Home » कल्चर » Independence Day 2018: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने नहीं मनाया था आजादी का जश्न, जानें क्यों ?
 

Independence Day 2018: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने नहीं मनाया था आजादी का जश्न, जानें क्यों ?

सुहेल खान | Updated on: 15 August 2018, 5:51 IST
(File Phot)

15 अगस्त 1947 को जब दिल्ली सहित पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, तब महात्मा गांधी दिल्ली से सैकड़ों मील दूर कोलकाता में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच शांति और सौहार्द कायम करने के लिए प्राणपण में लगे हुए थे.

दरअसल, गांधी जी ने आजादी के दिन को अनशन करके मनाने का फैसला किया था, क्योंकि उनदिनों बंगाल में हिंदू-मुस्लिम एक दूसरे के खून के प्यारे हो रहे थे. चारों तरफ खूनखराबा होता देख महात्मा गांधी ने आजादी का जश्न ना मनाने का फैसला लिया था.

आजादी से कुछ सप्ताह पहले पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल ने कोलकाता में गांधी जी के पास अपना दूत भेजा. उसने गांधी जी से कहा कि वह पंडित नेहरू और सरदार पटेल का एक महत्वपूर्ण पत्र उनके लिए लाया है. तब गांधी जी ने उससे पूछा कि क्या उसने भोजन किया है, उसने मना कर दिया तो गांधी जी ने पहले उसे भोजन कराया और फिर पत्र खोलकर देखा.

पत्र में लिखा था.. बापू, आप राष्ट्रपिता हैं. 15 अगस्त 1947 को पहला स्वाधीनता दिवस होगा. हम चाहते हैं कि आप दिल्ली आकर हमें अपना आशीर्वाद दें. पत्र पढ़ने के बाद महात्मा गांधी ने कहा.. कितनी मूर्खतापूर्ण बात है. जब बंगाल जल रहा है.

हिन्दू और मुस्लिम एक-दूसरे की हत्याएं कर रहे हैं और मैं कोलकाता के अंधकार में उनकी मर्मान्तक चीखें सुन रहा हूं. तब मैं कैसे दिल में रोशनी लेकर दिल्ली जा सकता हूं. बंगाल में शांति कायम करने के लिए मुझे यहीं रहना होगा और यदि जरूरत पड़े तो सौहार्द और शांति सुनिश्चित करने के लिए अपनी जान भी देनी होगी.

गांधी जी उस दूत को विदा करने के लिए बाहर निकले थे. वह एक पेड़ के नीचे खड़े थे. तभी एक सूखा पत्ता टूटकर गिरा. गांधी जी ने उसे उठाया और अपनी हथेली पर रखकर कहा... मेरे मित्र, तुम दिल्ली लौट रहे हो. पंडित नेहरू और पटेल को गांधी क्या उपहार दे सकता है.

मेरे पास न सत्ता है और न सम्पत्ति है. पहले स्वतंत्रता दिवस के मेरे उपहार के रूप में यह सूखा पत्ता नेहरू और पटेल को दे देना. जब वह यह बात कह रहे थे. दूत की आंखों में आंसू आ गए. गांधी जी परिहास के साथ बोले.. भगवान् कितना दयालु है. वह नहीं चाहता कि गांधी सूखा पत्ता भेजे. इसलिए उसने इसे गीला कर दिया. यह खुशी से दमक रहा है. अपने आंसुओं से भीगे इस पत्ते को उपहार के रूप में ले जाओ..

आजादी के दिन गांधी जी का आशीर्वाद लेने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री भी उनसे मिलने पहुंचे, तब गांधी जी ने उनसे कहा.. विनम्र बनो, सत्ता से सावधान रहो, सत्ता भ्रष्ट करती है. याद रखिए, आप भारत के गरीब गांवों की सेवा करने के लिए पदासीन हैं. नोआखाली में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच सौहार्द कायम करने के लिए गांधी जी गांव-गांव घूमे. उनके पास धार्मिक पुस्तकें ही थीं.

उन्होंने सभी हिन्दुओं और मुसलमानों से शांति बनाए रखने की अपील की और उन्हें शपथ दिलाई कि वे एक-दूसरे की हत्याएं नहीं करेंगे. वह हर गांव में यह देखने के लिए कुछ दिन रूकते थे कि जो वचन उन्होंने दिलाया है, उसका पालन हो रहा है या नहीं.

File Photo

उसी दौरान एक गांव में दिल को छू लेने वाली घटना हुई. गांधी जी ने उस गां व के हिन्दुओं और मुसलमानों से कहा कि वह सामूहिक प्रार्थना के लिए अपनी झोपड़ियों से बाहर निकल आएं और शांति के लिए सामूहिक शपथ लें, लेकिन कोई भी बडा-बूढा बाहर नहीं निकला.

गांधी जी ने आंधे घंटे तक इंतजार किया, लेकिन उसके बाद भी जब कोई हिन्दू या मुसलमान बाहर नहीं आया, तो उन्होंने अपने साथ लाई गेंद दिखाकर गांव के बच्चों से कहा.. बच्चो, आपके माता-पिता एक-दूसरे से डरते हैं लेकिन तुम्हें क्या डर है. हिन्दू और मुसलमान भले एक-दूसरे से डरते हों लेकिन बच्चे निर्दोष हैं. तुम भगवान् के बच्चे हो. मैं तुम्हें गेंद खेलने के लिए बुला रहा हूं.

यह सुनकर बच्चे उस मंच की तरफ बढ़ने लगे, जहां गांधी जी बैठे थे। गांधी जी ने गेंद उनकी तरफ फेंकी तो लडके और लडकियां भी उनकी तरफ गेंद वापस फेंकने लगे. आधे घंटे तक गेंद खेलने के बाद उन्होंने ग्रामीणों से कहा.. तुममें साहस नहीं है. यदि तुम ऐसा साहस चाहते हो तो अपने बच्चों से प्रेरणा लो. मुस्लिम समुदाय से जुडा़ बच्चा हिन्दू समुदाय से जुडे़ बच्चे से भयभीत नहीं है.

इसी तरह हिन्दू बच्चा मुस्लिम बच्चे से नहीं डरता है. सब एक साथ आए और मेरे साथ आधे घंटे तक खेले. मेहरबानी करके उनसे कुछ सीखो. यदि तुममे आंतरिक साहस नहीं तो अपने बच्चों से कुछ सीखो. गांधी जी के यह कहने पर हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के बड़े-बूढ़े धीरे-धीरे अपने घरों से निकलने लगे और देखते-देखते वहां बडी़ भीड इकट्ठा हो गई और उन्होंने उन्हें शपथ दिलाई कि वे एक-दूसरे की हत्या नहीं करेंगे.

ये भी पढ़ें- Independence Day पर वायरल हुआ नेशनल एंथम का वीडियो, यूट्यूब पर मिले रिकॉर्डतोड़ व्यूज़

First published: 15 August 2018, 5:49 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी