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महाशिवरात्रि स्पेशलः भगवान शिव के ये अनदेखे मंदिर, दर्शन मात्र से हो जाते हैं कष्ट दूर

सुहेल खान | Updated on: 13 February 2018, 13:36 IST

 

भारत में महाशिवरात्रि का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. भगवान शिव को समर्पित इस त्योहार के दिन शिव का गंगाजल से स्नान किया जाता है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान शिव सभी देवों में श्रेष्ठ हैं. इसीलिए पूरे देश में भगवान शिव ऐसे कई मंदिर हैं जहां जाने की तमन्ना हर शिवभक्त की होती है.

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आज हम आपको भारत के ऐसे ही कुछ मंदिरों के बारे में बताएंगे जो भगवान शिव को समर्पित हैं. जिनके दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं.

 

काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी

काशी विश्‍वनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है. काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इस मंदिर को हजारों साल बनाया गया था. काशी विश्‍वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्‍ट स्‍थान माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर के दर्शन करने और गंगा में स्नान करन से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसीलिए हर व्यक्ति एक बार इस मंदिर के दर्शन करना चाहता है.

भगवान बैद्यनाथ मंदिर, देवघर

भगवान बैद्यनाथ का मंदिर झारखंड के देवघर में स्थित है. इस मंदिर को भी हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ-स्थल माना जाता है. वहीं इस शहर को बाबाधाम नाम से भी जाना जाता है क्योंकि शैव पुराण में देवघर को बारह जोतिर्लिंगों में से एक माना गया है. यहाँ भगवान शिव का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर स्थित है. हर साल सावन के महीने में यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धांलु पहुंचते हैं.

अमरनाथ गुफा

जम्‍मू कशमीर में स्थित अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ भी कहा जाता है. क्यों कि यहीं भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था. यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है. प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं.

केदारनाथ मंदिर

ये मंदिर उत्‍तराखडं केदारनाथ में स्थित है. साल 2013 में यहां भीषण प्राकृतिक आपदा आई थी. जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौत हो गई, लेकिन मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. वैसे ये मन्दिर उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जनपद में पड़ता है. हिमालय की गोद में स्थित केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सामिल है. साथ ही ये मंदिर चार धाम और पंच केदार में से भी एक है. यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के बीच ही दर्शन के लिए खुलता है. पत्‍थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय ने कराया था. यहां पर मौजूद शिवलिंग काफी प्राचीन है.

लिंगराज मंदिर

लिंगराज मंदिर ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है. यह इस शहर के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है. इस मंदिर की धार्मिक कथा है कि मां पार्वती ने लिट्टी और वसा नाम के दो राक्षसों का वध यहीं पर किया था. उनका वध करने के बाद जब उन्हें प्यास लगी तो भगवान शिव ने कूप बनाकर सभी पवित्र नदियों को योगदान के लिए बुलाया. यहीं पर बिन्दूसागर सरोवर है तथा उसके निकट ही लिंगराज का विशालकाय मन्दिर है.

महाकालेश्वर मंदिर

महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. ये मंदिर मध्यप्रदेश उज्जैन स्थित है. ये मंदिर महाकालेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है. ऐसी मान्यता है कि इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.

मल्लिकार्जुन मंदिर

मल्लिकार्जुन मंदिर आंद्र प्रदेश के कुर्रनूल में स्थित है. इस मंदिर की भी बहुत धार्मिक मान्यता है. यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.

रामेश्वरम मंदिर

ये मंदिर तमिलनाडु के रामनाथपुरम में स्थित है. ये तीर्थ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है. इसके अलावा यहां स्थापित शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. इसे दक्षिण भारत का काशी नाम से भी जाना जाता है.

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

ये मंदिर गुजरात में स्थित है. सोमनाथ मंदिर एक महत्वपूर्ण हिन्दू मंदिर है जिसकी गिनती 12 ज्योतिर्लिंगों में होती है. कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था. इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है.मंदिर के अब तक 17 बार नष्ट किया जा चुका है. लेकिन हर बार इसका पुनरनिर्माण किया गया.

 

मुरुदेश्वर शिव मंदिर

ये मंदिर कर्नाटक में स्थित है. भगवान शिव के एक नाम पर पड़ा है. यहां विश्व में भगवान की दूसरी सबसे ऊंची मूर्ति लगाई गई है. यह मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित है. यह मैंगलोर से करीब 160 किलोमीटर दूर अरब सागर के किनारे बसा हुआ है.

First published: 13 February 2018, 13:36 IST
 
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