Home » कल्चर » Lal Chand Dhissa: An officer who resigned from Civil Services for dalits upliftment and pain
 

दलितों के लिए लड़ने वाले लाहौल के लालचंद ढिस्सा की दास्तां

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 July 2016, 18:48 IST

हिमाचल प्रदेश के लालचंद ढिस्सा 29 साल पहले भारतीय सिविल सेवा में थे. लेकिन समाज में दलितों की हालत को देखकर उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया. अब भी वो दलितों के उत्थान और संघर्ष की मशाल थामे हुए हैं.

लाहौल स्पीति के छोटे से गांव जहालमा में जन्मे लालचंद ढिस्सा ने 1979 में भारतीय सिविल सेवा (एलाइड सर्विस) की परीक्षा पास की. उन्हें अंडर सेक्रेटरी का पद मिला और नौकरी शुरू भी कर दी.

हालांकि नौकरी के दौरान बार-बार जातीय भेदभाव का दर्द उनके मन में उभर आता था. सिविल सेवा की नौकरी उनके लिए एक बोझ बनती जा रही थी. सात साल में यह दर्द इतना बढ़ गया कि दलितों से भेदभाव के सामने दुनिया की तमाम सुविधाएं कम पड़ रही थीं.

1987 में छोड़ी आईएएस की नौकरी

आखिरकार इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए लालचंद ने संघर्ष का फैसला लिया. 1987 में उन्होंने नौकरी छोड़कर दलितों के उत्थान के लिए संघर्ष शुरू किया.

गौर करने वाली बात यह है कि ढिस्सा खुद ट्राइबल (आदिवासी) दलित हैं. ढिस्सा के लंबे संघर्ष के बाद आखिर 2004 में राज्य के एसटी दलितों को अनुसूचित जनजाति के साथ अनुसूचित जाति दोनों का दर्जा मिलना शुरू हुआ.

लालचंद ढिस्सा की कोशिशों का ही नतीजा था कि ऐसा करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बन गया.

2007 में लाहौल स्पीति के कुछ लोगों के दबाव से दलित समुदाय के 16 बच्चों को बौद्ध भिक्षु बनने से रोक दिया गया. ये बच्चे कर्नाटक के एक मठ में बौद्ध भिक्षु बनने गए थे.  बहिष्कार के डर से इन बच्चों को मठ से निकाल दिया गया.

ढिस्सा ने इस मसले को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और धर्मगुरु दलाई लामा के सामने उठाया. नतीजतन, इन बच्चों को दोबारा मठ में बुला लिया गया.

ट्राइबल दलित समाज से आने वाले लालचंद ढिस्सा ने 1987 में आईएएस की नौकरी छोड़ दी

राष्ट्रीय जनजातीय दलित संघ की स्थापना

2004 में लालचंद ढिस्सा ने राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय दलित संघ की स्थापना की. यही नहीं, केंद्रीय भारतीय भाषा संस्था मैसूर के 2006 में लेसर नॉन लैंग्वेजिज ऑफ इंडिया नाम से आयोजित प्रोजेक्ट में उनका अहम योगदान रहा.

ढिस्सा ने लाहौल के दलित समुदाय की बोली जाने वाली भाषा के नाम को चिनाली की बजाय चिनलभाषे बनाने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने एक शब्दकोष भी तैयार किया है, जिसमें करीब 10 हजार शब्दों का संग्रह है. शोध के आधार पर उन्होंने दावा किया है कि चिनलभाषे का संस्कृत से सीधा संबंध है. लालचंद ढिस्सा की दलित उत्थान के लिए लड़ाई अब भी जारी है.

2004 में लालचंद ढिस्सा ने राष्ट्रीय जनजातीय दलित संघ की स्थापना की
First published: 7 July 2016, 18:48 IST
 
अगली कहानी