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जानिए दुनिया के सबसे खुशमिजाज व्यक्ति की नाखुशी की वजह

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:45 IST

तिब्बत के बौद्ध भिक्षु मैथ्यू रिकार्ड को दुनिया का सबसे खुश (हैप्पिएस्ट) व्यक्ति माना जाता है. लेकिन एक ऐसी बात है जो इस खुशमिजाज व्यक्ति को भी नाखुश कर रही है.

यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन में आयोजित ध्यान और करुणा (मेडिटेशन एंड कंपैसन) विषय के 12 साल के अध्ययन में हिस्सा लेने के बाद वैज्ञानिकों द्वारा 70 वर्षीय इस बौद्ध भिक्षु को सबसे खुश व्यक्ति का नाम तब दिया गया था.

लेकिन मूलरूप से फ्रांस के मैथ्यू नेपाल के मठ (मॉनेस्ट्री) में रहते हैं और उन्होंने जीक्यू मैग्जीन से बातचीत में खुलासा किया कि उन्हें यह टाइटिल 'बेतुका' (एबसर्ड) लगता है.

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कई दिनों तक लगातार ध्यान करते रह सकने वाले मैथ्यू ने मैग्जीन से कहा, "मैं और ज्यादा प्रसन्न भिक्षुओं को जानता हूं. मैं वाकई जानता हूं. यह बेतुका या हास्यापद है."

इस अध्ययन के प्रकाशित होने के बाद जब वे काफी ज्यादा फोकस में आ गए तो इससे निपटने के लिए उन्होंने दलाई लामा से पूछा था कि क्या वे कहीं छिप सकते हैं या गायब हो सकते हैं. लेकिन दलाई लामा ने उनसे कहा कि दुनिया को उनके मार्गदर्शन की जरूरत है. 

उन्होंने कहा, "अगर वे लोग चाहते हैं कि तुम सबसे खुश व्यक्ति हो, तो सबसे खुश व्यक्ति बन जाओ."

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बता दें कि मैथ्यू रिकार्ड को दुनिया का सबसे प्रसन्न, खुशमिजाज व्यक्ति घोषित करने के निष्कर्स पर पहुंचने से पहले न्यूरोसाइंटिस्ट रिचर्ड डेविडसन मेडिटेशन करते वक्त मैथ्यू के शरीर पर 256 सेंसर्स लगाते थे. 

रिचर्ड ने पाया कि रिकार्ड का मस्तिष्क उस स्तर की गामा किरणों को उत्पादित करता है जो चेतना, एकाग्रता, सीखने और स्मरणशक्ति से जुड़े होती हैं और ऐसा पहले कभी हुआ हो ऐसा किसी भी वैज्ञानिक लेखों में नहीं लिखा था.

रिचर्ड नेे उस वक्त लिखा, "स्कैन दिखाता है कि उनके मस्तिष्क का बायां हिस्सा दाहिने की तुलना में अत्यधिक गतिशील था, जो उन्हें असामान्य रूप से खुशी की बेहद ज्यादा अनुभूति दिलाने के साथ ही नकारात्मकता की तरफ बहुत कम झुकाव प्रदर्शित करता है."

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सबसे खुशमिजाज व्यक्ति के शीर्षक पाने से इतर रिकार्ड ने अपने जीवन के दर्शन के बारे में अपनी किताबों एल्ट्रूइज्म, ऑन द पाथ टू एनलाइटमेंट और हैप्पीनेस में काफी कुछ लिखा है. उन्होंने कई तस्वीरों वाली किताबें भी प्रकाशित की हैं. 

पिछले साल बिजनेस इनसाइडर ने जब उनसे पूछा कि लोग कैसे खुशी पा सकते हैं पर रिकार्ड ने कहा कि इसके लिए उदारता और परोपकारिता महत्वपूर्ण हैं. रोजाना 15 मिनट तक लगातार प्रसन्नता वाले विचारों को सोचकर अपने मस्तिष्क को इस दिशा में प्रशिक्षित करने से भी काफी फायदा होता है. 

उनके इस विचार का विज्ञान भी समर्थन करता है क्योंकि रिचर्ड की शोध बताती है कि रोज 20 मिनट का ध्यान (मेडिटेशन) करने से व्यक्ति प्रसन्नचित रहता है.

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जीक्यू से बात करते हुए उन्होंने कहा, "दूसरों से खुद की तुलना करना भी खतरनाक है. तुलना करने से प्रसन्नता खत्म हो जाती है."

First published: 18 October 2016, 5:54 IST
 
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