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महाशिवरात्रि स्पेशल: सुख और समृद्धि के लिए महाशिवरात्रि पर करें ये काम

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 February 2018, 10:39 IST

 

भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि का पर्व इस साल दो दिन यानि मंगलवार और बुधवार को मनाया जा रहा है. पुराणों में महाशिवरात्रि को मनाने के कई कारण बताए गये है. हिंदू कलेंडर के मुताबिक एक साल में बारह शिवरात्रियां होती हैं. शिवरात्रि प्रत्येक हिन्दू माह की कृष्ण चतुर्दशी यानि कि महीने के अंतिम दिन होती है. लेकिन माघ मास की कृष्ण चतुर्दशी महाशिवरात्रि के रूप में पूरे देश में मनाई जाती है. इसी के साथ माघ मास का अंत हो जाता है और दूसरे दिन से हिंदू वर्ष का आखिरी महीना फाल्गुन शुरु हो जाता है.

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क्या है महाशिवरात्रि मनाने की परम्परा

महाशिवरात्रि को मनाने के पीछे परम्परा है कि इस दिन भगवान शंकर और मां पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था. बताया जाता है कि इसी दिन प्रथम शिवलिंग प्रकट हुआ था. इसीलिए इस दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है और इस दिन शिव भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करते हैं इसके साथ ही पंचक्षरी मंत्र का जाप किया जाता है.

 

 

वहीं श्रीमद् भागवत कथा के मुताबिक कहा जाता है कि एक बार देवताओं और दैत्यों ने मिल कर भगवान की अनुमति से समुद्र मंथन की योजना बनाई ताकि अमृत प्राप्त किया जा सके लेकिन उस समुद्र मंथन के समय सबसे पहले हलाहल विष (जिसे कालकूट विष भी कहा जाता है) निकला. वह विष इतना विषैला था कि उससे समस्त जगत भीषण ताप से पीड़ित हो गया था. देव-दैत्य बिना पिए उसको सूंघते ही बेहोश हो गए. देवताओं की प्रार्थना पर और मानव के कल्याण के लिए उस हलाहल विष को भगवान शिव ने पीने का निर्णय लिया. शिव ने उस विष को पी लिया, लेकिन उसे निगला नहीं और विष अपने गले में ही रोक लिया. इसी विष से भगवान शिव का गला नीला हो गया. इसीलिए उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है. इसीलिए महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है.

शिवरात्रि का व्रत रखने से मिलती है पापों से मुक्ति

हिंहू शास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव मनुष्य के सभी कष्टों एवं पापों को हरने वाले हैं. यानि सांसारिक कष्टों से भगवान शिव ही मुक्ति दिला सकते हैं. इसीलिए प्रत्येक हिंदू मास के अंतिम दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है. साथ ही भगवान शिव से अपने पापों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है. शास्त्रों के मुताबिक, शुद्धि एवं मुक्ति के लिए रात्री के निशीथ काल में की गई साधना सर्वाधिक फलदायक होती है. इसीलिए इस दिन रात्रि जागरण करके निशीथ काल में भगवान शिव की साधना एवं पूजा करने के बहुत महत्व है.

 

 

पंचक्षरी मंत्र का करें जाप

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को खुश करने के लिए पंचक्षरी मंत्र का जप करना चाहिए. इससे अंतकरण की शुद्धि होती है और वह व्यक्ति भगवान शिव की दया का पात्र होता है.

देवों के देव हैं भगवान शिव

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक भगवान शिव सब देवों में बड़े हैं, वो सर्वत्र समरूप में स्थित एवं व्यापक हैं. इसलिए वे ही सबकी आत्मा हैं. भगवान शिव निष्काल एवं निराकार हैं. भगवान शिव साक्षात ब्रह्म का प्रतीक हैं तथा शिवलिंग भगवान शंकर के ब्रह्म तत्व का बोध करता है. इसलिए भगवान शिव की पूजा में निष्काल लिंग का प्रयोग किया जाता है. महाशिवरात्रि पर जो लोग भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा अर्चना करते हैं उन लोगों पर शिव की कृपा होती है. उन्हें धन और एश्वर्य की प्राप्ति होती है.

 

First published: 13 February 2018, 10:38 IST
 
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