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Independence Day 2020: जानिए क्यों 15 अगस्त को दी गई भारत को आजादी, गांधी जी ने नहीं मनाया था जश्न

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 August 2020, 15:26 IST

Independence Day 2020: पूरा देश हर साल 15 अगस्त (15th August) को आजादी का जश्न मनाता है. 200 सालों की ब्रिटिश हुकूमत (British rule) के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत (India) को आजादी मिली थी. आजादी के लिए देश के लाखों युवाओं ने कुर्बानियां दी. तब कहीं जाकर भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद किया जा सका. इसीलिए हर साल 15 अगस्त का दिन भारत में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है. यही नहीं दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाला हर भारतीय इस दिन को जश्न में डूबा नजर आता है. भारत की आजादी (Independence Day) के दिन देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एक ऐतिहासिक भाषण दिया था.

जिसे हम 'ट्रिस्ट विद डेस्टनी' के नाम से जानते हैं. यह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के द्वारा संसद में दिया गया पहला भाषण था. हर साल स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) के मौके पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हैं, लेकिन 15 अगस्त, 1947 को ऐसा नहीं हुआ था. लोकसभा सचिवालय के एक शोध पत्र के मुताबिक जवाहर लाल नेहरू ने आजादी के अगले दिन यानी 16 अगस्त, 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था. यही नहीं भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा का निर्धारण भी 15 अगस्त को नहीं किया गया था. बल्कि इसका फैसला भी 17 अगस्त को किया गया और भारत-पाकिस्तान को बांटने वाली इस रेखा का नाम 'रेडक्लिफ लाइन' (Radcliffe Line) पड़ा.


बता दें कि इससे पहले ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस में इंडियन इंडिपेंडेंस बिल (Indian Independence Bill) 4 जुलाई 1947 को पेश किया गया. इस बिल में भारत के बंटवारे और पाकिस्तान के बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया था. उसके बाद यह बिल 18 जुलाई 1947 को स्वीकारा गया और 14 अगस्त को बंटवारे के बाद 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि को भारत की आजादी की घोषणा कर दी गई और अंग्रेज भारत छोड़ कर चले गए. सबसे बड़ी बिडंबना ये थी कि भारत की आजादी के जश्न में महात्मा गांधी शामिल नहीं हुए थे.

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जबकि महात्मा गांधी ने अपने अहिंसा के विचारों के दम पर भारत को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. जब भारत आजादी का जश्न मना रहा था तब महात्मा गांधी बंगाल के नोआखली में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच हो रही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन पर बैठे थे.

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जानिए क्यों चुनी गई थी भारत को आजाद करने के लिए 15 अगस्त की तारीख

इस साल यानी 15 अगस्त 2020 को भारत को आजाद हुए 73 साल हो जाएंगे. भारत इस दिन अपना 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी गई थी, इस बारे में अलग-अलग इतिहासकारों की मान्यताएं अलग-अलग हैं. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सी राजगोपालाचारी के सुझाव पर माउंटबेटन ने भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख चुनी थी. सी राजगोपालाचारी ने लॉर्ड माउंटबेटन को कहा था कि अगर 30 जून 1948 तक इंतजार किया गया तो हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता नहीं बचेगी.

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ऐसे में माउंटबेटन ने 15 अगस्त को ही भारत की स्वतंत्रता के लिए तय कर दिया. हालांकि, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि माउंटबेटन 15 अगस्त की तारीख को शुभ मानते थे, इसीलिए उन्होंने भारत की आजादी के लिए ये तारीख चुनी थी. 15 अगस्त का दिन माउंटबेटन के हिसाब से शुभ था क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के समय 15 अगस्त, 1945 को जापान की आर्मी ने आत्मसमर्पण किया था और उस समय माउंटबेटन अलाइड फ़ोर्सेज़ के कमांडर थे. इसलिए इस दिन को माउंटबेटन शुभ मानते थे.

Independence day: भारत ही नहीं बल्कि ये देश भी 15 अगस्त को ही मनाते हैं स्वतंत्रता दिवस

First published: 13 August 2020, 15:26 IST
 
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