Home » कल्चर » Lal Bahadur Shastri Birthday : Know About Unknown Facts Of Second Prime Minister Of India Lal Bahadur Shastri
 

जब लाल बहादुर शास्त्री ने महिलाओं के लिए लागू कराया था ये खास कानून, 9 साल रहना पड़ा था सलाखों में कैद

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 October 2018, 11:51 IST

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का जन्मदिन है. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था. उनके पिता का नाम मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव था और मां का नाम रामदुलारी था. उन्होंने 9 जून 1964 को भारत के प्रधान मंत्री पद की शपथ ली.

उनके शासनकाल में 1965 का भारत पाक युद्ध शुरू हो गया. शास्त्रीजी ने अप्रत्याशित रूप से हुए इस युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी. जिसकी पाकिस्तान ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी. वह 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 को अपनी मृत्यु तक करीब 18 महीने भारत के प्रधानमंत्री.

शास्त्री जी का ताशकंद शमझौता

साल 1966 में संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के दबाव में लाल बहादुर शास्त्री को पाकिस्तान से शांति समझौते के मसौदे पर बात करने के लिए रूस स्थित ताशकंद जाना पड़ा. लाल बहादुर शास्त्री भारत में लोगों को संबोधित करते हुए कह गये थे कि वे किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएंगे. ताशकंद में भारत और पाकिस्तान के बीच में समझौता किया गया कि दोनों देशों की सेनाएं साल 1949 की सीमा की यथास्थिति पर लौट जाएंगी. राजनयिक और आर्थिक संबंध फिर से सुधारे जाएंगे.

शास्त्री जी को जेल भी जाना पड़ा

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को एक समय जेल की भी हवा खानी पड़ी. वह भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में 9 साल तक जेल में रहे थे. पहली बार वो 17 साल की उम्र में असहयोग आंदोलन के लिए जेल गए, लेकिन बालिग न होने की वजह से उन्हें छोड़ दिया गया. इसके बाद वह सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान 1930 में ढाई साल के लिए जेल गए. 1940 और फिर 1941 से लेकर 1946 के बीच भी उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा. इस तरह कुल नौ साल तक उन्हें जेल में रहना पड़ा.

बेटी की मौत के बाद पैरोल की अवधि से पहले पहुंचे जेल

लालबहादुर शास्त्री उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और राजनेताओं में से एक थे जिन्होंने कानून का पूरी तरह से पालन किया. शास्त्री जी अपने वादों के इतने पक्के थे कि एक बार जब उनकी बेटी बीमार थी तो उन्हें 15 दिन की पैरोल पर छोड़ा गया था. इसी बीच उनकी बेटी की मौत हो गई. शास्त्री जी अपनी पैरोल की अवधि समाप्त होने से पहले ही वापस जेल पहुंच गए थे.

शादी में दहेज की जगह ली थी खादी

शास्त्री जी भी गांधी जी की तरह खादीवादी नेता थे. उन्हें जात-पात से सख्त नफरत थी, तभी उन्होंने अपने नाम के पीछे सरनेम नहीं लगाया. शास्त्री की उपाधि उनको काशी विद्यापीठ से पढ़ाई के बाद मिली थी. वहीं अपनी शादी में उन्होंने दहेज लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन ससुर के बहुत जोर देने पर उन्होंने कुछ मीटर खादी का दहेज लिया था.

ट्रांसपोर्ट सेक्टर में महिलाओं की साझेदारी

एक समय में लाल बहादुर शास्त्री भारत के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर रहे. इस पद पर रहने के दौरान उन्होंने सबसे पहले महिलाओं को बतौर कंडक्टर लाने की शुरुआत की थी. जिससे महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबर की भागीदारी मिल सके.

प्रदर्शकारियों पर लाठी नहीं, पानी की बौछार

लाल बहागुर शास्त्री ने ही प्रदर्शनकारियों को भगाने के लिए लाठी नहीं बल्कि पानी का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था. तब से कई बार प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस लाठी नहीं बल्कि पानी की बौछार का सहारा लेती है.

जब आम लाने पर पत्नी से हुए नाराज

जब स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान शास्त्री जी जेल में थे, तब उनसे मिलने के लिए उनकी पत्नी गई थी. वो अपने साथ छिपाकर दो आम ले आई थीं. इस बात पर खुश होने की जगह वो अपनी पत्नी पर ही नाराज हो गए. शास्त्री जी ने कहा कि कैदियों को बाहर की कोई चीज खाना कानून के खिलाफ है.

ये भी पढ़ें- भारत ही नहीं दुनियाभर के कई देश मनाते हैं बापू का जन्मदिन, जानिए उनसे जुड़ी ये बातें

First published: 2 October 2018, 11:51 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी