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दुनिया के 20 निर्मम तानाशाहों के बच्चों का जिंदगीनामा

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 3 November 2015, 15:37 IST
QUICK PILL
  • अमेरिकी\r\nपत्रकार जे नॉर्डलिंगर की नई\r\nकिताब चिल्ड्रेन ऑफ मॉन्स्टर्स\r\nमें दुनिया के कुछ बदनाम तानाशाहों\r\nकी औलादों की परवरिश और बाद\r\nकी जिंदगी का लेखा-जोखा\r\nहै.
  • किताब\r\nहिटलर,\r\nसद्दाम,\r\nगद्दाफी,\r\nस्टालिन,\r\nमाओ,\r\nईदी\r\nअमीन जैसे 20\r\nकुख्यात\r\nतानाशाहों का जीवन खंगालकर\r\nलिखी गई है.\r\nसमीक्षकों\r\nका एक समूह किताब पर अमेरिकी\r\nप्रोपैगैंडा का शिकार होने\r\nका आरोप लगाता है.

इतिहास के सबसे क्रूर शासकों (तानाशाहों) के जीवन पर तमाम साहित्य उपलब्ध है. लेकिन अमेरिकी पत्रकार जे नॉर्डलिंगर ने तानाशाहों के जीवन को एक नए सिरे से देखने की कोशिश की है. उनकी किताब "चिल्ड्रेन ऑफ मॉन्स्टर्सः एन एन्क्वायरी इन टू द संस एंड डॉटर्स ऑफ डिक्टेटर्स" निरंकुश शासकों के एक अनछुए हिस्से पर रौशनी डालती है.

नॉर्डलिंगर लिखते हैं कि कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे घर में रहते हैं जहां स्टालिन एक बहुत ही ज्यादा प्यार करने वाला पिता है. सोचिए कि आपके अंतिम नाम के आगे मुसोलिनी, गद्दाफी या चाउसेस्क्यू लगा है और आप उस परिवार में परवरिश पा रहे हैं.

इसी तरह के संदर्भों सहित लिखी गई किताब कुछ नए राज पाठकों के सामने उद्धाटित करती है.

नॉर्डलिंगर ने इसके लिए स्टालिन, माओ, ईदी अमीन, पॉल पॉट और सद्दाम हुसैन जैसे 20 तानाशाहों का जीवन खंगाला.

लेकिन यह किताब उन तानाशाहों के बच्चों के बारे में है जिनका लालन-पालन बहुत ज्यादा असामान्य लोगों के बीच में हुआ.

नॉर्डलिंगर ने अपने विषय की व्याख्या बेहद व्यक्तिगत स्तर पर जाकर की है. इनमें कुछ नायक सरीखे हैं, कुछ खलनायक और कुछ न इधर के रह सके न ही उधर के.

जो खलनायक रहे उन्हें समझना थोड़ा आसान है. इस वर्ग में मुअामार गद्दाफी और सद्दाम हुसैन के बेटों को शामिल किया जा सकता है.

जहां उन्होंने गद्दाफी के बेटे को बहुत ही भयानक बताया है. वहीं, हुसैन के बेटों उदय और कौजाई के बारे में बताने के लिए उन्होंने ईराकी जनरल जोर्ज सैडा की किताब "सद्दाम्स सीक्रेट्स” का सहारा लिया है, जिसमें लिखा है कि वे दोनों सद्दाम से सैकड़ों गुना ज्यादा बुरे थे.

उनके मुताबिक ऐतिहासिक रूप से तानाशाही मुख्यरूप से पुरुषों का क्षेत्र है. नेशनल रिव्यू को दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “आप कुछ महारानियों (तानाशाहों के रूप में) को ही गिन सकते हैं, और यदि आप इसे ध्यान से देखें तो इसमें इंदिरा गांधी का आपातकाल का वक्त भी शामिल है.”

"मुख्यत: तानाशाही पुरुष से जुड़ा है. मेरी किताब में कई तानाशाहों की बेटियां भी शामिल हैं जो शायद पुरुष होेने की स्थिति में अपने पिता का सफल वारिस बनतीं."

किताब का असली कोशिश उन भयावह स्मृतियों की समझना है (ज्यादातर भावनात्मक) जो इन तानाशाहों द्वारा अपनी औलादों को दी गईं. लेखक उन बच्चों से काफी प्रभावित भी है जो अपने पिता से अलग पहचान बनाने में सफल रहे या इस दिशा में उन्होंने कोशिश की.

नॉर्डलिंगर के मुताबिक ईदी अमीन की 21 अलग-अलग औरतों से 60 औलादें थीं. वह काफी प्यार करने वाला पिता था. जबकि पोल पॉट की एक बेटी थी जिस पर वो जान छिड़कता था.

किताब रूसी तानाशाह स्टालिन की बेटी स्वेतलाना के जीवन पर विस्तार से रोशनी डालती है. उसका जीवन बेहद आकर्षक था. अमेरिका से रिश्ते तोड़ने के बाद वह दुनिया की कुछ मशहूर शख्सियतों में शामिल हो गई. बाद में उसने तीन हिस्सों की जीवनी में खुद से जुड़ी तमाम बातों का खुलासा किया.

उसके जीवन का दिलचस्प पहलू भारत से जुड़ा है. अपने भारतीय प्रेमी बृजेश सिंह की अस्थियां को लेकर वह भारत भी आई. इसके लिए उसे भारत स्थिति अमेरिकी दूतावास में राजनीतिक शरण भी लेनी पड़ी.

रोमानियाई तानाशाह चाउसेस्क्यू और उसकी शातिर पत्नी एलेना के दो बेटे थे. इनमें से एक बहुत ही निर्मम था, बिल्कुल अपने पिता की तरह. उसने जीवन भर मनमाने तरीके से लोगों पर अत्याचार किया. उसने अनगिनत बलात्कार और हत्याएं कीं. नॉर्डलिंगर के मुताबिक उसका दूसरा बेटे वैलेंटिन बड़े बेटे कि विपरीत शांत प्रवृत्ति का था. उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया.

किताब में मध्य अफ्रीका के तानाशाह बोकासा से जुड़ी कुछ बेहद भयावह और अमानवीय कहानियों से परदा उठाती है- “उसकी दो बेटियों की एक साथ ही शादी हुई. कुछ वक्त बाद ही इन दोनों की अपने एक पति और नवजात बेटे के साथ मौत हो गई.”

संभवत: किसी भी अन्य तानाशाह की तुलना में हिटलर इस शब्द पर सबसे खरा उतरने वाला शासक सिद्ध हुआ. किताब के मुताबिक हिटलर की कोई औलाद नहीं थी.

एनपीआर को दिए अपने साक्षात्कार में नॉर्डलिंगर कहते हैं कि एक समय ज्यां मारी लॉरेट नाम के एक फ्रांसीसी व्यक्ति ने खुद को हिटलर का बेटा होने का दावा किया था. हालांकि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो हिटलर का बेटा था या नहीं. “मेरे लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि जिस व्यक्ति को हिटलर का बेटा होने का भरोसा था उसके ऊपर हिटलर का क्या प्रभाव था.”

और इसका जवाब बेहद निराश करने वाला है. मुझे लगता है कि वह एक स्थिर इंसान नहीं था. पहले उसने इस बात का विरोध किया, फिर इस बात को मान लिया और वो भी पूरे गर्व के साथ. यह बहुत दुखद था.”

(चिल्ड्रेन ऑफ मॉन्स्टर्सः एन एन्क्वायरी इनटू द संस एंड डॉटर्स ऑफ डिक्टेटर्स को एनकाउंटर बुक्स (यूएसए) द्वारा प्रकाशित किया गया है.)

First published: 3 November 2015, 15:37 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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