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जानें क्यों मनाया जाता है महाशिवरात्रि का पर्व

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 February 2017, 13:26 IST
Shivaratri

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. महाशिवरात्रि के दिन विधि-विधान से भगवान भोले नाथ की पूजा अर्चना की जाए तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन का त्यौहार का लोगों के लिए बहुत ही महत्व होता है. शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की अराधना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. महाशिवरात्रि का अपना एक खास महत्व होता है. इस दिन विधि विधान के साथ भगवान शिव की अाराधना करने से वह बेहद प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा करते हैं. ऐसा तथ्य भी है कि जब माता पार्वती ने उनसे पूछा था कि वह किस चीज से सबसे ज्यादा प्रसन्न होते हैं तो भगवान शिव ने कहा कि जब उनके भक्त उनकी अराधना करते हैं तब वह बेहद प्रसन्न होते हैं.

शिवरात्रि से जुड़ी मान्यता:
इस दिन भगवान शिव के भक्त पूरे दिन का उपवास करते हैं और शिवलिंग का दूध, जल और शहद आदि से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं. हिंदू धर्म में लोग इस दिन को काफी शुभ मानते हैं. इस दिन भक्त सच्चे मन से जो प्रार्थना करते हैं भगवान शिव उनकी वह मनोकामना पूर्ण करते हैं. साथ ही इस व्रत करने वालों को जन्म और मोक्ष के चक्र से मुक्ति पा लेता है. शिवरात्रि के व्रत का महिलाओं के लिए विशेष महत्व है. विवाहित और अविवाहित महिलाएं इस दिन व्रत करती हैं  ऐसी मान्यता है कि इस भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. महाशिवरात्रि के दिन मंदिरों में काफी रौनक देखने को मिलती है.

पौराणिक कथा:
ऐसी ही एक दूसरी पौराणिक कथा है समुद्र मंथन की। एक बार समुद्र से जहर निकला, सब देवी देवता डर गए कि अब दुनिया का अंत हो जाएगा. इस परेशानी को लेकर सभी देवता शिव जी के पास पहुंचे. तब भगवान शिव ने वह जहर पी लिया. मगर भगवान शिव ने जहर को उन्होंने निगल की बजाय अपने गले में रख लिया जिसकी वजह से शिव जी का गला नीला हो गया और उसे नीलकंठ का नाम दिया गया. शिव ने दुनिया को बचा लिया और इस उपलक्ष्य में भी शिवरात्रि मनाई जाती है. 

First published: 24 February 2017, 13:26 IST
 
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