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महाभारत में छिपा हुआ है पितृपक्ष की शुरुआत का पौराणिक रहस्य

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 September 2020, 20:24 IST

सनातन मान्यता के मुताबिक जो परिजन अपना शरीर त्यागकर चले जाते हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ जो तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है.दरअसल जिस किसी के परिजन चाहे वो विवाहित हो या अविवाहित हों, बच्चा हो या बुजुर्ग हो किसी की भी मृत्यु हो चुकी हो उन्हें पितर कहा जाता है, पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जाता है. पितरों को खुश करने से घर में सुख शांति बनी रहती है.

मान्यता है कि जब महाभारत के युद्ध में दानवीर कर्ण का निधन हो गया और उनकी आत्मा स्वर्ग पहुंच गई, तो उन्हें नियमित भोजन की बजाय खाने के लिए सोना और गहने दिए गए.इस बात से निराश होकर कर्ण की आत्मा ने इंद्र देव से इसका कारण पूछा. तब इंद्र ने कर्ण को बताया कि आपने अपने पूरे जीवन में सोने के आभूषणों को दूसरों को दान किया लेकिन कभी भी अपने पूर्वजों को भोजन दान नहीं दिया.


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तब कर्ण ने उत्तर दिया कि वो अपने पूर्वजों के बारे में नहीं जानता है और उसे सुनने के बाद, भगवान इंद्र ने उसे 15 दिनों की अवधि के लिए पृथ्वी पर वापस जाने की अनुमति दी ताकि वो अपने पूर्वजों को भोजन दान कर सके. इसी 15 दिन की अवधि को पितृ पक्ष के रूप में जाना जाता है.

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First published: 5 September 2020, 20:24 IST
 
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