प्रहार कर रहे होते हैं. अधिकांश नारीवादी उनके नारीवाद से सहमत नहीं हैं.

उनके आलोचक उन्हें साहित्य का स्तर कम करने का दोषी ठहराते हैं. अब वे उन पर आरोप लगा रहे हैं कि वे अपनी 'चेतनीज' को सीधे-साधे और नासमझ पाठकों के लिए 'पतंजलि इंगलिश' में ला रहे हैं. उनके उपन्यास की दो तस्वीरें वायरल हो गईं हैं. इस बात की अटकलें हैं कि कंगना रानौत, जिन्होंने मुंबई में उनके इस उपन्यास को रिलीज किया है, बड़े पर्दे पर आने वाली

फिल्म 'वन इंडियन गर्ल' में लीड रोल निभाएंगी.

अपने साक्षात्कार में चेतन भगत कैच न्यूज से हर मुद्दे पर बोले कि वह इतनी नफरत से कैसे निपटे. जब हर जगह, हर वक्त, हर किताब और फिल्म पर उन पर हमले होते रहे. यहां तक कि ट्विटर, फेसबुक, टीवी रूम्स, प्रेस से मुलाकात वगैरह हर जगह. 

भगत की पहली किताब इंडिया इंटरनेशनल सेन्टर में रिलीज़ हुई थी. उनकी सातवीं किताब भी यहीं रिलीज़ हुई है. और यह

वह जगह है, चाहे आप इस पर यक़ीन करें या ना करें, जहां उन्होंने अपना सबसे ज्यादा लेखन का काम किया है.

भगत बडोदरा में खतरनाक लांचिंग के बाद दिल्ली में आए थे. लोगों को यह देखकर काफी हैरानी हुई कि जो व्यक्ति इतने प्रेम से झगड़ों पर काबू पाता हो, ट्वीटर पर मजाक उड़ाने वालों से बड़ी मोहब्बत से पार पाता हो, नौकरों से विन्रम हो और वह सबको 'सर' कहकर सम्बोधित कर रहा है. पेश है, उनसे हुई बातचीत का एक हिस्सा. 

चेतन भगत से बातचीत

लमत आर हसन: आप लोगों की इतनी नफरत से कैसे निपटते हैं?

चेतन भगत: मुझे लगता है कि मैं बाकी लोगो की बजाय ऐसी नफरत से ज़्यादा बेहतर तरीक़े से निपट सकता हूं. वैसे भी ज्यादा नफरत नहीं है.

लमत आर हसन:  हमने देखा है कि आपका ट्वीटर पर कितना मजाक उड़ाया जा रहा है...

चेतन भगत: मुझे यह कहते हुए बड़ा अफसोस है कि पत्रकारिता आज बहुत सुस्त हो गई है. मैंने ढेर सरे फीडबैक लिए हैं. और पत्रकारिता को इस फीडबैक से सीख लेने की जररूत है कि पत्रकारिता सिर्फ मजाक और लोगों के ट्वीट्स तक ही सीमित नहीं है. मजाक उड़ाने वालों को हमें गौरवान्वित करने की जरूरत नहीं है. मुझे मालुम है कि मैं क्या कर रहा हूं. और मैं विश्वास से भरपूर होकर कर रहा हूं. किताब काफी मेहनत के बाद लिखी गई है और अब इस पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

लमत आर हसन: क्या इससे परेशानी होती है?

चेतन भगत: जो परेशानी या ठेस पहुंचती है, उसे मैं महसूस नहीं करता. निराशा का भाव जरूर आता है.

लमत आर हसन:  क्या आपने कभी अपने राइटिंग करियर में आंतरिक पीड़ा को महसूस किया है?

चेतन भगत: मुझे यह सब पांच-सात साल पहले महसूस होता था. समय घावों को भर देता है. (हंसते हुए). आपको भी इसकी आदत पड़ जाएगी.

लमत आर हसन: आप इतने अप्रभावित कैसे रह लेते हैं? क्या आप योगा करते हैं?

चेतन भगत: आपको यह सब करने की जरूरत नहीं है. आप जो कर रहे हैं, उसके प्रति ईमानदार होने की जरूरत है. मैं अपने देश के लिए लिख रहा हूं. साहित्य में तो आश्चर्यजनक रूप से अभिजात्यवाद है. आश्चर्यजनक. भारत में साहित्य ऊंचाई वाले टावर जैसा है जहां कुछ लोग ही तय करते हैं कि कौन-सा साहित्य अच्छा है और कौन सा बुरा.

वे तो यह भी नहीं समझते कि साहित्य क्या है, जो समाज तक पहुंच रहा है. जो समाज को आइना दिखाने का काम कर रहा है. कौन सा समाज? हमारा समाज, ठीक? और क्या यह वह समाज है जो पढ़े-लिखे सभ्य लोगों द्वारा तय किया जाता है जिस तरह से यूनाइटेड किंगडम में किया जाता है?

और यह वही काम है जो मेरी किताब कर रही है. एक बार अगर किताब बिक जाए, जो आधुनिक इतिहास की नहीं है, झूठे सच की नहीं है, बस, एक बार अगर यह लोगों को जोड़ दे तो समझ लो उसने अपना काम कर दिया.

यह निराशाजनक है जब कोई इसे अभिजात वर्ग का प्रलाप बताता है और तब वे महिलावादी होने का दावा करते हैं. और न तो वे साहित्य को, न भारत को, न नारीवाद को और न ही भारतीय महिलावाद को समझते हैं. वे तो अपने विचारों में ही खोए हुए हैं और कुछ भी नहीं देख पा रहे हैं और रिव्यूज में निश्चित रूप से इसे देखा जा सकता है. और ऐसे लोग समीक्षा भी नहीं करते. 

एक रिव्यू में कहा गया था कि यह मेरी किताब का सबसे 'अश्लील रिव्यू' है. उनमें से कुछ लोगों ने किताब पढ़ी भी नहीं है. उन्होंने सीधे ही पात्रों के चरित्रों के बारे में लिखना शुरू कर दिया. ऐसा इसलिए कि वे बहुत ऊंचाई पर पहुंचने के लिए बेताब थे. 

जोश और आवेश में आकर रिव्यू के चलते मेरी किताब 10 प्रतियों से ज्यादा नहीं बिकेगी और खराब रिव्यू बिक्री को 10 प्रतियों से ज्यादा घटा भी नहीं पाएगी. ऐसे में उनकी क्या साख बचती है? उनकी इस नफरत का कारण क्या है? मुझे आम आदमी पढ़ते हैं. मैं कामयाब हूं. क्या आपकी खुली मानसिकता है कि क्या ये सभी किताबें पढ़ने से आपने कुछ सीखा?

और यहां आगे बढ़ने का मौका है नारीवाद को समझने का, जिसे गलत तरीके से समझा गया है. जब मैं एक किताब पर शोध कार्य कर रहा था तो मुझे कई लड़कियों ने बताया कि मैं आपको बता रही हूं कि मैं महिलावादी किस्म की नहीं हूं. एक छोटे से वर्ग ने महिलावादी बिग्रेड को अपने वश में कर लिया है. यह वर्ग धीरे-धीरे अपने विचार उन पर थोप रहा है और जिसे अन्य भारतीय लड़कियों ने इसे अपना समर्थन नहीं दिया है.

लेकिन, वे 'वन इंडियन गर्ल' पढ़ रहे हैं. वे फेसबुक पर कह रहे हैं कि उन्होंने खुद को किताब से जोड़ लिया है और यह ठीक वही परेशानी है जिसे वे झेल रहे हैं. मेरे पास एक शीशा है. आप इस शीशे को कभी तोड़ नहीं सकते क्योंकि आपको वह बिल्कुल पसन्द नहीं है जो आप देखते हैं. 

हो सकता है कि आप अपने महिलावाद को देखना चाहते हों जो आपने न्यू यॉर्क टाइम्स में हर भारतीय लड़की के बारे में पढ़ा हो लेकिन वह वहां नहीं है. मेरे जैसे एक लेखक के लिए, जो भारत को जोड़ना चाहता है, उसने खोज निकाला है. अब अगर आप उस पर ध्यान न दें, पर नफरत भरा रिव्यू लिखा शुरू कर दें तो आप एक मौका गवां देंगे.

मैं आगे बढ़ता रहूंगा. मैं अपनी किताबें बेचता रहूंगा, मैं अपनी फिल्में बनाता रहूंगा. मैं अपने प्वाइंट बढ़ाता जाऊंगा और मुझे पक्का भरोसा है कि काफी संख्या में लड़कियां महिलावाद को समझेंगी और वे लम्बे समय तक यह कहने से खुद को दूर नहीं रख सकेंगी कि मैं महिलावादी हूं. 

आलोचकों के विचारों में से एक का विचार है कि उपन्यास का लीड पात्र पर्याप्त रूप से काफी मजबूत क्यों नहीं है. पहली बात तो यह है कि मैं पात्र को लेकर वहीं लिख सकता हूं जो मैं चाहता हूं. आप एक लेखक से अपनी मर्जी का लिखवाने को नहीं कह सकते. महिलावाद को सर्वकालिक रूप से मजबूत नहीं बनाया जा रहा है.

लमत आर हसन: क्या आप किताब लिखने के पहले नारीवाद पर लिखी गई ढेर सारी सामग्री पढ़ते हैं?

चेतन भगत: मैं पढ़ता हूं जो मुझे पढ़ना चाहिए. मैंने काफी महिलाओं से बात की है. मैंने यह बात समझने की कोशिश की है कि महिलावाद क्या है. महिलावाद का कतई यह मतलब नहीं है कि महिला हर समय मजबूत बनी रहे. एक महिला को उस समय दुखी नहीं होना चाहिए जब वह ब्रेकअप में हो.

महिलावाद का यह भी अर्थ नहीं है कि एक महिला को पुरुष की जरूरत ही नहीं है. महिलावाद का मतलब सिर्फ समान अधिकार नहीं है. महिलावाद का अर्थ यह है कि उसे आगे बढ़ने के लिए मौके मिलें, वह खुशी मिले जो वह चाहती है. इससे ज्यादा कुछ नहीं है. लेकिन जब आप घृणास्पद तरीके से इसके साथ अंधे हो जाते है तो स्थितिय़ां दुरुह हो जाती हैं.

लमत आर हसन: ऐसे में आप नफरत का किस तरह सामना करते हैं?

चेतन भगत: मैं सिर्फ अपना काम करता हूं. आपने अपने आपको कथित अभिजातवर्ग का मान लिया है, इसलिए आपने खुद को अप्रासंगिक बना लिया है. आपके भीतर यह समझने की इच्छाशक्ति ही नहीं है कि एक आम भारतीय लड़की कैसे और क्या सोचती है. अपना आंकलन और विचार करने के पहले ही वह 'नहीं' कहना शुरू कर देती है. यह तो महिलावाद नहीं है.

अगर कोई लड़की यह कहती है कि मैं अपने घर का काम करने के बाद अपना सपना पूरा करना चाहती हूं, मैं एक ऐसा आदमी भी चाहती हूं जो मेरी देखभाल करे, तो क्या वह यह कह रही है कि वह महिलावादी नहीं है. उसे बाहर निकाल दिया जाए. तो ऐसे में हम क्या कर सकते हैं? आप उसकी चिन्ताओं पर ध्यान ही नहीं देना चाहते. आपकी उसकी ओर देखने की मंशा भी नहीं है. क्या यह महिलावाद पूरी तरह सही है? नहीं.

जो लोग नफरत करते हैं, उनसे निपटने के कई रास्तों में से एक रास्ता यह हो सकता है कि आप उनकी तरफ ज्यादा ध्यान ही न दें और तब इस नफ़रत का आप शिकार नहीं होंगे. जो लोग इसका शिकार होते हैं, उनमें ज्यादातर ऐसे लोग होते हैं जो अपनी प्रशंसा से भी प्रभावित हो जाते हैं. 

मैं भी इसी रास्ते पर चलता हूं. मुझे याद है, मेरी एक किताब रिलीज होने वाली थी. मैं मुम्बई के इसकान मंदिर में गया था. वहां एक अमरीकन साधु मौजूद थे. मैंने उनसे कहा कि मैं बहुत ही नर्वस हूं. उन्होंने मुझसे कहा कि आपके भीतर समुद्र-सी गहराई होनी चाहिए. 

यह केवल तभी मुमकिन है जब आप लिखना शुरू करें, जो आप लिखना चाहते हैं. जो सही चीज लिखना चाहते हैं, लिखें, फिर वह क्यों नहीं बिकेगी. अपने आंतरिक मन से कहानी का चयन कीजिए, तब आपको स्वतः ही बाजार मिल जाएगा. खुश रहने का यही एक रास्ता है.

लमत आर हसन: आपको महिला की वॉयस में लिखने का विचार कैसे आया?

चेतन भगत: मैं महिलाओं की वॉयस में ढेर सारे कॉलम लिखता था और वे वाकई बहुत ज्यादा वायरल हो गए. मेरे पाठकों ने मुझे बताया कि मेरी पुस्तकों में महिला चरित्रों पर परतें नहीं चढ़ाई गईं है. मैंने 12 सालों तक पुरुषों के वॉयस में लिखा. इसके बाद तय किया कि अब मुझे पूरी तरह यू टर्न ले लेना चाहिए.

लमत आर हसन: आपके बेस्ट सेलर्स में कौन-सी सबसे अच्छी चीज है चेतन लेखक? या चेतन रणनीतिकार?

चेतन भगत: सब चीजें. कोई भी किताब बिना कंटेंट के नहीं बिक सकती. स्टोरी में कंटेट होना चाहिए. भारत में आम तौर पर लोग किताबें नहीं पढ़ते. यहां रीडिंग कल्चर नहीं है. मैं अनुमान लगा सकता हूं कि अन्य लेखक बहुत ही कम पढ़े जाते हैं. मेरे साथ ऐसा नहीं है. मैं हमेशा अपनी स्टोरी पर काम करता रहता हूं. मेरे पास समय ही समय है. मैं पत्रकार नहीं हूं कि मुझे हर रोज एक आर्टिकल लिखना है.

लमत आर हसन: क्या हम इस बात के लिए तैयार रहें कि आपकी इस किताब पर बॉलीवुड फिल्म बन रही है. कंगना लीड रोल में हैं?

चेतन भगत: नहीं, यह स्क्रिप्ट बहुत अलग है. आप सिर्फ किताब पढ़कर कैसे फिल्म का अंदाज लगा सकते है. फिल्म बनाना काफी हिम्मत भरा काम है. 

लमत आर हसन: मुझे बताया गया है कि चेतन भगत की किताब हर दस सैकेण्ड पर एक बिक जाती है.

चेतन भगत: हो सकता है. आप कैलकुलेट कर सकती हैं. काफी प्रतियां बिकती हैं. भारत एक विशाल देश है और मैं कई किताबें बेच लेता हूं. 

लमत आर हसन: आप इतने बिकने वाले इकलौते लेखक हैं?

चेतन भगत: हां, ऐसे इसलिए क्योंकि मैं लम्बे समय तक ब्लैकलिस्ट रहा. यह (वन इंडियन गर्ल) सातवां उपन्यास है. कई भाषाओं में किताबों का अनुवाद हुआ है. हिन्दी में अनुवाद हुआ है. ब्रेल लिपि में है जिनका कोई चार्ज नहीं लिया जाता. ऑडियो बुक्स भी हैं.

First published: 3 November 2016, 7:52 IST
 
लमट र हसन @LamatAyub

Bats for the four-legged, can't stand most on two. Forced to venture into the world of homo sapiens to manage uninterrupted companionship of 16 cats, 2 dogs and counting... Can read books and paint pots and pay bills by being journalist.

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