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जानिए रोजाना एक घंटा सोशल मीडिया पर देने से क्या होता है नुकसान

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 January 2018, 19:40 IST

दुनिया आज इंटरनेट और स्मार्टफोन पर सिमटती जा रही है. इन दोनों के मिलन का नतीजा सोशल मीडिया आज हर आयुवर्ग के लोगों की लत बन चुका है. लेकिन शायद आपको न पता हो कि रोज सोशल मीडिया पर अपना एक घंटा खर्च करने से क्या नुकसान होता है.

कनाडा के शोधकर्ताओं द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट में पता चला है कि सोशल मीडिया पर रोज एक घंटा देने से आपकी नींद के ढंग (स्लीपिंग पैटर्न) में बदलाव हो जाता है. इस अध्ययन को किए जाने की वजह यह थी कि शोधकर्ता पता लगाएं कि क्यों ज्यादातर युवा आठ घंटों की भरपूर नींद नहीं ले पा रहे हैं.

शोधकर्ताओं ने इस समस्या की मूल जड़ सोशल मीडिया को पाया. जिन लोगों ने दिन में कम से कम अपने 60 मिनट (एक घंटा) WhatsApp, Facebook या Snapchat जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिताए, उन्हें ऐसा न करने वालों की तुलना में सोने (नींद) में ज्यादा परेशानी आई.

जिन व्यक्तियों ने इन ऐप्स और साइट्स पर जितना ज्यादा वक्त बिताया, उन्हें उतनी ही कम नींद आई. शोध में पता चला कि किशोरियां (टीनेज गर्ल्स) सोशल मीडिया की सबसे ज्यादा लती थीं और इसके चलते उन्हें नींद कम आई. लेकिन ऐसा करने वाले लड़कों की भी नींद प्रभावित हुई.

कनाडाई शोधकर्ताओं ने कहा कि यह नतीजे बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सोशल मीडिया का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. बच्चों और किशोर उम्र के लड़के-लड़कियों में नई तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल करने की संभावना होती है. इससे उनमें बुरी आदतें विकसित हो जाती हैं जो वयस्क होने पर भी उनके साथ मजबूती से बनी रहती हैं.

इससे पहले हुए अध्ययनों में पाया गया था कि खराब नींद का संबंध पढ़ाई (अकादमिक) में खराब प्रदर्शन से है. सही नींद न ले पाने वालों में ज्यादा उम्र वाले किशोर, लड़के और ऐसे बच्चे थे जो कम व्यायाम करते थे या जिनका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा नहीं था.

अमेरिकी और कनाडाई निर्देशों के मुताबिक अच्छी सेहत और तंदरुस्ती के लिए छह से 13 साल तक के बच्चों को रात में नौ से 11 घंटे की नींद, जबकि 14 से 17 वर्षीय बच्चों को 10 घंटों की नींद लेनी चाहिए. वहीं, जो 18 साल से ज्यादा उम्र के हैं उन्हें कम से कम सात से नौ घंटे की नींद लेनी चाहिए.

शोध केे वरिष्ठ लेखक और ईस्टर्न ऑन्टैरियो रिसर्च इंस्टीट्यूट के चिल्ड्रेंस हॉस्पिटल के डॉ. जीन फिलिप चैपट ने बताया कि सेहतमंद विकास के लिए नींद एक जरूरी हिस्सा है और यह शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक सेहत पाने के मामले में एक महत्वपूर्ण कारक है.

इस शोध में 11 से 20 साल के 5,242 कनाडाई विद्यार्थियों को शामिल किया गया. इसमें सोशल मीडिया और नींद के तरीकों के बीच संबंध पर जांच की गई. शोध के नतीजे एक्टा पीडियाट्रिका में प्रकाशित हुए हैं.

First published: 24 January 2018, 19:40 IST
 
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