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Dussehra 2017: क्या आपको पता है कि लंकापति रावण के 10 सिर नहीं थे

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 September 2017, 10:36 IST

सब जानते हैं कि रावण वध के तौर पर ही दशहरा मनाया जाता है. लेकिन जिस 'रावण' को बुराई के प्रतीक के रूप में देखा जाता है दुनिया में इस नाम का दूसरा कोई व्यक्ति नहीं है. राम नाम के तो बहुत मिल जाएंगे, लेकिन रावण नहीं.

रावण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का ज्ञाता होने के साथ-साथ तत्व ज्ञानी तथा बहु-विद्याओं का जानकार भी था. अगर उनके जीवन के बारे में विस्तार से जाना जाए तो ऐसे कई तथ्य मिल जाएंगे जिनके बारे में लोगों को पता भी नहीं होगा. रामकथा में रावण ऐसा पात्र है, जो राम के उज्ज्वल चरित्र को उभारने काम करता है. क्या आप जानते हैं मंदोदरी के अलावा भी थीं रावण की दो अन्य पत्नियां?

इस खास मौके पर आपको रावण से जुड़ी उन 7 रोचक बातों के बारे में बताते हैं जिनके बारे में अब से पहले आपने नहीं सुना होगा.

1. दुनिया में कोई दूसरा रावण नहीं: आपको बता दें कि रावण नाम का इस दुनिया में कोई दूसरा नहीं है. रावण आधा ब्राह्मण और आधा राक्षस था. उसके पिता ब्राह्मण और मां राक्षस थीं. रावण के पिता विश्रवा मुनी थे तो माता कैकसी राक्षसी. कैकसी के अनुरोध पर ही मुनि विश्रवा ने उनसे विवाह किया था.

2. कुबेर का था लंका पर राज: कम ही लोग जानते हैं कि रावण से पहले लंका पर कुबेर का राज था. कुबेर विश्रवा की पहली पत्नी के पुत्र थे. ऐसे में रावण के सौतेले भाई थे. लेकिन लंका पर दिल आ जाने की वजह से रावण ने कुबेर को बेदखल कर दिया.

3. जैन शास्त्र के अनुसार रावण नारायण के समान: जैन शास्त्रों में रावण को प्रति-नारायण माना गया है. उनके मुताबिक 64 श्लाका पुरुषों में रावण की गिनती की जाती है. जैन पुराणों में रावण आगामी चौबीसी में तीर्थंकर की सूची में भगवान महावीर की तरह चौबीसवें तीर्थंकर के रूप में मान्य होंगे. कुछ प्रसिद्ध प्राचीन जैन तीर्थस्थलों पर रावण की मूर्तियां भी प्रतिष्ठित हैं.

4. नहीं थे रावण के 10 सिर: कुछ विद्वानों की मानें तो रावण के 10 सिर नहीं थे. बल्कि रावण के गले में बड़ी-बड़ी गोलाकार नौ मणियां थीं. जिनकी वजह से उनके 10 सिर दिखाई पड़ते थे. माना जाता है कि ब्रह्मा की तपस्या के दौरान उन्होंने अपना सिर 10 बार काट भेंट कर दिया था. जिसके बाद उन्हें दशानन माना जाने लगा था.

5. छह शास्त्रों के थे रचयिता: रावण के परम ज्ञाता होने का सबसे बड़ा प्रमाण ये है कि उन्होंने अपने जीवन काल में 6 शास्त्रों की रचना की थी. उन्हें जीवन के बारे में इतनी जानकारी थी कि कोई उन्हें आत्मसात कर लें तो उसे किसी तरह की विद्या की जरूरत नहीं होगी. रावण ने योग, धर्म, काम, अर्थ, मोक्ष और नाव्या शास्त्र लिखे थे.

6. कुशलतम राजाओं में से एक: रावण पराक्रमी राजा तो थे ही साथ ही कुशल राजा थे. वो जानते थे कि राज्य कैसे चलाना है? अपनी जनता को कैसे खुश रखना है. उन्होंने अपनी नीतियों की वजह सेे सुंबा और बाली द्वीप को जीता था. अपने शासन का विस्तार करते हुए अंगद्वीप, मलयद्वीप, वराहद्वीप, शंखद्वीप, कुशद्वीप, यवद्वीप और आंध्रालय पर विजय प्राप्त की थी. जिस कारण से उनकी तूती पूरी पृथ्वी पर बोलने लगी थी. उनसे हर कोई डरने लगा था.

7. संगीत के थे ज्ञाता: रावण को संगीत का शौक था. वो संगीत जानते भी थे और वीणा बजाना बहुत पसंद करते थे. रावण के पुष्पक विमान की विशेषता थी कि वह छोटा या बड़ा किया जा सकता था. पुष्पक विमान में इच्छानुसार गति होती थी और बहुत से लोगों को यात्रा करवाने की क्षमता थी.

First published: 30 September 2017, 10:24 IST
 
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