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4000 साल पहले शुरु हुई थी New Year मनाने की परंपरा, इस तानाशाह ने सबसे पहले मनाया था नया साल

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 December 2018, 15:33 IST

नए साल के आगमन में अब सिर्फ कुछ घंटे ही बचे हैं. उसके बाद हर कोई नया साल यानि 2019 का जश्न मनाने लगेगा. नए साल में हर किसी की अपनी इच्छाएं होंगी अपनी उम्मीदें होंगी जिसे वो पूरा करने की कोशिश करेगा. लेकिन इस बीच आपको ये जानना जरूरी है कि हम आखिर हर साल नया साल क्यों मनाते हैं और इसे मनाने की शुरुआत आखिर कब और क्यों हुई. आज हम आपको नया साल मनाने की परंपरा और अलग-अलग धर्मों की नये साल मनाने की परंपरा के बारे में बताएंगे.

कहा जाता है कि न्यू ईयर मनाने की परंपरा की शुरुआत करीब 4,000 साल पहले हुई थी. दरअसल, रोम के तानाशाह जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में पूरी दुनिया को एक नया कैलेंडर दिया था. इस कैलेंडर का नाम था जूलियन कैलेंडर. उस समय दुनिया में पहली बार 1 जनवरी को नया साल मनाया गया. तब से लेकर आज तक ईसाई धर्म के लोग इसी दिन को न्यू ईयर की रूप में मनाते हैं.

बता दें कि जूलियस सीजर ने ही साल में 12 महीने और 365 दिन का सूत्र दिया था. जूलियन कैलेंडर को करीब 1600 साल तक इस्तेमाल किया गया. उसके बाद जूलियन कैलेंडर की जगह पर ग्रेगोरियन कैलेंडर को मान्यता मिल दी गई. जिसे पोप ग्रेगारी ने लागू किया था. हालांकि इस कैलेंडर में भी ज्यादा बदलाव नहीं किए गए.

 

यही नहीं नया साल मनाने की परंपरा हर धर्म में अलग-अलग है. हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से होती है. जिसे नव संवत कहते हैं. इसे मनाने की मान्यता ये है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन से सृस्टि की रचना प्रारंभ की थी. अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक, यह तिथि अप्रैल में आती है.

 

वहीं जैन धर्म में नववर्ष की शुरुआत दीपावली के अगले दिन से होती है. इसे मनाने की मान्यता है कि भगवान महावीर को दीपावली के दिन ही मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. इसलिए जैन धर्म के अनुयायी दीपावली के अगले दिन अपना नया साल मनाते हैंवहीं पारसी धर्म के लोग 19 अगस्त को नवरोज के रूप में मनाया जाता है जो उनका नया साल होता है. माना जाता है कि करीब 3,000 साल पहले शाह जमशेदजी ने इसी दिन नवरोज मनाने की शुरुआत की थी.

सिख धर्म को मनाने वाले अपना नया साल वैशाखी पर्व के रूप में मनाते हैं. अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक, हर साल अप्रैल में वैशाखी मनाई जाती हैवहीं मुस्लिम धर्म के लोगों का नया साल मोहर्रम की पहली तारीख से शुरू होता है, जिसे हिजरी कहते हैं. बता दें कि हिजरी कैलेंडर सभी मुस्लिम देशों में इस्तेमाल किया जाता है और दुनियाभर के मुस्लिम अपने धार्मिक पर्व इसी कैलेंडर के हिसाब से मनाते हैं.

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First published: 31 December 2018, 15:13 IST
 
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